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अकिता और इवाते से तोक्यो तक भालू संकट, जापान ने क्यों तय किया 8800 और भालुओं को मारने का लक्ष्य?दुनिया
27 अग॰ 2026, 3:13 pm (67 दिन पहले)· 4

अकिता और इवाते से तोक्यो तक भालू संकट, जापान ने क्यों तय किया 8800 और भालुओं को मारने का लक्ष्य?

जापान में भोजन की किल्लत और बदलते मौसम के कारण भालुओं के हमले जारी हैं, जिससे निपटने के लिए 14,000 भालुओं को मारने के बाद अब 8,800 और भालुओं को खत्म करने का लक्ष्य रखा गया है।

जापान में इंसानों और भालुओं के बीच बढ़ता संघर्ष एक गंभीर पर्यावरणीय और सार्वजनिक सुरक्षा संकट बन गया है। अप्रैल 2025 से जनवरी 2026 के बीच जापानी प्रशासन और शिकारियों ने 14 हजार से अधिक भालुओं को मार डाला, लेकिन इसके बावजूद बस्तियों में भालुओं के हमले रुकने का नाम नहीं ले रहे हैं। आंकड़े बताते हैं कि अप्रैल के बाद से अब तक कम से कम 9 प्रांतों में 6 लोगों की जान जा चुकी है और 35 से अधिक लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं। लगातार हो रही इन घटनाओं के बीच जापानी सरकार ने इस चालू वित्त वर्ष के दौरान लगभग 8,800 और भालुओं को मारने का नया लक्ष्य निर्धारित किया है, जिससे देश की पर्यावरण संरक्षण नीतियों पर बड़े सवाल खड़े हो गए हैं।

हमलों का बढ़ता आंकड़ा और शिकार का बड़ा लक्ष्य

जापान में भालुओं के आतंक का इतिहास देखा जाए तो पिछला साल देश के लिए सबसे ज्यादा घातक साबित हुआ था। उस दौरान भालुओं के हमलों में 230 से अधिक लोग शिकार बने थे, जिनमें से 13 लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी थी। खासकर जापान के उत्तरी पहाड़ी क्षेत्रों अकिता और इवाते में हालात बेहद बेकाबू हो गए थे। संकट से निपटने के लिए सरकार ने आवासीय बस्तियों के पास भालुओं को मारने से जुड़े कड़े नियमों में ढील दी थी। इसके परिणामस्वरूप अप्रैल 2025 से जनवरी 2026 की अवधि में मारे गए 14,000 से अधिक भालुओं में लगभग 12 हजार एशियन ब्लैक बीयर और करीब 2 हजार भूरे भालू शामिल थे। हालांकि इतने बड़े पैमाने पर भालुओं को समाप्त किए जाने के बाद भी इंसानों की सुरक्षा सुनिश्चित नहीं हो सकी है।

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जलवायु परिवर्तन और जंगलों में भोजन का अकाल

वन विशेषज्ञों और पर्यावरण संरक्षणकर्ताओं के अनुसार इस संकट की मुख्य जड़ मौसम में आ रहे अप्रत्याशित बदलाव हैं। भीषण गर्मी और बढ़ते तापमान ने जंगलों के पारिस्थितिकी तंत्र को भारी नुकसान पहुंचाया है। सर्दियों की सुप्त अवस्था यानी हाइबरनेशन से पहले भालुओं को पर्याप्त ऊर्जा जमा करने के लिए बीच नट्स और बलूत (एकॉर्न) की सख्त जरूरत होती है। लेकिन अत्यधिक गर्मी के कारण मंगोलियन ओक के पेड़ सूखने लगे हैं और बलूत के फलों को कीड़ों से नुकसान पहुंचा है। इसके साथ ही जापानी बीच के पेड़ों में बीजों का उत्पादन कम हुआ है और परागण करने वाले कीड़ों की संख्या में भी भारी गिरावट आई है। जंगल में प्राकृतिक भोजन खत्म होने पर भालू भोजन की तलाश में पहाड़ों से नीचे उतरकर इंसानी बस्तियों, बगीचों और कचरे के डिब्बों का रुख कर रहे हैं।

