राजस्थान के झुंझुनूं जिले के मंडावा कस्बे में सड़कों की बदहाली इन दिनों स्थानीय निवासियों और वाहन चालकों के लिए बड़ी मुसीबत बन चुकी है। मुख्य मार्गों पर उभरे गहरे गड्ढे किसी भी समय बड़े हादसे को न्योता दे रहे हैं। मुकंदगढ़ रोड से लेकर जयपुर मार्ग तक सड़कों का ढांचा पूरी तरह चरमरा गया है, जिससे रोजाना सफर करने वाले स्कूली बच्चों, पैदल यात्रियों और चालकों की मुश्किलें काफी बढ़ गई हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि इस गंभीर समस्या की तरफ न तो प्रशासन ध्यान दे रहा है और न ही जनप्रतिनिधि कोई सुध ले रहे हैं, जिसके कारण नागरिकों में भारी गुस्सा है।
सरकारी कार्यालयों के आसपास बदतर हालात
मुकंदगढ़ रोड पर पुराने पेट्रोल पंप के पास से गुजरने वाला रास्ता प्रशासनिक भवनों के बिल्कुल सामने से निकलता है। इसी मार्ग पर एसडीएम कार्यालय, पंचायत समिति कार्यालय, तहसील और सरकारी अस्पताल जैसे अति महत्वपूर्ण और व्यस्त संस्थान स्थित हैं। इन सभी जगहों पर हर दिन सैकड़ों कर्मचारी, अधिकारी और दूर-दराज के इलाकों से आने वाले आम लोग पहुंचते हैं। इसके बावजूद इस मुख्य मार्ग की हालत सुधारने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। सड़क पर इतने बड़े और खतरनाक गड्ढे बन चुके हैं कि वाहन चालकों का संतुलन बिगड़ना आम बात हो गई है और वे लगातार चोटिल हो रहे हैं।
जयपुर मार्ग पर मिठवास में शहीद स्मारक के सामने परेशानी
मंडावा से जयपुर जाने वाले मुख्य रास्ते पर स्थित मिठवास गांव में शहीद स्मारक के ठीक सामने भी सड़क की स्थिति काफी दयनीय हो चुकी है। इस हिस्से में बने गहरे गड्ढों के कारण अक्सर वाहन दुर्घटनाग्रस्त होते रहते हैं। स्थानीय निवासी मुकेश गढ़वाल तेतरा ने बताया कि बरसात के दिनों में इन गड्ढों में पानी भर जाने से इनकी गहराई का बिल्कुल पता नहीं चल पाता है, जिसकी वजह से दोपहिया और चारपहिया वाहन चालकों के लिए खतरा बहुत अधिक बढ़ जाता है। इस परेशानी को लेकर नागरिकों ने कई बार प्रशासनिक अधिकारियों और जन प्रतिनिधियों को मौखिक और लिखित शिकायतें दी हैं, लेकिन जमीनी हालात में कोई सुधार नहीं हुआ है।
प्रशासन की चुप्पी और बड़े आंदोलन की चेतावनी
क्षेत्र के लोगों के मन में अब यह सवाल उठ रहा है कि क्या जिम्मेदार महकमे किसी बड़े हादसे के होने का इंतजार कर रहे हैं। मंडावा के नागरिकों ने जिला प्रशासन और स्थानीय नेतृत्व से पुरजोर मांग की है कि इन क्षतिग्रस्त सड़कों की जल्द से जल्द मरम्मत कराई जाए और गड्ढों को भरा जाए ताकि किसी अप्रिय घटना को टाला जा सके। यदि समय रहते सड़क निर्माण और दुरुस्ती का काम शुरू नहीं किया गया, तो स्थानीय जनता उग्र आंदोलन करने के लिए बाध्य होगी।
















