राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर होने वाले बड़े प्रदर्शन से पहले प्रशासन ने सख्त रुख अख्तियार कर लिया है। जंतर मंतर की ओर कूच करने की तैयारी कर रहे छात्र नेताओं, सामाजिक कार्यकर्ताओं और प्रमुख हस्तियों पर पुलिस ने व्यापक कार्रवाई की है। धारा 163 लागू होने के बीच कई प्रमुख चेहरों को रास्ते में और उनके ठिकानों से हिरासत में ले लिया गया।
विमान से उतरते ही प्रमुख आयोजकों की धरपकड़
प्रदर्शन का नेतृत्व करने दिल्ली पहुंच रहे अभिजीत दिपके, सौरव दास और आशुतोष रांका को राजधानी में कदम रखते ही हिरासत में ले लिया गया। जैसे ही उनका विमान हवाई अड्डे पर उतरा, किसी भी यात्री के बाहर निकलने से पहले महिला पुलिसकर्मियों की एक टीम अंदर दाखिल हुई और तीनों को घेर लिया। सामने आए दृश्यों के अनुसार, तीनों नेता शांत नजर आए क्योंकि उन्हें पहले से ही इस कार्रवाई का अंदेशा था।
अभिजीत दिपके ने किसी संभावित गिरफ्तारी की आशंका में पहले ही एक वीडियो संदेश रिकॉर्ड कर लिया था। उन्होंने स्पष्ट किया कि जब तक वे हिरासत में रहेंगे, तब तक संगठन प्रभारी अजिंक्य शिंदे जंतर मंतर पर प्रदर्शन की कमान संभालेंगे। बाद में सामने आई जानकारियों में आरोप लगाया गया कि तीनों को किसी अज्ञात स्थान पर ले जाया गया है, जहां उन्हें वकीलों से मिलने की अनुमति नहीं दी जा रही है और बाहरी संपर्क पूरी तरह काट दिया गया है।
यूट्यूबर ध्रुव राठी और अन्य सामाजिक कार्यकर्ता हिरासत में
प्रसिद्ध यूट्यूबर ध्रुव राठी, जिनके इस प्रदर्शन में शामिल होने की प्रबल संभावना थी, उन्हें भी शनिवार की सुबह हिरासत में ले लिया गया। सादे कपड़ों में आई दिल्ली पुलिस की टीम ने उन्हें गुरुग्राम के सेक्टर 56 स्थित उनके आवास से हिरासत में लिया। इस कार्रवाई के बाद आयोजकों ने सोशल मीडिया मंच X पर तत्काल रिहाई की मांग उठाई।
इसके अलावा कानूनी मामलों की प्रमुख रत्ना सिंह को भी घर पर ही रोक लिया गया। रत्ना सिंह के अनुसार पुलिस सुबह उनके घर पहुंची और उन्हें प्रदर्शन के लिए निकलने से मना कर दिया। उन्होंने कहा कि पुलिस ने हिरासत का कोई स्पष्ट कारण नहीं बताया और उनकी गाड़ी को आगे बढ़ने की इजाजत नहीं दी गई। वहीं हॉवर्ड यूनिवर्सिटी से पढ़ाई पूरी कर देश लौटने वाली नीति प्रमुख मेहर को भी पुलिस ने हिरासत में लिया। मुंबई में महात्मा गांधी के परपोते तुषार गांधी को भी मुंबई पुलिस द्वारा हिरासत में लिए जाने का मामला सामने आया, जो दिल्ली के इस आंदोलन में शिरकत करने वाले थे।
विपक्षी दलों का कड़ा रुख और नेताओं की घेराबंदी
इस पूरे घटनाक्रम पर विपक्षी दलों ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। कांग्रेस अध्यक्ष और राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने सोशल मीडिया पर केंद्र सरकार की आलोचना की। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र की आवाज को दबाने का प्रयास किया जा रहा है और तानाशाही रवैये से जनता डरने वाली नहीं है। खड़गे ने दोहराया कि आजादी के आंदोलन से लेकर अब तक युवाओं ने देश के भविष्य को संवारा है, और संयुक्त विपक्ष संविधान व लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा के लिए संघर्ष जारी रखेगा।
पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी भी हिरासत में लिए गए युवाओं के समर्थन में साउथ एवेन्यू के एक बस स्टॉप पर धरने पर बैठ गईं। हिरासत में लिए जाने से पूर्व उन्होंने संवाददाताओं से बात करते हुए कहा कि जंतर मंतर के अंदर किसी को जाने की अनुमति नहीं दी जा रही है और हालात बेहद गंभीर हैं। उन्होंने युवाओं के साथ एकजुटता प्रकट करने की बात कही।
