नॉर्थ-ईस्टर्न हिल यूनिवर्सिटी के शिलांग परिसर में हिंदी विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ आलोक सिंह को प्रतिष्ठित डॉ एपीजे अब्दुल कलाम पुरस्कार प्रदान किया गया है। उन्हें यह सम्मान साहित्य और शिक्षा के क्षेत्र में दिए गए उल्लेखनीय योगदान के लिए मिला है। विशेष रूप से मेघालय के साथ-साथ समूचे पूर्वोत्तर भारत में हिंदी भाषा के प्रचार-प्रसार में निभाई गई उनकी सक्रिय भूमिका को इस मंच पर सराहा गया।
शिलांग में आयोजित हुआ सम्मान समारोह
डॉ एपीजे अब्दुल कलाम फाउंडेशन की शिलांग इकाई ने 19 सितंबर को एक विशेष कार्यक्रम आयोजित किया था। इस आयोजन में डॉ आलोक सिंह को यह सम्मान औपचारिक रूप से सौंपा गया। यह पूरा कार्यक्रम पूर्व राष्ट्रपति और महान वैज्ञानिक डॉ एपीजे अब्दुल कलाम की 11वीं पुण्यतिथि की स्मृति में आयोजित हुआ था। मंच पर उपस्थित वक्ताओं ने विज्ञान, शिक्षा और राष्ट्र निर्माण में डॉ कलाम के ऐतिहासिक योगदान को याद किया और युवाओं के विकास पर उनके संदेश को रेखांकित किया।
भारतीय भाषाओं के बीच समन्वय का प्रयास
डॉ आलोक सिंह अकादमिक और सांस्कृतिक मंचों के माध्यम से भारतीय भाषाओं के बीच आपसी संवाद को मजबूत बनाने में जुटे रहे हैं। उन्होंने साहित्यिक, शैक्षणिक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के जरिए विभिन्न भाषाई समुदायों को जोड़ने की दिशा में ठोस काम किया है। इसके अलावा वे एक वक्ता और विषय विशेषज्ञ के रूप में राष्ट्रीय एकता, युवा चेतना, भारतीय साहित्य और पूर्वोत्तर भारत की सांस्कृतिक विरासत से जुड़े विषयों पर लगातार अपनी बात रखते रहे हैं।
डॉ कलाम के विचारों पर चर्चा
पुरस्कार ग्रहण करने के बाद अपने संबोधन में डॉ सिंह ने डॉ कलाम के विचारों और जीवन दर्शन पर विचार व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि नई पीढ़ी के निर्माण में ज्ञान, शिक्षा, साहित्य और रचनात्मक सोच की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण होती है। समारोह में उपस्थित अन्य वक्ताओं ने भी इस बात पर बल दिया कि देश की वास्तविक प्रगति तभी संभव है जब युवा वर्ग राष्ट्र निर्माण में अपनी सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करे।





















