जम्मू-कश्मीर के बिजली उपभोक्ताओं के लिए एक बड़ा प्रशासनिक फैसला सामने आया है। संयुक्त विद्युत नियामक आयोग (JERC) ने केंद्र शासित प्रदेश में बिजली की दरों में औसतन 6.83 प्रतिशत की बढ़ोतरी को आधिकारिक स्वीकृति दे दी है। नियामक आयोग की ओर से 20 अगस्त 2026 को नया टैरिफ ऑर्डर जारी किया गया था, जो 1 सितंबर 2026 से प्रभावी होगा और 31 मार्च 2027 तक लागू रहेगा। यह नया संशोधन जम्मू पावर डिस्ट्रीब्यूशन कॉर्पोरेशन लिमिटेड (JPDCL) तथा कश्मीर पावर डिस्ट्रीब्यूशन कॉर्पोरेशन लिमिटेड (KPDCL) दोनों ही वितरण निगमों के अंतर्गत आने वाले सभी श्रेणियों के उपभोक्ताओं पर समान रूप से लागू होगा।
घरेलू बिजली दरों के नए स्लैब और फिक्स्ड चार्ज
नियामक आयोग द्वारा जारी किए गए नए आदेश के तहत घरेलू बिजली खपत के लिए अलग-अलग स्लैब निर्धारित किए गए हैं। जिन घरेलू उपभोक्ताओं की मासिक खपत 0 से 200 यूनिट तक रहेगी, उन्हें अब ₹2.45 प्रति यूनिट की दर से ऊर्जा शुल्क देना होगा, जो कि पहले ₹2.30 प्रति यूनिट था। वहीं, 201 से 400 यूनिट प्रतिमाह खपत करने वाले घरेलू उपभोक्ताओं के लिए बिजली की दर ₹4.20 प्रति यूनिट तय की गई है। यदि कोई घरेलू उपभोक्ता महीने में 400 यूनिट से अधिक बिजली का उपयोग करता है, तो 400 यूनिट से ऊपर की खपत पर ₹4.60 प्रति यूनिट का चार्ज देना होगा। इसके अलावा, घरेलू कनेक्शन के फिक्स्ड चार्ज में भी प्रति किलोवाट (kW) ₹10 की बढ़ोतरी की गई है।
आम उपभोक्ताओं के मासिक बिल पर कितना पड़ेगा असर
टैरिफ में इस बदलाव के कारण आम नागरिक के मासिक बिजली बिल पर सीधा वित्तीय भार बढ़ेगा। उदाहरण के तौर पर, यदि कोई घरेलू उपभोक्ता एक महीने में 200 यूनिट बिजली की खपत करता है, तो उसका ऊर्जा शुल्क ₹460 से बढ़कर लगभग ₹490 हो जाएगा, जो सीधे तौर पर ₹30 की वृद्धि को दर्शाता है। इसी प्रकार, प्रतिमाह 300 यूनिट बिजली का उपभोग करने वाले परिवारों का कुल बिजली बिल बढ़कर लगभग ₹910 तक पहुंच जाएगा। इस प्रकार मध्यम और उच्च खपत वाले परिवारों के मासिक बजट में बिजली का खर्च बढ़ जाएगा।
बीपीएल परिवारों और किसानों के लिए रियायती प्रावधान
नई दर सूची में सामाजिक और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के लिए विशेष राहत की व्यवस्था की गई है। गरीबी रेखा से नीचे (BPL) जीवन यापन करने वाले पात्र घरेलू उपभोक्ताओं को प्रतिमाह 30 यूनिट तक की खपत पर केवल ₹1.40 प्रति यूनिट ऊर्जा शुल्क देना होगा, जबकि उनके लिए फिक्स्ड चार्ज ₹5 प्रति किलोवाट प्रतिमाह रखा गया है। यह रियायत केवल उन्हीं उपभोक्ताओं को मिलेगी जिनके पास सक्षम प्राधिकारी द्वारा जारी किया गया वैध BPL प्रमाण पत्र उपलब्ध होगा। यदि BPL उपभोक्ता 30 यूनिट से अधिक बिजली खपत करते हैं, तो 30 यूनिट से ऊपर की खपत पर सामान्य घरेलू स्लैब की दरें ही लागू होंगी। इसके साथ ही कृषि क्षेत्र और छोटे किसानों को भी सहायता प्रदान की गई है। 20 हॉर्सपावर (HP) तक क्षमता वाले कृषि कनेक्शनों के लिए ऊर्जा शुल्क ₹1.05 प्रति यूनिट और फिक्स्ड चार्ज ₹23 प्रति HP तय किया गया है। दूसरी ओर, 20 HP से अधिक क्षमता वाले कृषि कनेक्शनों पर ऊर्जा शुल्क ₹6.30 प्रति यूनिट और फिक्स्ड चार्ज ₹47 प्रति HP लागू रहेगा।
व्यावसायिक और दुकानदारों के लिए तय बिजली दरें
व्यापारियों, दुकानदारों और कमर्शियल श्रेणी के उपभोक्ताओं के लिए भी नई दरें लागू की गई हैं। 200 यूनिट तक बिजली इस्तेमाल करने वाले कमर्शियल उपभोक्ताओं को ₹3.75 प्रति यूनिट की दर से भुगतान करना होगा। 200 यूनिट से अधिक खपत होने पर ₹5.70 प्रति यूनिट का चार्ज लिया जाएगा। इसके साथ ही कमर्शियल श्रेणी में ₹75 प्रति किलोवाट प्रतिमाह का फिक्स्ड चार्ज तय किया गया है। थ्री-फेज कमर्शियल उपभोक्ताओं के लिए 6.15 रुपये प्रति किलो वोल्ट एम्पेयर ऑवर (kVAh) ऊर्जा शुल्क और 140 रुपये प्रति kVA की दर से फिक्स्ड चार्ज निर्धारित किया गया है।
डिस्ट्रीब्यूशन लॉस और अन्य नियम
संयुक्त विद्युत नियामक आयोग ने बिजली वितरण कंपनियों के लिए नुकसान के लक्ष्यों को भी स्पष्ट किया है। आयोग ने JPDCL के लिए डिस्ट्रीब्यूशन लॉस का लक्ष्य 15 प्रतिशत और KPDCL के लिए 19 प्रतिशत पर बरकरार रखा है। इसके अतिरिक्त, फ्यूल एंड पावर परचेज कॉस्ट एडजेस्टमेंट (FPPCA) व्यवस्था पहले की तरह जारी रहेगी, जिससे बिजली खरीद लागत के उतार-चढ़ाव को समायोजित किया जा सकेगा। बिजली बिल में शामिल किए जाने वाले अन्य विविध शुल्कों में कोई बदलाव नहीं किया गया है।



















