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गाजा में इजरायली कार्रवाई पर 8 मुस्लिम देशों की चेतावनी, डोनाल्ड ट्रंप का शांति रोडमैप संकट मेंमध्य पूर्व
7 अग॰ 2026, 12:35 am (3 दिन पहले)· 1

गाजा में इजरायली कार्रवाई पर 8 मुस्लिम देशों की चेतावनी, डोनाल्ड ट्रंप का शांति रोडमैप संकट में

संयुक्त अरब अमीरात समेत 8 मुस्लिम देशों ने गाजा में इजरायल की सैन्य कार्रवाई पर कड़ा विरोध जताते हुए कहा है कि इससे डोनाल्ड ट्रंप का शांति प्लान खतरे में पड़ रहा है।

मध्य पूर्व में जारी संघर्ष को लेकर अंतर्राष्ट्रीय मंच पर कूटनीतिक तनाव एक बार फिर गहरा गया है। संयुक्त अरब अमीरात (UAE) सहित आठ प्रमुख मुस्लिम देशों के विदेश मंत्रियों ने एक साझा घोषणापत्र जारी कर गाजा में इजरायल की लगातार जारी सैन्य कार्रवाइयों पर कड़ा ऐतराज जताया है। इन देशों का स्पष्ट कहना है कि इजरायल के मौजूदा हमले गाजा युद्ध को समाप्त करने के उद्देश्य से तैयार की गई अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की शांति योजना को गंभीर रूप से नुकसान पहुंचा रहे हैं। कूटनीतिक हलकों में यह चिंता जताई जा रही है कि लगातार होते हमलों से महीनों की मेहनत के बाद बने शांति के अवसर हाथ से निकल सकते हैं।

कूटनीतिक प्रयास और आठ देशों का संयुक्त रुख

यह महत्वपूर्ण बयान संयुक्त अरब अमीरात, कतर, जॉर्डन, इंडोनेशिया, पाकिस्तान, तुर्किये, सऊदी अरब और मिस्र के विदेश मंत्रियों की उच्चस्तरीय बैठक के बाद आया है। साझा दस्तावेज में उल्लेख किया गया है कि इजरायल का आक्रामक सैन्य रुख गाजा शांति रूपरेखा के अगले चरण को लागू करने के अंतर्राष्ट्रीय प्रयासों को सीधा नुकसान पहुंचा रहा है। यह स्थिति तब और अधिक संवेदनशील हो जाती है जब विभिन्न फिलिस्तीनी गुटों ने डोनाल्ड ट्रंप द्वारा पेश किए गए शांति रोडमैप को अपनी स्वीकृति दे दी थी। आठों देशों ने रेखांकित किया कि इजरायली कदम अंतर्राष्ट्रीय कानूनों का उल्लंघन हैं और इनसे क्षेत्रीय शांति प्रक्रिया पूरी तरह पटरी से उतर सकती है।

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नागरिकों की सुरक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं पर गहराता संकट

संयुक्त घोषणापत्र में गाजा के भीतर नागरिक ढांचों को पहुंच रहे नुकसान पर गहरा दुख व्यक्त किया गया है। विदेश मंत्रियों ने चिंता जाहिर की कि गाजा में अस्पतालों, चिकित्सा केंद्रों और अन्य सार्वजनिक सुविधाओं को लगातार निशाना बनाया जा रहा है, जिससे महिलाओं और बच्चों सहित बड़ी संख्या में आम नागरिकों की जान जा रही है। बयान में साफ किया गया कि अंतर्राष्ट्रीय मानवीय कानून के तहत स्वास्थ्य सुविधाओं, डॉक्टरों और राहतकर्मियों को सुरक्षा प्रदान करना अनिवार्य है। इसके साथ ही गाजा के हर कोने तक जीवनरक्षक दवाइयों, चिकित्सा उपकरणों और खाद्य राहत सामग्री की सुरक्षित व निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने की मांग उठाई गई। यह बयान केवल गाजा तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसमें वेस्ट बैंक और पूर्वी येरुशलम में उत्पन्न नाजुक हालात पर भी ध्यान केंद्रित किया गया।

