विशेष जरूरतों वाले नागरिकों को सशक्त बनाने के इरादे से केंद्रीय मंत्रिमंडल ने सामाजिक सुरक्षा तंत्र में व्यापक फेरबदल को हरी झंडी दे दी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में तय किया गया कि ग्रामीण विकास विभाग से संचालित होने वाले राष्ट्रीय सामाजिक सहायता कार्यक्रम (NSAP) को 2026-27 से लेकर 2030-31 तक निरंतर जारी रखा जाएगा। आगामी पांच साल की इस समयावधि के लिए सरकार ने 53,428 करोड़ रुपये की भारी-भरकम राशि निर्धारित की है, जिसके तहत पेंशन के दायरे और पात्रता की शर्तों को बेहद आसान बनाया गया है।
पात्रता के मानकों में बड़ी ढील और जन्म से लाभ
इस ताजा नीतिगत निर्णय का सबसे उल्लेखनीय पहलू यह है कि अब पेंशन पाने के लिए किसी न्यूनतम उम्र की दरकार नहीं होगी। दिव्यांगजन अब जीवन के पहले दिन यानी जन्म से ही इस कल्याणकारी वित्तीय लाभ के हकदार बन सकेंगे। इसके अतिरिक्त, बेंचमार्क दिव्यांगता का स्तर भी पहले के 80 फीसदी से घटाकर सीधे 40 फीसदी कर दिया गया है। दिव्यांग व्यक्तियों के अधिकार अधिनियम, 2016 के प्रावधानों के अनुरूप किए गए इस बदलाव का मुख्य मकसद जरूरतमंदों को बिना किसी प्रशासनिक अड़चन के सरकारी मदद की छतरी मुहैया कराना है।
आयु वर्ग के अनुसार निर्धारित सहायता राशि
संशोधित रूपरेखा के मुताबिक लाभार्थियों को दो प्रमुख श्रेणियों में बांटकर मासिक भुगतान किया जाएगा। शून्य से लेकर 79 वर्ष तक की आयु वाले पात्र लाभार्थियों के खाते में हर महीने 375 रुपये की राशि भेजी जाएगी। वहीं, 80 साल या उससे अधिक आयु पूरी कर चुके वयोवृद्ध दिव्यांगजनों के लिए यह मासिक सहायता 625 रुपये तय की गई है।
इस व्यवस्था में यह नियम सुनिश्चित किया गया है कि दिव्यांगजनों को मिलने वाला यह लाभ अन्य सामान्य सामाजिक वर्गों की तुलना में कम से कम 25 फीसदी अधिक बना रहे। पूरे देश में सहायता का स्तर एक समान रखने के उद्देश्य से इस समूची योजना का शत-प्रतिशत वित्तीय भार केंद्र सरकार स्वयं वहन करेगी।
कल्याणकारी योजनाओं का पुनर्गठन और नामकरण
मंत्रिमंडल की इस औपचारिक मंजूरी के साथ ही संपूर्ण राष्ट्रीय सामाजिक सहायता कार्यक्रम (NSAP) को नया नाम देते हुए प्रधानमंत्री सामाजिक सहायता योजना बना दिया गया है। इसी तर्ज पर इसकी विभिन्न उप-योजनाओं के नाम भी संशोधित किए गए हैं। पहले से चली आ रही इंदिरा गांधी राष्ट्रीय दिव्यांगता पेंशन योजना का नया नाम अब प्रधानमंत्री दिव्यांगजन पेंशन योजना रहेगा।
इसके अलावा, बुजुर्गों के लिए संचालित इंदिरा गांधी राष्ट्रीय वृद्धावस्था पेंशन योजना अब प्रधानमंत्री वृद्धावस्था पेंशन योजना के नाम से जानी जाएगी। एकल महिलाओं के लिए बनी इंदिरा गांधी राष्ट्रीय विधवा पेंशन योजना का नाम बदलकर प्रधानमंत्री विधवा पेंशन योजना कर दिया गया है। इसी तरह राष्ट्रीय परिवार लाभ योजना को भी नया स्वरूप देते हुए प्रधानमंत्री परिवार लाभ योजना के रूप में अधिसूचित किया गया है।
लागू करने की तय समय-सीमा
पात्रता की नई शर्तें तय करने, अतिरिक्त लाभार्थियों को सूची में शामिल करने तथा संशोधित राशियों के सुचारू आवंटन को लेकर विस्तृत परिचालन दिशा-निर्देश अगले तीन महीने की समय-सीमा के भीतर जारी किए जाएंगे। इस कदम से बचपन से ही गंभीर चुनौतियों से जूझ रहे बच्चों और उनके परिवारों को तत्काल राहत मिलने का मार्ग प्रशस्त होगा।


















