मेघालय में लूम शिलांग स्थित शिलांग पीक रोपवे परियोजना को लेकर राजनीतिक और प्रशासनिक गतिरोध गहरा गया है। वॉयस ऑफ द पीपुल पार्टी यानी वीपीपी ने शुक्रवार को मेघालय सरकार को सख्त चेतावनी देते हुए कहा है कि यदि इस विवादित परियोजना को मौजूदा स्थान से रद्द नहीं किया गया, तो वह अदालत का दरवाजा खटखटाएगी। पार्टी का रुख है कि प्रशासन सुप्रीम कोर्ट के फैसले की अनदेखी कर काम आगे बढ़ा रहा है, जो सीधे तौर पर अदालत की अवमानना का मामला बनता है।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले की अनदेखी का आरोप
वीपीपी के अध्यक्ष आर्डेंट मिलर बसाइयावमोइत ने स्थिति पर असंतोष व्यक्त करते हुए कहा कि पार्टी को उम्मीद थी कि सरकार स्थानीय नागरिकों की मांगों और विरोध को गंभीरता से सुनेगी। उन्होंने कहा कि पार्टी लंबे समय से इस बात का इंतजार कर रही थी कि सरकार जनभावनाओं का सम्मान करते हुए काम रोकेगी, लेकिन राज्य प्रशासन अपनी जिद पर अड़ा नजर आ रहा है।
आर्डेंट मिलर बसाइयावमोइत ने स्पष्ट संकेत दिया कि यदि रुख नहीं बदला, तो उनकी पार्टी परियोजना से जुड़े सभी संबंधित विभागों के खिलाफ अदालत में अवमानना याचिका दाखिल करने के लिए मजबूर होगी। उन्होंने कहा कि इस कानूनी कार्रवाई में मुख्य रूप से पर्यटन विभाग निशाने पर रहेगा, जो इस परियोजना को आगे बढ़ाने में सबसे आगे है।
पर्यटन, वन विभाग और स्थानीय नेतृत्व पर सवाल
वीपीपी प्रमुख ने सभी संबंधित सरकारी विभागों से अपील की है कि वे इस कानूनी चेतावनी को हल्के में न लें। उन्होंने जोर देकर कहा कि लूम शिलांग में चल रहे निर्माण कार्य को पूरी तरह बंद किया जाना चाहिए और स्थानीय निवासियों की मांग के अनुरूप इस रोपवे परियोजना को किसी अन्य उपयुक्त स्थान पर स्थानांतरित किया जाना चाहिए।
बसाइयावमोइत ने पर्यटन विभाग के साथ-साथ वन विभाग और रियात लाबान के नेताओं का नाम लेते हुए कहा कि ये सभी शीर्ष अदालत के आदेशों की अवहेलना करने के दोषी प्रतीत होते हैं। उन्होंने लाबान पिल्लुन के उन निवासियों का खुला समर्थन किया जो जॉइंट एक्शन कमेटी यानी जेएसी के बैनर तले इस परियोजना का विरोध कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि वीपीपी प्रदर्शनकारियों के इस रुख के साथ मजबूती से खड़ी है कि रोपवे को ऐसी जगह बनाया जाना चाहिए जहाँ जनता को वास्तव में इस प्रकार की सुविधा की आवश्यकता हो। इसके साथ ही उन्होंने स्थानीय आबादी की जायज चिंताओं के प्रति सरकार की संवेदनहीनता की भी आलोचना की।
केएचएडीसी अधिकारी पर एफआईआर को बताया बेतुका
विवाद उस समय और भड़क गया जब सरकार ने खासी हिल्स ऑटोनॉमस डिस्ट्रिक्ट काउंसिल यानी केएचएडीसी के प्रवर्तन अधिकारी कोरडोर सिनरेम के खिलाफ पुलिस में एफआईआर दर्ज कराई। कोरडोर सिनरेम ने मादन लाबान स्थित लोअर टर्मिनल स्थल को सील कर दिया था। वीपीपी अध्यक्ष ने सरकारी अमले द्वारा दर्ज इस एफआईआर को पूरी तरह से बेतुका करार दिया।
उन्होंने कहा कि सिनरेम केवल अपने आधिकारिक कर्तव्यों का पालन कर रहे थे और परिषद के नियमों को लागू करवा रहे थे। बसाइयावमोइत ने चुनौती देते हुए कहा कि यदि पर्यटन या अन्य संबंधित विभाग में कानूनी कार्रवाई करने का साहस था, तो उन्हें सीधे स्वायत्त जिला परिषद की कार्यकारी समिति को नामजद करना चाहिए था, जिसका नेतृत्व वर्तमान में वीपीपी कर रही है।
वन प्रबंधन कानून के प्रावधानों का हवाला
कानूनी स्थिति की व्याख्या करते हुए वीपीपी अध्यक्ष ने संबंधित विभाग को वन कानूनों का गहराई से अध्ययन करने की नसीहत दी। उन्होंने यूनाइटेड खासी जयंतिया हिल्स डिस्ट्रिक्ट मैनेजमेंट एंड कंट्रोल ऑफ फॉरेस्ट एक्ट, 1958 के वैधानिक प्रावधानों का उल्लेख किया।
उन्होंने बताया कि इस कानून के तहत रायद वनों की देखरेख और प्रबंधन रायद के प्रमुखों द्वारा स्थानीय प्रशासनिक प्रमुखों के अधीन किया जाता है। इसके अलावा, यह पूरी व्यवस्था जिला परिषद की कार्यकारी समिति द्वारा तैयार किए गए नियमों और विनियमों के दायरे में आती है। ऐसे में स्वायत्त परिषद के अधिकारों को नजरअंदाज कर किसी भी परियोजना को आगे बढ़ाना कानूनन गलत है।



















