देश की नकदी व्यवस्था में एक बड़ा बदलाव देखने को मिला है। बैंकिंग प्रणाली में 2000 रुपये के मूल्यवर्ग वाले तीन-चौथाई से अधिक बैंक नोट सफलतापूर्वक वापस लौट चुके हैं। केंद्रीय बैंक के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, 19 मई को नोट वापसी के ऐलान के बाद से 30 जून 2023 तक कुल 2.72 लाख करोड़ रुपये मूल्य के 2000 रुपये के नोट प्रचलन से बाहर होकर बैंकों के पास जमा हो चुके हैं। इसके साथ ही बाजार में इन गुलाबी नोटों की मौजूदगी में भारी गिरावट दर्ज की गई है।
प्रचलन में अब बचे केवल 84,000 करोड़ रुपये के नोट
इस बड़े बदलाव के परिणामस्वरूप 30 जून 2023 को कारोबार समाप्त होने तक बाजार में 2000 रुपये के बैंक नोटों का कुल मूल्य घटकर 0.84 लाख करोड़ रुपये (84,000 करोड़ रुपये) रह गया है। 19 मई 2023 को जब इन्हें चलन से वापस लेने की घोषणा की गई थी, उस समय मौजूद कुल नोटों में से 76 प्रतिशत नोट बैंकों तक पहुंच चुके हैं। यह आंकड़ा दर्शाता है कि जनता ने नोट बदलने और जमा करने की प्रक्रिया को बेहद तेजी से अपनाया है, जिससे नकदी का एक बहुत बड़ा हिस्सा औपचारिक बैंकिंग चैनल का हिस्सा बन गया है।
बदलने के बजाय बैंक खातों में जमा कराने को तरजीह
विभिन्न बैंकों से एकत्रित जानकारी के विश्लेषण से एक दिलचस्प वित्तीय रुझान सामने आया है। बैंकों में वापस आए कुल 2000 रुपये के नोटों में से 87 प्रतिशत हिस्से को लोगों ने सीधे अपने बचत या चालू खातों में जमा कराया है। इसके विपरीत केवल 13 प्रतिशत नोटों को ही काउंटर पर अन्य छोटे मूल्यवर्ग के नोटों के साथ बदला गया। इससे साफ पता चलता है कि लोगों ने नकदी हाथ में रखने के स्थान पर बैंक खातों में पूंजी सुरक्षित रखने को अधिक प्राथमिकता दी, जिससे बैंकिंग लिक्विडिटी में भी सुधार देखा गया है।
30 सितंबर तक बैंकों में सुविधा, उसके बाद की प्रक्रिया
नागरिकों के पास अपने बचे हुए 2000 रुपये के नोटों को बैंक शाखाओं में जमा करने या बदलने के लिए 30 सितंबर तक का समय उपलब्ध है। इस निर्धारित अंतिम तिथि तक सामान्य बैंक शाखाओं में काउंटर पर जाकर नोट बदले या खातों में जमा किए जा सकते हैं। इस समय सीमा के समाप्त होने के बाद लोगों को इन नोटों को बदलने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक के क्षेत्रीय कार्यालयों का रुख करना पड़ सकता है। केंद्रीय बैंक की ओर से समय पर नोट जमा करने की सलाह दी गई है ताकि अंतिम दिनों में किसी भी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े।



















