सीकर शहर राजस्थान के प्रमुख शैक्षणिक केंद्र के रूप में पहचाना जाता रहा है, लेकिन अब यह केवल डॉक्टर और इंजीनियर बनाने तक सीमित नहीं है। यहाँ नेशनल डिफेंस एकेडमी (NDA) के माध्यम से भारतीय सशस्त्र बलों में अधिकारी बनने का सपना देखने वाले युवाओं की संख्या में जबरदस्त उछाल आया है। पिछले कुछ वर्षों के दौरान सीकर के सैन्य कोचिंग संस्थानों में दाखिला लेने वाले अभ्यर्थियों का आँकड़ा दोगुना हो गया है। वर्तमान में सीकर सहित पूरे शेखावाटी क्षेत्र में विभिन्न संस्थानों के तहत लगभग 25,000 युवा सैन्य अधिकारी बनने की तैयारी में जुटे हुए हैं।
राजस्थान समेत छह राज्यों से सीकर पहुँच रहे युवा
एनडीए फाउंडेशन कोर्स के माध्यम से तैयारी करने वाले अभ्यर्थियों का दायरा केवल स्थानीय जिलों या राजस्थान तक सीमित नहीं है। पड़ोसी राज्यों जैसे हरियाणा, उत्तर प्रदेश, पंजाब, दिल्ली और मध्य प्रदेश से भी बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं सीकर का रुख कर रहे हैं। आंकड़ों के अनुसार, पिछले तीन वर्षों में देश भर में एनडीए फाउंडेशन पाठ्यक्रमों के जरिए तैयारी करने वाले युवाओं की कुल संख्या करीब आठ लाख के आसपास पहुँच चुकी है। यह रुझान दर्शाता है कि उत्तर भारत के युवाओं में सेना के अधिकारी कैडर में शामिल होने की इच्छा बहुत प्रबल है।
वर्ष 2021 के फैसले के बाद बेटियों की हिस्सेदारी में बड़ा उछाल
साल 2021 में बेटियों को एनडीए प्रवेश परीक्षा में शामिल होने की अनुमति देने का ऐतिहासिक फैसला हुआ था। इस निर्णय के बाद से सशस्त्र बलों में अधिकारी बनने की इच्छुक लड़कियों में भारी उत्साह देखा जा रहा है। विशेष रूप से हरियाणा, उत्तर प्रदेश और राजस्थान की छात्राएं बड़ी संख्या में एनडीए की तैयारी के लिए सीकर पहुँच रही हैं। कोचिंग संस्थानों के क्लासरूम में छात्राओं की बढ़ती उपस्थिति इस बात का स्पष्ट संकेत है कि लड़कियाँ अब देश की रक्षा व्यवस्था में अग्रणी भूमिका निभाने के लिए तेजी से आगे आ रही हैं।
कठिन चयन प्रक्रिया और चार साल के प्रशिक्षण का ढांचा
नेशनल डिफेंस एकेडमी के जरिए कमीशन प्राप्त करने का रास्ता अत्यंत प्रतिस्पर्धी है। एनडीए में हर साल 700 से अधिक सीटों के लिए प्रवेश परीक्षा आयोजित की जाती है, जिसके लिए पूरे देश से आठ लाख से अधिक अभ्यर्थी आवेदन करते हैं। कठिन लिखित परीक्षा को पास करने के बाद लगभग 10,000 उम्मीदवार ही सेवा चयन बोर्ड (SSB) के साक्षात्कार और चिकित्सीय परीक्षण के अगले चरण तक पहुँच पाते हैं। अंतिम रूप से चयनित कैडेट्स को तीन साल तक राष्ट्रीय रक्षा अकादमी में कठोर सैन्य प्रशिक्षण और अकादमिक शिक्षा दी जाती है। इसके पश्चात थल सेना विंग के चयनित युवाओं को एक वर्ष के अंतिम प्रशिक्षण के लिए इंडियन मिलिट्री एकेडमी (IMA) भेजा जाता है। चार साल का यह प्रशिक्षण सफलतापूर्वक पूरा करने के बाद कैडेट्स को भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट के पद पर नियुक्ति मिलती है, जहाँ से वे पदोन्नति पाकर कैप्टन से लेकर जनरल के शीर्ष पद तक पहुँच सकते हैं।
विद्यार्थियों के अनुभव: मेडिकल की जगह एनडीए का चयन और पारिवारिक प्रेरणा
सीकर में तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों के अनुभव इस क्षेत्र में आ रहे बदलाव को स्पष्ट करते हैं। कोटा की निवासी आयुषी ने 10वीं कक्षा के दौरान ही सेना में अफसर बनने का लक्ष्य तय कर लिया था। 11वीं कक्षा में आते ही उसने सीकर में एनडीए फाउंडेशन कोर्स में प्रवेश लिया। आयुषी का मानना है कि मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET की तुलना में एनडीए के माध्यम से देश सेवा के साथ-साथ एक उत्कृष्ट और सम्मानित करियर की बेहतर संभावनाएं मौजूद हैं। इसी तरह सीकर के स्थानीय निवासी नरेंद्र सिंह पिछले दो वर्षों से एनडीए की तैयारी कर रहे हैं। उनके परिवार की पुरानी सैन्य पृष्ठभूमि रही है, जिससे उन्हें बचपन से ही सैन्य वर्दी और अधिकारी बनने का आकर्षण था। नरेंद्र के मुताबिक एनडीए के जरिए व्यक्ति एक सुरक्षित करियर हासिल करने के साथ-साथ सीधे तौर पर राष्ट्र निर्माण में योगदान दे सकता है।

