टू-स्टेट सॉल्यूशन पर जोर और ट्रंप के प्लान का स्वरूप

आठों मुस्लिम राष्ट्रों ने दो-राष्ट्र समाधान यानी 'टू-स्टेट सॉल्यूशन' के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराते हुए किसी भी फिलिस्तीनी इलाके पर कब्जे या वहां की आबादी के जबरन विस्थापन का कड़ा विरोध किया है। इस समय डोनाल्ड ट्रंप द्वारा प्रस्तावित युद्धविराम योजना के क्रियान्वयन को लेकर अनिश्चितता का माहौल बना हुआ है। प्रस्तावित शांति योजना की शर्तों के मुताबिक हमास को अपने सभी हथियार डालने थे और इसके बदले में इजरायल को अपनी सैन्य कार्रवाइयों रोककर चरणबद्ध तरीके से गाजा पट्टी से अपने सैनिकों की वापसी सुनिश्चित करनी थी। हालांकि, जमीनी स्तर पर जारी गोलाबारी ने इस योजना के भविष्य पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

बेंजामिन नेतन्याहू की दोटूक और इजरायल की शर्तें

दूसरी तरफ, इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने अपना रुख बेहद सख्त बनाए रखा है। नेतन्याहू ने स्पष्ट कर दिया है कि जब तक हमास पूरी तरह निशस्त्रीकरण स्वीकार नहीं कर लेता, तब तक इजरायली सेना गाजा से हटने का कोई कदम नहीं उठाएगी। अमेरिकी प्रस्ताव का जिक्र करते हुए नेतन्याहू ने कहा, "हमने उस ड्राफ्ट पर सहमति नहीं जताई क्योंकि वह हमारा मसौदा नहीं था, और हम अपने हितों पर मजबूती से कायम हैं।" उन्होंने यह भी जोड़ा कि इजरायली रक्षा बल अपने देश की सीमाओं, नागरिकों और राष्ट्रीय सुरक्षा की रक्षा के लिए सभी आवश्यक कदम उठाना जारी रखेंगे।

सवाल-जवाब

किन 8 मुस्लिम देशों ने इजरायल के खिलाफ संयुक्त बयान जारी किया है?
संयुक्त अरब अमीरात, कतर, जॉर्डन, इंडोनेशिया, पाकिस्तान, तुर्किये, सऊदी अरब और मिस्र के विदेश मंत्रियों ने यह साझा बयान जारी किया है।
इन देशों की मुख्य चिंता क्या है?
इन देशों का कहना है कि गाजा में जारी इजरायली सैन्य हमले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की शांति योजना और कूटनीतिक प्रयासों को नुकसान पहुंचा रहे हैं।
ट्रंप के शांति प्लान की मुख्य शर्तें क्या थीं?
प्रस्ताव के अनुसार हमास को अपने हथियार सौंपने थे, जिसके बदले में इजरायल को सैन्य कार्रवाई रोककर चरणबद्ध तरीके से गाजा से अपनी सेना हटानी थी।
इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू का इस पर क्या रुख है?
नेतन्याहू ने साफ किया है कि जब तक हमास पूरी तरह हथियार नहीं छोड़ देता, तब तक इजरायली सेना गाजा से पीछे नहीं हटेगी और देश अपनी सुरक्षा के लिए जरूरी कदम उठाता रहेगा।
बयान में मानवीय सहायता को लेकर क्या मांग रखी गई है?
बयान में अस्पतालों पर हमलों पर चिंता जताते हुए स्वास्थ्य सेवाओं की सुरक्षा और गाजा के हर हिस्से तक निर्बाध राहत सामग्री पहुंचाने की मांग की गई है।
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