किसी घर में बेटी के जन्म के साथ ही माता-पिता उसकी आगे की पढ़ाई और शादी के खर्चों की योजना बनाने लगते हैं। वक्त बीतने के साथ उच्च शिक्षा और जीवन के बड़े पड़ावों पर होने वाले खर्चों में इजाफा होता जाता है। ऐसे में समय रहते छोटी-छोटी बचत करके एक मजबूत वित्तीय फंड तैयार करना समझदारी मानी जाती है। केंद्र सरकार की सुकन्या समृद्धि योजना इसी उद्देश्य को ध्यान में रखकर तैयार की गई है। यह सरकारी बचत योजना बेटियों के सुरक्षित भविष्य के लिए एक बेहतरीन जरिया बनकर उभरी है, जहां जमा पूंजी पर आकर्षक ब्याज और सरकारी गारंटी दोनों मिलते हैं।
खाता खुलवाने की पात्रता और जरूरी नियम
सुकन्या समृद्धि योजना के तहत खाता बेटी के जन्म से लेकर उसकी 10 साल की उम्र पूरी होने से पहले तक कभी भी खोला जा सकता है। यह खाता माता-पिता या कानूनी अभिभावक की देखरेख में शुरू किया जाता है। नियमानुसार एक परिवार में अधिकतम दो बेटियों के नाम पर ही यह बचत खाता खोला जा सकता है। हालांकि जुड़वां या एक साथ तीन बेटियों के जन्म की स्थिति में नियमों में विशेष छूट दी जाती है। ऐसी स्थिति में अभिभावक संबंधित बैंक या डाकघर शाखा से पूरी जानकारी और जरूरी दस्तावेज जमा करके अतिरिक्त खाता खुलवा सकते हैं।
निवेश की सीमा और ब्याज दर की व्यवस्था
इस योजना की सबसे बड़ी खासियत इसकी लचीली निवेश सीमा है, जिससे हर आय वर्ग का व्यक्ति अपनी क्षमतानुसार बचत कर सकता है। एक वित्तीय वर्ष में न्यूनतम 250 रुपये जमा करके भी खाते को सक्रिय रखा जा सकता है, जबकि अधिकतम जमा सीमा 1.5 लाख रुपये प्रति वर्ष तय की गई है। माता-पिता अपनी सुविधानुसार एकमुश्त या किस्तों में राशि जमा कर सकते हैं। वर्तमान समय में इस योजना पर 8.2 प्रतिशत सालाना की दर से ब्याज दिया जा रहा है। सरकार हर तिमाही के आधार पर लघु बचत योजनाओं की ब्याज दरों की समीक्षा करती है, इसलिए भविष्य में दरों में संशोधन संभव है। खाते में मिलने वाला ब्याज चक्रवृद्धि आधार पर जुड़ता है, जिससे लंबे समय में बड़ा फंड तैयार होता है।
टैक्स में छूट और वित्तीय लाभ
सुकन्या समृद्धि योजना को आयकर के दृष्टिकोण से भी बेहद फायदेमंद माना जाता है। पुरानी टैक्स व्यवस्था का विकल्प चुनने वाले करदाताओं को आयकर कानून की धारा 80C के तहत सालाना 1.5 लाख रुपये तक के निवेश पर टैक्स छूट का लाभ मिलता है। इसके साथ ही योजना के तहत मिलने वाला वार्षिक ब्याज और 21 साल की अवधि पूरी होने पर मिलने वाली मैच्योरिटी राशि भी पूरी तरह से टैक्स फ्री होती है। यह ईईई श्रेणी का लाभ निवेशकों की वास्तविक कमाई को और बढ़ा देता है।
मैच्योरिटी अवधि, आंशिक निकासी और समय पूर्व बंद करने के नियम
सुकन्या समृद्धि खाता शुरू होने की तारीख से ठीक 21 साल बाद मैच्योर होता है। हालांकि बेटी की उच्च शिक्षा की जरूरतों को पूरा करने के लिए 18 वर्ष की आयु पूरी होने के बाद खाते से आंशिक निकासी की सुविधा मिलती है। इसके तहत पिछले वित्तीय वर्ष के अंत में मौजूद कुल बैलेंस का 50 प्रतिशत तक हिस्सा निकाला जा सकता है। कुछ आपातकालीन या विपरीत परिस्थितियों जैसे खाताधारक के निधन की स्थिति में तय नियमों के अनुसार मैच्योरिटी से पहले भी खाता बंद कराने का प्रावधान मौजूद है।



















