देशभर के बैंकिंग ग्राहकों के लिए अपने बचत खातों में न्यूनतम औसत शेष राशि (MAB) बनाए रखना वित्तीय रूप से चुनौतीपूर्ण साबित हो रहा है। वित्तीय संस्थानों द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, निर्धारित सीमा से कम बैलेंस रखने पर बैंकों ने बीते 4 वर्षों के दौरान अपने ग्राहकों से पेनल्टी के रूप में कुल ₹26,100 करोड़ की बड़ी राशि वसूल की है। यह वसूली सरकारी और निजी दोनों क्षेत्रों के बैंकों द्वारा अलग-अलग वित्त वर्षों में लागू किए गए सेवा शुल्कों के तहत की गई है। नियम न मानने पर ग्राहकों के खातों से सीधे पेनल्टी काट ली जाती है, जिससे कम आय वाले खाताधारकों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ता है।
निजी क्षेत्र के दिग्गजों ने वसूला सर्वाधिक जुर्माना
बैलेंस मेंटेन न कर पाने वाले ग्राहकों पर जुर्माना लगाने के मामले में निजी क्षेत्र का एचडीएफसी बैंक सूची में सबसे शीर्ष स्थान पर रहा है। आंकड़ों के मुताबिक, एचडीएफसी बैंक ने न्यूनतम बैलेंस न रखने वाले अपने खाताधारकों से कुल ₹5,670 करोड़ की पेनल्टी हासिल की। इसके बाद दूसरे नंबर पर एक्सिस बैंक का नाम आता है, जिसने अपने ग्राहकों से ₹3,787 करोड़ रुपये का जुर्माना लिया। तीसरे स्थान पर सार्वजनिक क्षेत्र का बैंक ऑफ बड़ौदा रहा, जिसने इस अवधि में लगभग ₹2,028 करोड़ की राशि पेनल्टी के तौर पर अपने खाते में दर्ज की।
सरकारी बैंकों की स्थिति और जुर्माना तालिका
सार्वजनिक क्षेत्र के अन्य प्रमुख बैंकों ने भी नियमों का पालन न होने पर भारी भरकम जुर्माना वसूला है। इस क्रम में पंजाब नेशनल बैंक चौथे स्थान पर दर्ज किया गया, जिसने अपने ग्राहकों से ₹1,896 करोड़ की वसूली की। वहीं पांचवें स्थान पर मौजूद इंडियन बैंक ने वित्त वर्ष 2021-22 से लेकर वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान कुल ₹1,777 करोड़ की राशि जुर्माने के रूप में एकत्र की। उल्लेखनीय है कि सरकारी बैंकों के लिए यह डेटा वित्त वर्ष 2021-22 से 2025-26 तक की 5 वर्ष की अवधि का है, जबकि निजी क्षेत्र के बैंकों का डेटा वित्त वर्ष 2022-23 से 2025-26 तक की 4 वर्ष की अवधि से संबंधित है।
संसदीय कार्यवाही में साझा किया गया डेटा
संसदीय कार्यवाही के दौरान 28 जुलाई को राज्यसभा में प्रस्तुत एक लिखित उत्तर के माध्यम से यह विस्तृत विवरण सामने आया। वित्त मंत्रालय में राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने दोनों श्रेणियों के बैंकों द्वारा न्यूनतम औसत बैलेंस न बनाए रखने पर ली गई पेनल्टी की पूरी जानकारी प्रस्तुत की। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि बैंकिंग प्रक्रियाओं को अधिक सुगम बनाने और आम नागरिकों को राहत देने के उद्देश्य से सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों ने अपने सर्विस चार्ज ढांचे की गहन समीक्षा की है।
सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों ने नियमों में दी बड़ी राहत
ग्राहक राहत के संदर्भ में एक महत्वपूर्ण बदलाव भी सामने आया है। सार्वजनिक क्षेत्र में संचालित कुल 12 बैंकों में से 10 बैंकों ने साधारण बचत खातों पर न्यूनतम बैलेंस न रखने से जुड़ी पेनल्टी को पूरी तरह समाप्त कर दिया है। बाकी बचे 2 बैंकों ने भी अपने बोर्ड द्वारा मंजूर की गई नीतियों और वाणिज्यिक आवश्यकताओं के अनुसार जुर्माने के नियमों को तर्कसंगत बनाया है। सरकार की इस समीक्षा पहल से करोड़ों छोटे खाताधारकों को अनपेक्षित पेनल्टी कटने के डर से स्थायी राहत मिली है।



