उधर हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने भी युवाओं की धरपकड़ पर चिंता जाहिर करते हुए कहा कि लोकतंत्र में विरोध का अधिकार प्राथमिक हथियार है। उन्होंने सुझाव दिया कि युवाओं को रामलीला मैदान में प्रदर्शन की अनुमति दी जानी चाहिए थी। सुक्खू ने यह भी बताया कि कांग्रेस इस मामले में कानूनी कदम उठा रही है और सोमवार को दोबारा सुप्रीम कोर्ट का रुख करेगी। आम आदमी पार्टी ने आरोप लगाया कि उसके राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल के साथ पुलिसिया कार्रवाई के दौरान धक्का-मुक्की की गई, जबकि गोपाल राय, सौरभ भारद्वाज, संजय सिंह और दुर्गेश पाठक जैसे कई वरिष्ठ नेताओं को भी हिरासत में लिया गया।
सफदरजंग फ्लाईओवर पर छात्रों का प्रदर्शन और कड़े सुरक्षा इंतजाम
ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा को भी विरोध प्रदर्शन के दौरान हिरासत में लिया गया। इस दौरान सफदरजंग हवाई अड्डा फ्लाईओवर के समीप जोरदार हंगामा हुआ, जहां प्रदर्शनकारियों ने उस पुलिस बस को चारों तरफ से घेर लिया जिसमें नेहा बोरा और अन्य छात्र नेता मौजूद थे। भीड़ ने बस को आगे बढ़ने से रोकने का प्रयास किया।
राजधानी में कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए 20,000 से 40,000 पुलिसकर्मियों और अर्धसैनिक बलों के जवानों को तैनात किया गया है। अन्य राज्यों से भी अतिरिक्त पुलिस बल बुलाया गया है। निगरानी के लिए बॉडीकैम और ड्रोन का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया जा रहा है। प्रदर्शन को रोकने के लिए कई ट्रेनों को रद्द किए जाने और दिल्ली में लगभग 57 मेट्रो ट्रेनों के परिचालन बाधित रहने की सूचना है। जंतर मंतर पहुंचने से पहले ही दिल्ली भर से करीब 600 नागरिकों को हिरासत में लिया जा चुका है।
विवाद की जड़: मतदाता सूची संशोधन और आयोग में मतभेद
इस पूरे जनाक्रोश का मुख्य कारण मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों और "वोट चोरी" के आरोप हैं। यह मुद्दा तब गहराया जब एक जांच में सामने आया कि तीन में से दो चुनाव आयुक्तों ने नए वोट जोड़ने और नाम हटाने के निर्णयों पर अंधेरे में रखे जाने की शिकायत की थी। चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधु और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में कम से कम 14 बार औपचारिक आपत्तियां दर्ज कराईं, जिनमें एक ही दिन में चार बार आपत्तियां दर्ज कराई गई थीं।
बताया गया कि संधु और जोशी, जो निर्णय लेने की प्रक्रिया में मुख्य आयुक्त के समान ही अधिकार रखते हैं, उन्हें कुछ आदेशों की जानकारी मीडिया के माध्यम से मिली। जून 2025 से शुरू हुए विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) अभियान के तहत, जो बिहार से शुरू होकर अन्य राज्यों तक फैला, 30 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में मतदाता सूची से कम से कम 13 करोड़ नाम हटा दिए गए। जांच में यह भी सामने आया कि कई राज्यों में ऐसे वास्तविक मतदाताओं के नाम भी काट दिए गए जिनके पास वैध दस्तावेज मौजूद थे, और स्थानीय स्तर पर उठाई गई शिकायतों पर कोई ध्यान नहीं दिया गया। फिलहाल सुप्रीम कोर्ट ने मुख्य चुनाव आयुक्त को अंतरिम तौर पर निलंबित करने की याचिका पर रोक लगाते हुए चुनाव आयोग से औपचारिक जवाब तलब किया है।



















