छत्तीसगढ़ के रायपुर जिले में स्कूली बच्चों के डिजिटल शैक्षणिक रिकॉर्ड तैयार करने की सरकारी मुहिम भारी रुकावटों का सामना कर रही है। जिले भर में लगातार जारी किए गए प्रशासनिक निर्देशों के बाद भी 54,180 छात्र-छात्राओं की अपार (APAAR) आईडी बनाने की प्रक्रिया अब तक पूरी नहीं हो सकी है। स्कूली स्तर पर बरती जा रही इस सुस्ती पर स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव ने एक समीक्षा वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के दौरान गहरी नाराजगी व्यक्त की। राज्य स्तर से मिले कड़े संकेतों के फौरन बाद रायपुर के जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) पूरी तरह सक्रिय हो गए हैं और उन्होंने रायपुर के सभी शासकीय, अनुदान प्राप्त, निजी तथा मदरसा संस्थानों के प्राचार्यों और प्रबंधकों के लिए तीन दिन का कड़ा अल्टीमेटम तय कर दिया है।
प्रशासन का कड़ा रुख और मान्यता समाप्ति की चेतावनी
जिला शिक्षा अधिकारी द्वारा जारी आधिकारिक फरमान में स्पष्ट किया गया है कि निर्धारित तीन दिनों के भीतर शत-प्रतिशत नामांकित विद्यार्थियों की अपार आईडी तैयार की जाए। इसके साथ ही संस्था प्रमुखों को कार्य पूर्णता का औपचारिक प्रमाण पत्र जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय में अनिवार्य रूप से जमा करना होगा। विभाग ने चेतावनी दी है कि यदि तय समयसीमा में संतोषजनक प्रगति नहीं दिखी, तो लापरवाह शैक्षणिक संस्थानों के लिए वर्तमान शैक्षणिक सत्र को 'शून्य वर्ष' घोषित करने का प्रस्ताव उच्च स्तर पर भेजा जाएगा। इसके अलावा नियम न मानने वाले निजी विद्यालयों की मान्यता समाप्त करने जैसी कठोर अनुशासनात्मक कार्रवाई भी शुरू की जाएगी।
जिले के आंकड़े और निजी शिक्षण संस्थानों का भारी बैकलॉग
शिक्षा विभाग के आधिकारिक आंकड़ों पर नजर डालें तो रायपुर जिले में कुल 5,40,869 छात्र नामांकित हैं। इस कुल संख्या में से 3,18,604 विद्यार्थी निजी स्कूलों और मदरसों में शिक्षा ले रहे हैं, जबकि 2,22,265 छात्र सरकारी और अनुदान प्राप्त विद्यालयों में दर्ज हैं। संपूर्ण जिले में अब तक 93 प्रतिशत से अधिक विद्यार्थियों की डिजिटल आईडी तैयार की जा चुकी है, लेकिन बची हुई पेंडेंसी में सबसे बड़ा हिस्सा निजी स्कूलों की लापरवाही के कारण अटका हुआ है। औसत के लिहाज से जिले के लगभग प्रत्येक 10 में से 1 विद्यार्थी का रिकॉर्ड अब भी अधूरा पड़ा है।
शहरी इलाके की चुनौती, आधार मिसमैच और सहमति पत्र की समस्या
रायपुर के शहरी क्षेत्र में यह पेंडेंसी सबसे अधिक गंभीर रूप में सामने आई है। शहर के कुल 2,34,828 नामांकित बच्चों में से 1.73 लाख से अधिक छात्र निजी और मदरसा संस्थानों में पढ़ाई कर रहे हैं। इस देरी पर अपना पक्ष रखते हुए निजी स्कूल संचालकों का कहना है कि आधार कार्ड और स्कूल के दाखिला रजिस्टर के विवरणों में भिन्नता होना सबसे बड़ी बाधा बना हुआ है। छात्रों के नाम की स्पेलिंग, जन्म तिथि या अन्य विवरणों के न मिलने यानी आधार मिसमैच के कारण ऑनलाइन पोर्टल पर प्रक्रिया अटक जाती है। इसके अतिरिक्त कई पालकों द्वारा समय पर अनिवार्य सहमति पत्र जमा न कराए जाने से भी आईडी बनाने की रफ्तार सुस्त पड़ी है।



















