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मेघालय और तमिलनाडु के बीच सुशासन पर सहयोग बढ़े, महाबलीपुरम में बोले डिप्टी चीफ व्हिप रॉनी वी लिंगदोहमेघालय
30 अक्तू॰ 2026, 1:30 am (2 घंटे पहले)· 0

मेघालय और तमिलनाडु के बीच सुशासन पर सहयोग बढ़े, महाबलीपुरम में बोले डिप्टी चीफ व्हिप रॉनी वी लिंगदोह

महाबलीपुरम में आयोजित दो दिवसीय विधायक नेतृत्व कार्यक्रम में मेघालय विधानसभा के डिप्टी चीफ व्हिप रॉनी वी लिंगदोह ने दोनों राज्यों के बीच साझा नीति और प्रभावी जनसेवा पर जोर दिया।

जनप्रतिनिधियों को अपनी भूमिका केवल पद तक सीमित रखने के बजाय जनता के प्रति जवाबदेह और परिणामोन्मुख बनानी चाहिए। नेतृत्व की असली पहचान इस बात से होती है कि उसने आम नागरिक के जीवन में कितना ठोस सुधार किया है। मेघालय विधानसभा के डिप्टी चीफ व्हिप रॉनी वी लिंगदोह ने चेन्नई के महाबलीपुरम में आयोजित दो दिवसीय लेजिस्लेटर्स लीडरशिप प्रोग्राम के समापन सत्र में बतौर मुख्य अतिथि यह बात रखी। 28 अक्टूबर को दिए अपने विदाई भाषण में उन्होंने जनप्रतिनिधियों से जनसेवा को अधिक पारदर्शी बनाने का आह्वान किया।

प्रशासनिक समझ और अंतर्राज्यीय साझेदारी

इस दो दिवसीय सम्मेलन का आयोजन तमिलनाडु विधानसभा के अध्यक्ष कार्यालय और मेघालय लेजिस्लेटिव रिसर्च फोरम के संयुक्त तत्वावधान में किया गया था। इस कार्यक्रम में दोनों राज्यों के विधायकों ने हिस्सा लिया, जहाँ विशेषज्ञों के मार्गदर्शन में कई महत्वपूर्ण विषयों पर गंभीर मंथन हुआ। चर्चा के मुख्य एजेंडे में संवैधानिक मूल्य, विधायी जिम्मेदारियाँ, सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली, पर्यावरण प्रबंधन, डिजिटल शासन और समग्र विकास नीतियां शामिल रहीं। रॉनी वी लिंगदोह ने रेखांकित किया कि मेघालय और तमिलनाडु को शासन तथा विकास के अपने अनुभवों को आपस में साझा करना चाहिए, जिससे दोनों राज्य एक-दूसरे की बेहतर प्रशासनिक नीतियों से सीख सकें।

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बुनियादी जनसुविधाओं पर ध्यान देने की अपील

प्रभावी जन प्रतिनिधित्व की आवश्यकता पर बात करते हुए रॉनी वी लिंगदोह ने कहा कि जनप्रतिनिधियों को लगातार नागरिकों की समस्याओं के प्रति संवेदनशील और सक्रिय रहना होगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि स्वास्थ्य सेवाओं, बुनियादी शिक्षा, जरूरी जनसुविधाओं और रोजगार के अवसरों में धरातल पर नजर आने वाला बदलाव ही सही मायने में नेतृत्व की सफलता है। जब तक अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति तक इन सेवाओं की गुणवत्तापूर्ण पहुंच सुनिश्चित नहीं होती, तब तक विकास की प्रक्रिया अधूरी मानी जाएगी।

पारंपरिक ज्ञान और जीवित जड़ पुलों की झलक

कार्यक्रम के दौरान मेघालय की अनूठी सांस्कृतिक विरासत और पारंपरिक पारिस्थितिक ज्ञान को भी प्रमुखता से प्रदर्शित किया गया। रॉनी वी लिंगदोह ने मेघालय के प्रसिद्ध जीवित जड़ पुलों से प्रेरित एक जीवंत मॉडल प्रस्तुत किया। इस प्रस्तुति के जरिए उन्होंने बताया कि आधुनिक विकास नीतियों और शासन व्यवस्था को आगे बढ़ाते हुए स्थानीय पारंपरिक पद्धतियों और स्वदेशी ज्ञान का संरक्षण करना कितना अनिवार्य है। यह मॉडल प्रकृति के साथ संतुलन बनाकर चलने वाले मेघालय के पारंपरिक संरक्षण तंत्र का एक विशिष्ट उदाहरण बनकर उभरा।

सवाल-जवाब

रॉनी वी लिंगदोह कौन हैं और उन्होंने कहाँ भाषण दिया?
रॉनी वी लिंगदोह मेघालय विधानसभा के डिप्टी चीफ व्हिप हैं। उन्होंने 28 अक्टूबर को चेन्नई के महाबलीपुरम में दो दिवसीय विधायक नेतृत्व कार्यक्रम के समापन सत्र को संबोधित किया।
इस नेतृत्व कार्यक्रम का आयोजन किन संस्थाओं ने किया था?
यह कार्यक्रम तमिलनाडु विधानसभा अध्यक्ष के कार्यालय और मेघालय लेजिस्लेटिव रिसर्च फोरम द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित किया गया था।
सम्मेलन में किन प्रमुख विषयों पर चर्चा की गई?
सम्मेलन में संवैधानिक मूल्यों, विधायी जिम्मेदारियों, सार्वजनिक स्वास्थ्य, पर्यावरण प्रबंधन, डिजिटल शासन और विकास नीतियों पर विशेषज्ञ सत्र आयोजित किए गए।
रॉनी वी लिंगदोह ने कार्यक्रम में क्या विशेष मॉडल प्रदर्शित किया?
उन्होंने मेघालय के प्रसिद्ध जीवित जड़ पुलों (लिविंग रूट ब्रिज) से प्रेरित एक जीवंत मॉडल प्रस्तुत किया, जो राज्य की पारंपरिक पारिस्थितिक समझ को दर्शाता है।
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