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यूपीआई से बीमा प्रीमियम भरने वालों को बड़ी राहत, नए नियमों के बावजूद नहीं देना होगा कोई एमडीआर शुल्कमनी
17 सित॰ 2026, 4:10 pm (43 दिन पहले)· 2

यूपीआई से बीमा प्रीमियम भरने वालों को बड़ी राहत, नए नियमों के बावजूद नहीं देना होगा कोई एमडीआर शुल्क

नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) ने बीमा भुगतानों को एक विशेष श्रेणी में रखते हुए स्पष्ट किया है कि यूपीआई के जरिए बीमा पॉलिसी खरीदने या प्रीमियम भरने पर कोई अतिरिक्त मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) नहीं देना होगा।

यूपीआई (UPI) के जरिए भुगतान करने वाले देश के करोड़ों उपभोक्ताओं के लिए एक बेहद राहत भरी खबर है। नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) ने स्पष्ट किया है कि ऑनलाइन बीमा उत्पादों की खरीद करने या उनके प्रीमियम का भुगतान करने पर कोई मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) नहीं लगाया जाएगा। इस महत्वपूर्ण फैसले के बाद डिजिटल माध्यम से अपने इंश्योरेंस प्रीमियम का भुगतान करने वाले ग्राहकों को किसी भी तरह का अतिरिक्त वित्तीय बोझ नहीं उठाना पड़ेगा।

15 अक्टूबर से लागू होने वाले हैं नए नियम

दरअसल, आगामी 15 अक्टूबर से 2,000 रुपये से अधिक मूल्य के कुछ विशिष्ट यूपीआई (UPI) भुगतानों पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लगाने की घोषणा की गई थी। इस घोषणा के सामने आने के बाद से ही डिजिटल भुगतान करने वाले आम ग्राहकों और व्यापारियों के बीच काफी असमंजस की स्थिति बनी हुई थी। लोग इस बात को लेकर चिंतित थे कि क्या उनके बीमा प्रीमियम भुगतान, ओटीटी (OTT) प्लेटफॉर्म के ऑटो-पे और अन्य जरूरी सेवाओं पर भी अतिरिक्त शुल्क वसूल किया जाएगा। हालांकि, अब इस मामले में स्थिति पूरी तरह साफ कर दी गई है।

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बीमा क्षेत्र के लिए अलग श्रेणी तय

एनपीसीआई (NPCI) ने पॉलिसी धारकों के हितों की रक्षा के लिए बीमा क्षेत्र को एक अलग श्रेणी में वर्गीकृत किया है। इस विशेष वर्गीकरण की वजह से बीमा प्रीमियम के लिए किए जाने वाले भुगतानों को एमडीआर (MDR) के दायरे से पूरी तरह बाहर रखा गया है। इसका सीधा फायदा उन ग्राहकों को मिलेगा जो बड़ी राशि का बीमा प्रीमियम भरते हैं। उदाहरण के लिए, यदि कोई ग्राहक सालाना 50,000 रुपये का बीमा प्रीमियम यूपीआई (UPI) के जरिए चुकाता है, तो उसे एक भी पैसा अतिरिक्त चार्ज के तौर पर नहीं देना होगा। यदि इस श्रेणी पर सामान्य मर्चेंट चार्ज लागू होता, तो पॉलिसी धारकों को जेब से अतिरिक्त पैसे खर्च करने पड़ते।

अन्य आवश्यक डिजिटल भुगतानों पर क्या होगा असर?

नए नियमों के दायरे में नेटफ्लिक्स (Netflix) जैसे लोकप्रिय ओटीटी (OTT) प्लेटफॉर्म के प्रीमियम ऑटो-पे, स्कूल फीस, पेट्रोल पंप और किराने की दुकानों पर होने वाले लेनदेन को लेकर भी लगातार चर्चा चल रही है। हालांकि, ग्राहकों को यह समझना होगा कि मर्चेंट डिस्काउंट रेट का बोझ हमेशा सीधे तौर पर ग्राहक पर नहीं पड़ता, बल्कि इसे व्यापारियों या सेवा प्रदाताओं को वहन करना होता है। लेकिन बीमा क्षेत्र में डिजिटल लेनदेन को बढ़ावा देने के लिए इसे इस शुल्क से दूर रखा गया है। सरकार का लक्ष्य साल 2033 तक देश के हर नागरिक तक बीमा कवर पहुंचाना है, और इस उद्देश्य को हासिल करने के लिए डिजिटल भुगतानों को आसान और पूरी तरह निशुल्क रखना बेहद जरूरी माना जा रहा है।

सवाल-जवाब

क्या 15 अक्टूबर के बाद यूपीआई से बीमा प्रीमियम भरने पर कोई चार्ज लगेगा?
नहीं, नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) ने बीमा क्षेत्र को विशेष श्रेणी में रखा है, इसलिए यूपीआई से बीमा प्रीमियम भरने पर कोई MDR शुल्क नहीं लगेगा।
यूपीआई पर नया एमडीआर (MDR) नियम कब से लागू हो रहा है?
यूपीआई भुगतानों पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) से जुड़े नए नियम 15 अक्टूबर से लागू होने जा रहे हैं।
क्या यह नियम 2,000 रुपये से कम के भुगतानों पर भी लागू होगा?
नहीं, नए नियमों के तहत केवल 2,000 रुपये से अधिक के विशिष्ट भुगतानों पर ही मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लगाने की बात कही गई है।
यदि मैं 50,000 रुपये का भारी बीमा प्रीमियम यूपीआई से चुकाता हूं, तो मुझे कितना शुल्क देना होगा?
आपको शून्य शुल्क देना होगा। बीमा प्रीमियम भुगतान को पूरी तरह छूट दी गई है, जिससे आपकी पूरी राशि सुरक्षित रहेगी और कोई अतिरिक्त चार्ज नहीं कटेगा।
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