केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए नए वेतनमान का इंतजार लंबा खिंच सकता है, क्योंकि केंद्र सरकार की तरफ से संशोधित वेतन व्यवस्था लागू करने की कोई अंतिम तारीख फिलहाल तय नहीं की गई है। अक्टूबर 2026 की स्थिति के अनुसार, न तो कोई आधिकारिक फिटमेंट फैक्टर घोषित हुआ है और न ही नया पे मैट्रिक्स या अंतिम वेतन वृद्धि का आंकड़ा सार्वजनिक किया गया है। आयोग को अपनी पूरी रिपोर्ट तैयार करने के लिए गठन के दिन से 18 महीने की अवधि दी गई थी, जिसके अनुसार सिफारिशें सौंपने की आधिकारिक समयसीमा 3 मई 2027 बैठती है।
आयोग का गठन और प्रमुख सदस्यों की जिम्मेदारी
केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 28 अक्टूबर 2025 को 8वें केंद्रीय वेतन आयोग के संदर्भ की शर्तों (टर्म्स ऑफ रेफरेंस) को मंजूरी दी थी। इसके बाद औपचारिक रूप से 3 नवंबर 2025 को इस आयोग का गठन किया गया था। इस महत्वपूर्ण निकाय की अध्यक्षता न्यायमूर्ति रंजना प्रकाश देसाई कर रही हैं। उनके साथ प्रोफेसर पुलक घोष अंशकालिक सदस्य के रूप में जुड़े हैं, जबकि पंकज जैन को सदस्य-सचिव की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
गठन की तारीख 3 नवंबर 2025 से 18 महीने की गणना करने पर रिपोर्ट पेश करने की मियाद मई 2027 के शुरुआती हिस्से में समाप्त होती है। तब तक आयोग विभिन्न स्तरों पर अध्ययन और परामर्श पूरा करके अपने सुझाव सरकार के समक्ष रखेगा।
विभिन्न राज्यों का दौरा और परामर्श प्रक्रिया
इस समय वेतन आयोग अपने परामर्श और आंकड़े जुटाने के शुरुआती चरणों में सक्रिय है। आधिकारिक पोर्टल के विवरण के मुताबिक, कर्मचारी संगठनों, यूनियनों और अन्य प्रमुख हितधारकों के साथ देशभर के कई राज्यों में बैठकों का सिलसिला जारी है। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार, आयोग 7 और 8 अक्टूबर 2026 को बेंगलुरु का दौरा करेगा। इसके बाद अक्टूबर के अंत में आयोग की टीम चर्चा के लिए मुंबई का रुख करेगी। इन बैठकों के जरिए जमीनी स्तर की मांगें और वेतन संबंधी आपत्तियां संकलित की जा रही हैं।
वेतन वृद्धि लागू होने की तारीख को लेकर स्थिति
केंद्रीय कर्मचारियों के मन में सबसे बड़ा सवाल यही है कि उनके बैंक खातों में बढ़ा हुआ वेतन कब से आना शुरू होगा। वास्तविक भुगतान की कोई पक्की तारीख अभी तक सामने नहीं आई है। केंद्र सरकार का स्पष्ट कहना है कि आयोग की सिफारिशों को लागू करने की तारीख का फैसला सरकार स्वयं करेगी। इसके साथ ही यह आश्वासन भी दिया गया है कि सिफारिशें स्वीकार किए जाने के बाद जरूरी वित्तीय आवंटन उपलब्ध कराया जाएगा।
केंद्रीय मंत्रिमंडल के अक्टूबर 2025 के बयान में उल्लेख किया गया था कि वेतन आयोगों के सामान्य 10-वर्षीय चक्र के आधार पर, 8वें सीपीसी की सिफारिशें सामान्य परिस्थितियों में 1 जनवरी 2026 से प्रभावी मानी जानी चाहिए। हालांकि, इसका यह मतलब बिल्कुल नहीं निकाला जा सकता कि उसी दिन से कर्मचारियों को संशोधित सैलरी मिलने लगेगी। संक्षेप में कहें तो 1 जनवरी 2026 केवल सरकार द्वारा चर्चित एक संदर्भ या प्रभावी तारीख है, न कि वेतन खाते में जमा होने की निश्चित तारीख।
फिटमेंट फैक्टर की भूमिका और संभावित अनुमान
आधिकारिक स्तर पर 8वें वेतन आयोग के लिए किसी फिटमेंट फैक्टर की घोषणा नहीं हुई है। बाजार और कर्मचारी हलकों में इसे लेकर तरह-तरह के कयास लगाए जा रहे हैं, जो लगभग 1.9 से लेकर 2.8 से ऊपर तक के दायरे में हैं। वहीं कर्मचारी संगठनों ने भी अपनी अलग-अलग मांगें आयोग के सामने रखी हैं।
फिटमेंट फैक्टर मूल रूप से वह गुणक (मल्टीप्लायर) होता है जिसके जरिए नए पे स्ट्रक्चर में कर्मचारियों का संशोधित बेसिक वेतन तय किया जाता है। यदि किसी कर्मचारी का मौजूदा बेसिक पे 18,000 रुपये है और 2.5 का फिटमेंट फैक्टर लागू किया जाता है, तो नई गणना के अनुसार मूल वेतन 18,000 × 2.5 यानी 45,000 रुपये हो जाएगा।
इससे पहले 7वें वेतन आयोग ने 2.57 का फिटमेंट फैक्टर तय किया था। 7वें सीपीसी ने उस समय मौजूद ढांचे के मुकाबले वेतन, भत्तों और पेंशन में कुल मिलाकर 23.55% की समग्र वृद्धि की सिफारिश की थी।
लाखों कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को मिलेगा फायदा
सरकार की पूर्व घोषणा के अनुसार, 8वें केंद्रीय वेतन आयोग के दायरे में लगभग 50 लाख केंद्रीय सरकारी कर्मचारी और करीब 69 लाख पेंशनभोगी आएंगे। जब भी यह संशोधित ढांचा अंतिम रूप लेगा, तब एक करोड़ से अधिक परिवारों की मासिक आय और पेंशन राशि सीधे तौर पर प्रभावित होगी।


