गांवों से पलायन और जंगलों का अनियंत्रित विस्तार

इस मानवीय और वन्यजीव संघर्ष के पीछे जापान का बदलता सामाजिक और जनसांख्यिकी ढांचा भी जिम्मेदार है। बीते कई दशकों के दौरान जापान के ग्रामीण इलाकों से बड़ी संख्या में लोग काम और सुविधा की तलाश में शहरों की ओर चले गए। इसके चलते गांव के खेत, खलिहान और फलदार बगीचे लंबे समय तक खाली और लावारिस पड़े रहे। समय के साथ इन खाली पड़ी जमीनों पर फिर से घने जंगल उग आए, जिसने भालुओं के अलग-अलग इलाकों को आपस में जोड़ दिया। विडंबना यह है कि एशियाई काले भालुओं को बचाने के लिए शुरू की गई संरक्षण नीतियों से उनकी संख्या में तो सुधार हुआ, लेकिन जंगलों के फैलाव ने भालुओं के प्राकृतिक क्षेत्र को इंसानी आबादी के बिल्कुल करीब ला खड़ा किया।

विशेषज्ञों की चिंता और विलुप्त होने का खतरा

बड़े पैमाने पर भालुओं को मारने की नीति से पर्यावरणविद और वन्यजीव संगठन बेहद चिंतित हैं। उनका मानना है कि केवल भालुओं को खत्म कर देने से यह समस्या हल नहीं होगी जब तक कि उनके प्राकृतिक आवास और भोजन चक्र को सुधारा न जाए। जापान बीयर एंड फॉरेस्ट सोसाइटी की अध्यक्ष युको मुरोया ने इस स्थिति पर चेतावनी देते हुए कहा है कि यदि इसी तरह अंधाधुंध भालुओं को पकड़ा और मारा जाता रहा, तो जापान के कई इलाकों से भालुओं की आबादी पूरी तरह से विलुप्त हो सकती है।

सवाल-जवाब

जापान में अप्रैल 2025 से जनवरी 2026 के बीच कितने भालू मारे गए?
इस अवधि में 14,000 से अधिक भालू मारे गए, जिनमें लगभग 12,000 एशियन ब्लैक बीयर और 2,000 भूरे भालू शामिल थे।
जापान सरकार का चालू वित्त वर्ष में भालुओं को मारने का क्या लक्ष्य है?
जापान सरकार ने इस चालू वित्त वर्ष में लगभग 8,800 और भालुओं को मारने का लक्ष्य निर्धारित किया है।
भालू जंगलों से निकलकर इंसानी बस्तियों में क्यों आ रहे हैं?
भीषण गर्मी के कारण जंगलों में बीच नट्स और बलूत जैसे मुख्य भोजन की भारी कमी हो गई है, जिससे भालू खाने की तलाश में नीचे आ रहे हैं।
भालुओं के हमलों से सबसे ज्यादा प्रभावित कौन से प्रांत हैं?
जापान के उत्तरी पहाड़ी इलाके विशेषकर अकिता और इवाते प्रांत भालुओं के हमलों से सबसे अधिक प्रभावित हुए हैं।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 2

Rohan Verma@rohan-verma·67 दिन पहले

यह संकट हमें याद दिलाता है कि जब इंसानी बस्तियां और वन्यजीवों के प्राकृतिक गलियारे आपस में टकराते हैं, तो प्रशासन के लिए सुरक्षा और संरक्षण के बीच संतुलन बनाना कितना कठिन हो जाता है। जिस तरह जापान में जंगलों का घटना-बढ़ना और जलवायु परिवर्तन भोजन का संकट पैदा कर रहा है, वह बताता है कि सिर्फ अंधाधुंध शिकार रोकने या बढ़ाने से समस्या हल नहीं होगी, बल्कि दीर्घकालिक पर्यावरणीय प्रबंधन जरूरी है।

Omar AL Mansoori@omar-mansoori·67 दिन पहले

यह संकट केवल जापान तक सीमित नहीं है, बल्कि ऊर्जा और कृषि बाजारों के वैश्विक भू-राजनीतिक ढांचे को भी प्रभावित करता है। जब जलवायु परिवर्तन और चरम मौसम पारिस्थितिकी तंत्र को तबाह करते हैं, तो इसका सीधा असर ग्रामीण अर्थव्यवस्था, श्रम शक्ति और खाद्य सुरक्षा पर पड़ता है। केवल वन्यजीवों को निशाना बनाने से नीति निर्माताओं को अस्थायी राहत मिल सकती है, लेकिन जब तक वनों के प्रबंधन और आर्थिक प्राथमिकताओं में रणनीतिक बदलाव नहीं किए जाते, तब तक यह चक्र और अधिक गंभीर रूप लेता रहेगा।

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