कमोडिटी बाजारों में कारोबारी हफ्ते के दौरान कीमती धातुओं की कीमतों में सुस्ती और गिरावट का रुख देखने को मिला है। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज यानी एमसीएक्स पर सोना और चांदी दोनों ही दबाव में कारोबार करते नजर आए। जहां घरेलू वायदा बाजार में सोना महत्वपूर्ण स्तरों के नीचे आ गया, वहीं चांदी में भी भारी बिकवाली दर्ज की गई। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अमेरिकी केंद्रीय बैंक की नीतिगत घोषणाओं से पहले निवेशकों ने सतर्क रुख अपनाते हुए कीमती धातुओं में मुनाफावसूली की है, जिससे हाजिर बाजार में भी नरमी आई है।
एमसीएक्स पर सोने और चांदी की स्थिति
घरेलू वायदा बाजार में मंगलवार के शुरुआती सत्र के दौरान चांदी की कीमतों में तीव्र गिरावट दर्ज की गई। एमसीएक्स पर चांदी का वायदा अनुबंध लगभग 1,400 रुपये टूटकर 1,94,400 रुपये प्रति किलोग्राम के स्तर पर आ गया। सत्र की शुरुआत में चांदी ने 1,93,555 रुपये प्रति किलोग्राम का निचला स्तर छुआ था और यह 1.95 लाख रुपये के स्तर से नीचे फिसल गई। चांदी में आई इस एकतरफा गिरावट ने औद्योगिक मांग और निवेश गतिविधियों दोनों को प्रभावित किया है।
सोने के वायदा सौदों में भी कमजोरी का माहौल रहा। एमसीएक्स पर सोना 215 रुपये यानी 0.2 प्रतिशत की गिरावट के साथ 1,42,858 रुपये प्रति 10 ग्राम पर आ गया। कारोबार के दौरान सोने ने 1,42,581 रुपये प्रति 10 ग्राम का निचला स्तर और 1,42,982 रुपये प्रति 10 ग्राम का उच्च स्तर छुआ। इस हलचल के चलते सोने के भाव 1,42,900 रुपये के आंकड़े से नीचे बने रहे, जिसने खरीदारों को सीमित दायरे में कारोबार करने पर विवश किया।
वैश्विक हाजिर बाजार में तीन महीने का निचला स्तर
अंतरराष्ट्रीय बाजार में हाजिर सोना अपनी चमक खोता दिखाई दिया और 4,010 डॉलर प्रति औंस के आसपास संघर्ष करता रहा। यह स्तर पिछले तीन महीनों के सबसे निचले दायरे के करीब है। दूसरी ओर, अंतरराष्ट्रीय हाजिर चांदी में भी 0.5 प्रतिशत की गिरावट आई और यह 53.80 डॉलर प्रति औंस के नीचे फिसलकर लगभग 53.67 डॉलर प्रति औंस पर आ गई। कच्चे तेल में आई नरमी के बावजूद कीमती धातुएं अपनी सुरक्षित निवेश की चमक बनाए रखने में असमर्थ रहीं।
कमोडिटी एक्सचेंज पर मिला-जुला प्रदर्शन
एमसीएक्स पर अन्य जिंसों के प्रदर्शन की बात करें तो बाजार में मिला-जुला रुख देखा गया। बेस मेटल्स और मसालों में अच्छी मजबूती देखने को मिली, जहां इलायची, तांबा और जस्ता बढ़त दर्ज करने वाले शीर्ष सौदों में शामिल रहे। इसके विपरीत ऊर्जा और कीमती धातुओं के वर्ग में बिकवाली का दबाव हावी रहा। प्राकृतिक गैस, सोना, चांदी और कच्चे तेल की कीमतों में 1 प्रतिशत तक की गिरावट दर्ज की गई। यह गिरावट बताती है कि निवेशक ऊर्जा और बहुमूल्य धातुओं के प्रति अभी अतिरिक्त जोखिम लेने से बच रहे हैं।
कच्चे तेल में गिरावट और कूटनीतिक हलचल
अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में लगातार दूसरे सत्र में गिरावट दर्ज की गई। अमेरिका के वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट यानी डब्ल्यूटीआई कच्चे तेल की कीमत 1 प्रतिशत फिसलकर 101 डॉलर प्रति बैरल के नीचे चली गई। इसी तरह वैश्विक बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड भी 1 प्रतिशत टूटकर 115 डॉलर प्रति बैरल के नीचे आ गया।
तेल की कीमतों में यह नरमी अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव को कम करने के लिए शुरू हुए नए राजनयिक प्रयासों के बाद देखने को मिली है। इन कूटनीतिक पहलों ने मध्य पूर्व से तेल आपूर्ति बाधित होने की आशंका को कम किया है, जिससे निकट भविष्य में महंगाई बढ़ने का डर थोड़ा हल्का हुआ है। हालांकि, ऊर्जा की कीमतें अभी भी ऊंचे स्तरों पर बनी हुई हैं, जिससे व्यापक मुद्रास्फीति का जोखिम पूरी तरह टला नहीं है।
फेडरल रिजर्व की बैठक और दरों का परिदृश्य
वैश्विक वित्तीय बाजारों की नजरें अब पूरी तरह से अमेरिकी फेडरल रिजर्व पर टिकी हुई हैं। फेडरल ओपन मार्केट कमेटी यानी एफओएमसी की दो दिवसीय नीतिगत बैठक 27 अक्टूबर को शुरू हो रही है, जिसके नतीजे 28 अक्टूबर 2026 को जारी किए जाएंगे। बाजार आम तौर पर यह मानकर चल रहा है कि अमेरिकी केंद्रीय बैंक इस हफ्ते ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं करेगा और उन्हें स्थिर रखेगा।
बाजार का मुख्य ध्यान नीति निर्माताओं के भविष्य के नीतिगत संकेतों यानी फॉरवर्ड गाइडेंस पर रहेगा, जिससे आने वाले महीनों में दर वृद्धि के कदमों का स्पष्ट खाका मिल सके। सीएमई फेडवॉच टूल के आंकड़ों के मुताबिक, बाजार दिसंबर में ब्याज दर में बढ़ोतरी की करीब 82 प्रतिशत संभावना मान रहा है। इसके साथ ही, संपूर्ण बाजार ने अक्टूबर 2026 की नीति के बाद अगले 12 महीनों की अवधि में फेडरल रिजर्व द्वारा कम से कम तीन ब्याज दर वृद्धियों को अपने अनुमानों में शामिल कर लिया है।
आगामी आर्थिक आंकड़ों पर निवेशकों की नजर
उच्च ब्याज दरों का माहौल परंपरागत रूप से सोने और चांदी जैसी गैर-उपज वाली संपत्तियों के लिए प्रतिकूल साबित होता है, क्योंकि निवेशक निश्चित रिटर्न देने वाले बांड्स और नकदी की ओर आकर्षित होते हैं। वित्तीय बाजार अब अमेरिका के आगामी सकल घरेलू उत्पाद यानी जीडीपी आंकड़ों और व्यक्तिगत उपभोग व्यय यानी पीसीई मूल्य सूचकांक के जारी होने का इंतजार कर रहे हैं। ये आंकड़े अमेरिकी अर्थव्यवस्था की वास्तविक सेहत और मुद्रास्फीति की रफ्तार को स्पष्ट करेंगे, जिससे फेडरल रिजर्व के अगले कदमों की दिशा पूरी तरह तय होगी।



















