पूर्वोत्तर के पारंपरिक सुगंध उद्योग को नई रफ्तार देते हुए केंद्र सरकार ने असम के अगरवुड उत्पादों के लिए अंतरराष्ट्रीय व्यापार की राह आसान कर दी है। गुवाहाटी स्थित लोकप्रिय गोपीनाथ बोरदोलोई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे को अगरवुड चिप्स और अगरवुड तेल के निर्यात के लिए अधिकृत केंद्र की मंजूरी मिल गई है। इस बड़े फैसले से असम समेत पूरे पूर्वोत्तर क्षेत्र के अगरवुड किसानों, स्थानीय उत्पादकों और व्यापारियों के लिए विदेशों में माल भेजना काफी सरल हो जाएगा।
केंद्रीय मंत्री ने दी मंजूरी की जानकारी
केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने शनिवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा कि असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के अनुरोध पर केंद्र ने लोकप्रिय गोपीनाथ बोरदोलोई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे को इस विशेष उत्पाद के निर्यात केंद्र के रूप में स्वीकृत किया है। केंद्रीय मंत्री ने बताया कि असम देश में अगरवुड का अग्रणी उत्पादक है, और यह कदम न केवल असम बल्कि पूरे पूर्वोत्तर के लिए लॉजिस्टिक्स के मोर्चे पर एक बहुत बड़ी छलांग साबित होगा। उन्होंने असम और पूर्वोत्तर के लोगों को बधाई देते हुए कहा कि इससे वैश्विक बाजार स्थानीय उत्पादकों के और करीब आ सकेंगे।
दुबई खेप के बाद मिला बड़ा कानूनी आधार
यह फैसला असम द्वारा अक्टूबर महीने में दुबई को 123 किलोग्राम अगरवुड चिप्स का सफल निर्यात किए जाने के तुरंत बाद सामने आया है। राज्य सरकार ने उस खेप को पारंपरिक सुगंध उद्योग के लिए एक ऐतिहासिक सफलता के रूप में रेखांकित किया था। मुख्यमंत्री सरमा ने उस समय कहा था कि इस तरह की शुरुआती खेप असम के अगरवुड उत्पादों की वैश्विक पहुंच का दायरा बढ़ाने में बेहद मददगार साबित होगी। अब स्थानीय एयरपोर्ट से ही निर्यात की औपचारिक अनुमति मिलने से कागजी कार्रवाई और परिवहन के जटिल झंझट काफी हद तक खत्म हो जाएंगे।
देश के कुल संसाधनों में असम की 81 फीसदी हिस्सेदारी
मुख्यमंत्री कार्यालय के अनुसार, भारत के कुल अगरवुड संसाधनों का लगभग 81 प्रतिशत हिस्सा अकेले असम में मौजूद है। यह पूरा क्षेत्र राज्य के 50,000 से अधिक किसानों और श्रमिकों को आजीविका प्रदान करता है। अगरवुड एक सुगंधित और रालदार लकड़ी होती है, जो एक्विलेरिया प्रजाति के पेड़ों से प्राप्त की जाती है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस लकड़ी और इसके अर्क की भारी मांग है। इसका व्यापक उपयोग महंगे इत्र, अगरबत्ती, धूप, आवश्यक तेलों और अन्य सुगंध आधारित सौंदर्य एवं चिकित्सीय उत्पादों को तैयार करने में किया जाता है। स्थानीय स्तर पर निर्यात केंद्र बनने से बिचौलियों की भूमिका घटेगी और स्थानीय उत्पादकों को अपनी उपज का बेहतर अंतरराष्ट्रीय मूल्य सीधे मिल सकेगा।




















