पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने देश भर में घरेलू लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस (एलपीजी) सिलेंडरों की आपूर्ति और वितरण नियमों में महत्वपूर्ण संशोधन किए हैं। केंद्र सरकार द्वारा जारी किए गए नए दिशा-निर्देशों के अनुसार, अब सभी घरेलू उपभोक्ताओं के लिए रिफिल बुकिंग का अंतर समान रूप से 25 दिन तय कर दिया गया है। इसके साथ ही सरकार ने ग्रामीण क्षेत्रों में लागू लंबी प्रतीक्षा अवधि को समाप्त कर दिया है और पाइप्ड नेचुरल गैस (पीएनजी) कनेक्शन लेने वाले उपभोक्ताओं के लिए एलपीजी कनेक्शन सरेंडर तथा पुनर्गठन से जुड़े नियमों को पूरी तरह से स्पष्ट कर दिया है।
सभी उपभोक्ताओं के लिए 25 दिनों का समान रिफिल अंतराल लागू
पेट्रोलियम मंत्रालय के नवीनतम सर्कुलर के अनुसार, अब शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों के उपभोक्ता अपने पिछले सिलेंडर की डिलीवरी के 25 दिन बाद ही अगला सिलेंडर बुक करा सकेंगे। यह नियम इंडेन, एचपी गैस और भारत गैस सहित सभी प्रमुख सार्वजनिक क्षेत्र की तेल विपणन कंपनियों के ग्राहकों पर समान रूप से लागू होगा।
मंत्रालय ने अपने आधिकारिक बयान में स्पष्ट किया कि वर्तमान समय में देश के भीतर एलपीजी की आपूर्ति स्थिति काफी मजबूत हुई है। पिछले कुछ महीनों की तुलना में रिफिल डिलीवरी के बैकलाग में भारी कमी दर्ज की गई है, जिसके चलते मांग प्रबंधन के लिए लगाए गए अस्थायी प्रतिबंधों को हटाना संभव हो सका है।
पश्चिम एशिया संकट के समय बने नियमों का इतिहास
इन नियमों की पृष्ठभूमि पर नज़र डालें तो मार्च 2026 की शुरुआत में पश्चिम एशिया में भड़के सैन्य संघर्ष के कारण वैश्विक स्तर पर ईंधन आपूर्ति प्रभावित हुई थी। उस दौरान केंद्र सरकार ने स्थिति को नियंत्रित करने के लिए मांग प्रबंधन के उपाय लागू किए थे।
उस समय शहरी क्षेत्रों के उपभोक्ताओं के लिए दो रिफिल बुकिंग के बीच 25 दिनों का अंतर तय किया गया था, जबकि ग्रामीण क्षेत्रों के ग्राहकों के लिए इस प्रतीक्षा अवधि को बढ़ाकर 45 दिन कर दिया गया था। पश्चिम एशिया संकट से पहले देश में सिलेंडर बुकिंग का सामान्य अंतर 21 दिनों का होता था। अब आपूर्ति व्यवस्था सामान्य होने पर सरकार ने ग्रामीण इलाकों में लागू 45 दिनों वाले नियम को पूरी तरह से रद्द कर दिया है और इसे घटाकर 25 दिन कर दिया है।
ग्रामीण क्षेत्रों में एलपीजी का उपयोग और आर्थिक चुनौतियां
ग्रामीण भारत के परिवारों के लिए 45 दिनों की प्रतीक्षा अवधि का खत्म होना एक बड़ी राहत लेकर आया है। काउंसिल ऑन एनर्जी, एनवायरनमेंट एंड वाटर (सीईईडब्ल्यू) के एक हालिया अध्ययन से ग्रामीण क्षेत्रों में रसोई गैस के इस्तेमाल और उससे जुड़ी चुनौतियों की तस्वीर साफ होती है।
सीईईडब्ल्यू के आंकड़ों के मुताबिक, ग्रामीण इलाकों के 73 प्रतिशत परिवारों ने बीते 90 दिनों के भीतर एलपीजी का इस्तेमाल किया था। हालांकि, इनमें से केवल 23 प्रतिशत परिवार ही भोजन पकाने के लिए पूरी तरह से एलपीजी पर निर्भर हैं। लगभग आधे यानी 50 प्रतिशत परिवार अब भी प्राथमिक ईंधन के रूप में लकड़ी का उपयोग करते हैं। इसके अलावा, केवल 47 प्रतिशत ग्रामीण एलपीजी उपभोक्ताओं को ही डोरस्टेप डिलीवरी मिल पाती है, जिससे लॉजिस्टिक्स और सिलेंडर लाने-ले जाने का खर्च एक बड़ी समस्या बना हुआ है।
सर्वेक्षण में यह भी सामने आया कि यदि 14.2 किलोग्राम वाले एलपीजी सिलेंडर की रिफिल दर 400 रुपये कर दी जाए, तो ग्रामीण परिवारों, शहरी अनौपचारिक बस्तियों के निवासियों और प्रवासी मजदूरों में से कम से कम 80 प्रतिशत लोग पूरी तरह से एलपीजी पर स्विच कर लेंगे। इन समूहों के बीच औसत भुगतान क्षमता 500 रुपये पाई गई। यह दोनों आंकड़े पीएम उज्ज्वला योजना (पीएमयूवाई) के तहत वर्तमान प्रभावी सब्सिडी वाले 642 रुपये प्रति सिलेंडर के मूल्य से काफी कम हैं।
पीएनजी कनेक्शन लेने पर 30 दिनों के भीतर एलपीजी कनेक्शन सरेंडर का नियम
सिलेंडर रिफिल बुकिंग के अलावा, सरकार ने मई 2026 के अंत में लागू किए गए एलपीजी संशोधन आदेश के तहत पीएनजी उपभोक्ताओं के लिए भी नियम स्पष्ट किए हैं। जब कोई ग्राहक अपने घर में पीएनजी (पाइप्ड नेचुरल गैस) कनेक्शन शुरू कराता है, तो उसके लिए 30 दिनों के भीतर अपना पुराना इंडेन, एचपी गैस या भारत गैस का एलपीजी कनेक्शन सरेंडर करना अनिवार्य है।
हालांकि, यदि कोई उपभोक्ता भविष्य में ऐसे स्थान पर स्थानांतरित होता है जहां पीएनजी नेटवर्क की सुविधा उपलब्ध नहीं है, तो उसे अपना पुराना एलपीजी कनेक्शन वापस पाने का पूरा अधिकार दिया गया है।
इसके लिए ग्राहक को एलपीजी सरेंडर करते समय एजेंसी से एक ट्रांसफर वाउचर प्राप्त करना होता है। नए स्थान पर जाकर उपभोक्ता इस ट्रांसफर वाउचर को जमा करके बिना किसी परेशानी के अपना एलपीजी कनेक्शन पुनः बहाल करवा सकता है।



















