सऊदी अरब की राजधानी रियाद में स्थित अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर हुए दोहरे हमलों में तीन सऊदी नागरिकों की मौत हो गई है। देश के नागरिक उड्डयन प्राधिकरण ने इस घटना की पुष्टि की है। यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब यमन के हूती विद्रोही समूह ने इस महत्वपूर्ण हवाई ठिकाने को निशाना बनाने का दावा किया था। इन हमलों के कारण हवाई अड्डा परिसर में मौजूद कई अन्य सऊदी नागरिक और विभिन्न देशों के प्रवासी निवासी भी घायल हुए हैं। नागरिक उड्डयन के जनरल अथॉरिटी ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर जारी एक आधिकारिक बयान में पूरे घटनाक्रम की जानकारी साझा की और हताहतों की पुष्टि की।
हवाई अड्डे और विमान को निशाना बनाकर किए गए दो प्रहार
सऊदी अरब के विमानन प्राधिकरण के अनुसार, गुरुवार को पहला हमला सीधे अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के परिसर को निशाना बनाकर किया गया था। इसके तुरंत बाद हुए दूसरे हमले ने सरकारी एयरलाइन सऊदिया के एक विमान को अपनी चपेट में ले लिया। सरकारी विमानन कंपनी सऊदिया ने अपने अलग बयान में स्पष्ट किया कि जान गंवाने वाले लोगों में उनका एक पायलट भी शामिल था। इस भीषण घटना के बाद हवाई अड्डा प्रशासन ने तुरंत राहत और बचाव कार्य शुरू किया। राहत प्रयासों के बाद नागरिक उड्डयन प्राधिकरण ने घोषणा की कि प्रभावित हवाई अड्डे पर विमानों का आवागमन पूरी तरह सामान्य हो चुका है और उड़ानों का संचालन बहाल कर दिया गया है।
मिसाइल हमलों का दावा और अन्य ठिकानों पर निशाना
यमन में सक्रिय ईरान समर्थक हूती समूह ने गुरुवार को कहा कि उसने दो मिसाइलों के जरिए रियाद के अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे को निशाना बनाया था। समूह ने यह भी दावा किया कि उसने सऊदी सीमा के नजदीक स्थित नजरान शहर के हवाई अड्डे और उत्तर में मौजूद खमीस मुशायत वायु सेना अड्डे पर भी हमले किए हैं। हालांकि, सऊदी अरब के अधिकारियों ने नजरान और खमीस मुशायत पर हुए हमलों की औपचारिक पुष्टि नहीं की है। इससे पहले भी सऊदी हवाई अड्डों पर ऐसे हमले देखे गए हैं, जहां 6 और 7 अक्टूबर को हुए हूती हमलों में तीन लोगों की मौत हुई थी। नागरिक उड्डयन निकाय ने बुधवार को बताया था कि आभा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर हुए हमले में दो लोग मारे गए थे और 28 अन्य घायल हुए थे, जबकि एक व्यक्ति की जान किंग खालिद हवाई अड्डे पर गई थी।
यमन में भड़का संघर्ष और क्षेत्रीय तनाव की पृष्ठभूमि
हालिया हमले सऊदी अरब समर्थित यमन की सरकारी सेना और उत्तर-पश्चिमी यमन के अधिकांश हिस्से पर नियंत्रण रखने वाले हूती विद्रोहियों के बीच फिर से भड़के भीषण संघर्ष का हिस्सा हैं। हूती सैन्य प्रवक्ता ने पिछले हमलों को सऊदी अरब द्वारा उनके देश पर किए गए हमलों का जवाब बताया था, जिसके तहत पिछले 24 घंटों में 60 हवाई और मिसाइल हमले किए गए थे। हूती समूह का कहना है कि वह यमन के गृहयुद्ध में सरकारी बलों को रियाद द्वारा दिए जा रहे समर्थन के विरोध में सऊदी अरब पर हमले कर रहा है। हाल के हफ्तों में यह टकराव उस समय और उग्र हो गया जब हूतियों ने एक तेज सैन्य अभियान चलाकर लाल सागर तट के रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण हिस्सों पर कब्जा कर लिया था।
रणनीतिक जलमार्ग और संघर्ष का लंबा इतिहास
हूती विद्रोहियों के इस अभियान में बाब अल-मंदाब जलडमरूमध्य पर स्थित मोखा बंदरगाह भी शामिल था। यह जलडमरूमध्य लाल सागर का सबसे संकरा बिंदु है और वैश्विक समुद्री व्यापार तथा जहाजरानी के लिए एक प्रमुख चोकपॉइंट माना जाता है। हालांकि, यमन के सरकार समर्थक सुरक्षा बलों ने बाद में घोषणा की कि उन्होंने लाल सागर के दक्षिणी छोर पर स्थित बाब अल-मंदाब जलडमरूमध्य को सुरक्षित कर लिया है। यमन की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सरकार को हूती विद्रोहियों के कब्जे से बचाने और अरब देशों के गठबंधन के साथ मिलकर 2015 में सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन का गठन किया गया था। वर्षों तक चले हवाई हमलों और जमीनी संघर्ष के कारण लाखों लोगों की जान गई और दुनिया के सबसे गंभीर मानवीय संकटों में से एक पैदा हुआ।
युद्धविराम का टूटना और समुद्री नाकेबंदी का ऐलान
साल 2022 में दोनों पक्षों के बीच एक अस्थायी युद्धविराम पर सहमति बनी थी, जिसने लंबे समय से चले आ रहे हिंसक टकराव को काफी हद तक थाम दिया था। लेकिन जुलाई के महीने से यह अनौपचारिक युद्धविराम टूटने लगा। इसके बाद हूतियों ने सऊदी अरब के खिलाफ एक समुद्री प्रतिबंध की घोषणा कर दी और सऊदी हवाई अड्डों, तेल प्रतिष्ठानों तथा लाल सागर में तेल टैंकरों पर मिसाइल और ड्रोन से हमले शुरू कर दिए। हूती विद्रोहियों का कहना है कि वे सऊदी अरब द्वारा यमन पर सालों से लगाई गई कथित नाकेबंदी और सना हवाई अड्डे पर किए गए हवाई हमले के बदले में यह पूरी सैन्य कार्रवाई कर रहे हैं।



















