सऊदी अरब की राजधानी रियाद में स्थित प्रमुख अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर शनिवार को एक भीषण धमाके की आवाज सुनाई देने के बाद पूरे परिसर में अफरा-तफरी मच गई और आनन-फानन में लोगों को वहां से बाहर निकाला गया। किंग खालिद अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर हुए इस कथित हमले के तुरंत बाद राहत और बचाव कार्यों के लिए एक दर्जन से अधिक एंबुलेंस गाड़ियां हवाई अड्डे की ओर दौड़ती देखी गईं। इस घटना के बाद हवाई अड्डा प्रशासन ने सभी यात्रियों को सलाह दी है कि वे परिसर के लिए रवाना होने से पहले अपनी संबंधित एयरलाइनों से उड़ानों की स्थिति की पुष्टि कर लें। सऊदी अरब के अधिकारियों की तरफ से इस पूरे घटनाक्रम पर तत्काल कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है।
विमानन केंद्रों पर तेज होते हमले और जानी नुकसान
सऊदी अरब के हवाई अड्डों को निशाना बनाए जाने की यह घटना ऐसे समय में हुई है जब इलाके में सैन्य टकराव तेजी से बढ़ रहा है। ठीक एक दिन पहले अधिकारियों ने जानकारी दी थी कि ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों द्वारा किए गए दो अलग-अलग हमलों में एक पायलट समेत तीन सऊदी नागरिक मारे गए थे। इससे पहले 6 और 7 अक्टूबर को भी सऊदी अरब के दो अलग-अलग हवाई अड्डों पर हूती गुट की ओर से हमले किए गए थे, जिनमें तीन अन्य लोगों की जान चली गई थी। लगातार हो रहे इन हमलों ने सऊदी अरब के नागरिक उड्डयन और प्रमुख यात्रा केंद्रों की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंताएं पैदा कर दी हैं।
यमन युद्ध और संघर्ष के दोबारा भड़कने की वजह
यमन में चल रहे गृहयुद्ध के बीच सऊदी अरब समर्थित सरकारी सुरक्षा बलों और देश के उत्तर-पश्चिमी हिस्से के अधिकांश इलाके पर नियंत्रण रखने वाले हूती विद्रोहियों के बीच लड़ाई हाल के दिनों में बेहद तेज हो गई है। हूती गुट का कहना है कि वे यमन की सरकारी सेना को सऊदी अरब द्वारा दिए जा रहे सैन्य व रणनीतिक समर्थन के विरोध में उसके ठिकानों को निशाना बना रहे हैं। यह संघर्ष उस समय और अधिक हिंसक रूप ले चुका था जब हूती लड़ाकों ने एक तेज सैन्य अभियान चलाकर लाल सागर के कई अहम रणनीतिक तटीय इलाकों पर अपना कब्जा जमा लिया था। इन क्षेत्रों में बाब अल-मंदाब जलडमरूमध्य पर स्थित मोखा बंदरगाह भी शामिल था, जो वैश्विक व्यापारिक जहाजों की आवाजाही के लिए दुनिया के सबसे संकरे और बेहद संवेदनशील समुद्री रास्तों में गिना जाता है। हालांकि, बाद में यमन के सरकार समर्थक सुरक्षा बलों ने यह दावा किया था कि उन्होंने लाल सागर के दक्षिणी छोर पर मौजूद इस अहम जलडमरूमध्य को पूरी तरह सुरक्षित कर लिया है।
शांति समझौते का टूटना और समुद्री नाकेबंदी
यमन के अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त शासन को हूती विद्रोहियों के कब्जे से बचाने और विद्रोहियों को आगे बढ़ने से रोकने के लिए साल 2015 में अरब देशों ने मिलकर सऊदी नेतृत्व वाले एक सैन्य गठबंधन की स्थापना की थी। इसके बाद कई वर्षों तक चले भीषण हवाई हमलों और जमीनी जंग के कारण लाखों लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी और यमन दुनिया के सबसे भीषण मानवीय संकटों में घिर गया। इस तबाही के बाद साल 2022 में दोनों पक्षों के बीच एक अस्थायी युद्धविराम पर सहमति बनी थी, जिससे कुछ समय के लिए शांति की उम्मीद जगी थी। लेकिन जुलाई के महीने में यह अनौपचारिक संघर्ष विराम पूरी तरह टूटने लगा। इसके बाद हूती गुट ने सऊदी अरब के खिलाफ एक समुद्री नाकेबंदी की घोषणा कर दी। हूतियों ने सऊदी हवाई अड्डों, तेल शोधन संयंत्रों और लाल सागर में मौजूद तेल टैंकरों पर मिसाइल व ड्रोन हमलों की नई श्रृंखला शुरू कर दी। अपने इन हमलों के पीछे हूती विद्रोहियों ने यह तर्क दिया कि वे सऊदी अरब द्वारा वर्षों से जारी रखी गई नाकेबंदी और सना हवाई अड्डे पर किए गए हवाई हमले का बदला ले रहे हैं।


















