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मेघालय में यूडीपी के ग्यारह विधायकों ने छोड़ा साथ, भाजपा और एनपीपी की सीटें बढ़ींराजनीति
1 नव॰ 2026, 6:02 pm (2 घंटे पहले)· 1

मेघालय में यूडीपी के ग्यारह विधायकों ने छोड़ा साथ, भाजपा और एनपीपी की सीटें बढ़ीं

यूनाइटेड डेमोक्रेटिक पार्टी के 11 विधायकों के अलग-अलग दलों में शामिल होने से मेघालय विधानसभा के समीकरण पूरी तरह बदल गए हैं। इसके चलते अध्यक्ष मेतबाह लिंगदोह अकेले पड़ गए और उन्होंने राज्य मंत्रिमंडल से अपना इस्तीफा दे दिया।

पूर्वोत्तर के राज्य मेघालय में एक अप्रत्याशित घटनाक्रम के तहत प्रमुख क्षेत्रीय दल यूनाइटेड डेमोक्रेटिक पार्टी में बहुत बड़ी टूट सामने आई है। साठ सदस्यीय सदन में बारह विधायकों वाली इस पार्टी के ग्यारह सदस्यों ने एक साथ मूल संगठन से दूरी बना ली। इस सामूहिक कदम के चलते सदन में सत्तारूढ़ नेशनल पीपुल्स पार्टी और भारतीय जनता पार्टी की ताकत में उल्लेखनीय इजाफा दर्ज किया गया है, जबकि क्षेत्रीय दल के खाते में अब केवल उनके प्रमुख ही शेष रह गए हैं।

विधानसभा में शक्ति संतुलन का नया गणित

इस बड़े फेरबदल के बाद सदन के भीतर विभिन्न दलों की सदस्य संख्या में भारी बदलाव आया है। बागी रुख अख्तियार करने वाले ग्यारह विधायकों में से आठ सदस्यों के समूह ने भाजपा में शामिल होने का फैसला किया। वहीं बाकी बचे तीन विधायकों ने मुख्यमंत्री कॉनराड के. संगमा के नेतृत्व वाली एनपीपी के साथ जाने का रास्ता चुना। इस कदम के नतीजे में सदन में भाजपा के सदस्यों की संख्या दो से बढ़कर सीधे दस तक पहुंच गई है। दूसरी ओर, तीन नए सदस्यों के प्रवेश के बाद एनपीपी का आंकड़ा छत्तीस पर पहुंच गया है, जिससे सदन में उसकी स्थिति पहले की तुलना में कहीं अधिक मजबूत हो गई है।

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भाजपा और एनपीपी में शामिल होने वाले चेहरे

भाजपा का दामन थामने वाले आठ विधायकों में पूर्व मंत्री लाहमेन रिम्बुई और किरमेन शायला के नाम शामिल हैं। उनके साथ पियुस मारवीन, मेयरलबोर्न साइम, मैथ्यू बियोंडस्टार कुर्बाह, ओलान सिंह सुइन, बालाजिद कुफर सिंगरेम तथा सिनशार कुफर रॉय लिंगदोह थाबाह ने भी भाजपा में जाने का निर्णय लिया। दूसरी तरफ, एनपीपी के पाले में जाने वाले तीन सदस्यों में वरिष्ठ नेता पॉल लिंगदोह, रेनीकटन लिंगदोह टोंगखर और नुजोरकी सुंगोह शामिल रहे। इन सभी नेताओं के अलग-अलग खेमों में बंटने से क्षेत्रीय पार्टी की विधायी मौजूदगी लगभग समाप्त होने के कगार पर पहुंच गई है।

दलबदल विरोधी कानून और विलय की वैधता

सदन की सदस्यता रद्द होने से बचाने के लिए कानूनी प्रावधानों का विशेष ध्यान रखा गया। विधानसभा सचिवालय की ओर से जारी आधिकारिक सूचना के अनुसार, आठ विधायकों के भाजपा में विलय संबंधी प्रस्ताव को औपचारिक रूप से स्वीकार कर लिया गया है। वहीं एनपीपी में गए तीन विधायकों के मामले में भी तकनीकी आधारों की पड़ताल की गई, जहां उन्होंने मूल विधायी समूह के दो-तिहाई सदस्यों के समर्थन का तर्क रखा। संविधान की दसवीं अनुसूची के पैरा 4 में उल्लिखित नियमों के तहत निर्धारित कानूनी शर्तें पूरी होने के कारण इन सभी जनप्रतिनिधियों को अयोग्यता की कार्रवाई से सुरक्षा हासिल हो गई।

प्रदेश अध्यक्ष का कैबिनेट पद त्यागने का फैसला

विधायकों के इस सामूहिक पलायन के बीच पार्टी के प्रमुख मेतबाह लिंगदोह ने शनिवार को मंत्री पद छोड़ने की घोषणा कर दी। उन्होंने मुख्यमंत्री को अपना त्यागपत्र सौंपा और राज्य में तेजी से बदले घटनाक्रम को इसकी वजह बताया। एक आधिकारिक बयान के दौरान उन्होंने स्पष्ट किया कि पद छोड़ने का यह निर्णय पूरी तरह उनका व्यक्तिगत था और किसी भी प्रकार का राजनीतिक दबाव उन पर नहीं डाला गया था। साल 2023 के पिछले विधानसभा चुनाव में बारह सीटें जीतकर सदन की दूसरी सबसे बड़ी ताकत के रूप में उभरी इस पार्टी के सामने अब अपने बचे हुए सांगठनिक ढांचे को नए सिरे से खड़ा करने की कठिन चुनौती आ खड़ी हुई है।

सवाल-जवाब

यूडीपी के कितने विधायकों ने पार्टी छोड़ी है?
यूडीपी के 12 में से 11 विधायकों ने पार्टी का साथ छोड़ दिया है।
कौन से विधायक किस पार्टी में शामिल हुए?
आठ विधायक भाजपा में शामिल हुए हैं, जबकि तीन विधायकों ने एनपीपी का दामन थामा है।
इस बदलाव के बाद विधानसभा में भाजपा और एनपीपी की सीटें कितनी हो गई हैं?
विधानसभा में अब भाजपा के पास 10 सीटें और एनपीपी के पास 36 सीटें हो गई हैं।
क्या इन विधायकों की सदस्यता पर कोई खतरा है?
नहीं, संविधान की दसवीं अनुसूची के पैरा 4 के तहत दो-तिहाई विलय की शर्तें पूरी होने के कारण उनकी सदस्यता बरकरार रहेगी।
यूडीपी अध्यक्ष मेतबाह लिंगदोह ने क्या कदम उठाया?
पार्टी में अकेले पड़ने के बाद मेतबाह लिंगदोह ने मुख्यमंत्री को अपना कैबिनेट इस्तीफा सौंप दिया।
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