अमेरिकी फेडरल रिजर्व की तरफ से बुधवार को नीतिगत ब्याज दरों में संभावित 25 आधार अंकों (0.25 प्रतिशत) की बढ़ोतरी की तैयारी की जा रही है। केंद्रीय बैंक का यह कदम केवल वॉल स्ट्रीट के वित्तीय गलियारों तक सीमित नहीं रहने वाला है, बल्कि इसका सीधा असर आम अमेरिकी परिवारों की जेब, बचत पर मिलने वाले मुनाफे और कर्ज चुकाने की लागत पर पड़ेगा। दरअसल, यह फैसला महंगाई को काबू में रखने के इरादे से लिया जा रहा है, लेकिन इसका रोजमर्रा के व्यक्तिगत वित्त पर बहुआयामी प्रभाव देखने को मिलेगा।
महंगाई को नियंत्रित करने की केंद्रीय बैंक की कोशिश
अगस्त के महीने में अमेरिका में मुद्रास्फीति बढ़कर 3.4 प्रतिशत तक पहुंच गई, जो फेडरल रिजर्व के तय 2 प्रतिशत के वार्षिक लक्ष्य से काफी अधिक बनी हुई है। ऊर्जा की बढ़ती कीमतों और ईरान से जुड़ी भू-राजनीतिक अनिश्चितता ने मुद्रास्फीति के दबाव को और अधिक बढ़ा दिया है। ऐसी परिस्थितियों में मूल्य स्थिरता बनाए रखना केंद्रीय बैंक की सर्वोच्च प्राथमिकता बन गया है। जब तक उपभोक्ता वस्तुओं और सेवाओं की लागत नियंत्रित नहीं होती, तब तक दरों को उच्च स्तर पर बनाए रखना या उनमें वृद्धि करना नीति निर्माताओं के लिए आवश्यक माना जा रहा है।
जमाकर्ताओं और बचत खातों के लिए बेहतर रिटर्न की उम्मीद
फेडरल रिजर्व द्वारा बेंचमार्क दरों में वृद्धि का एक सकारात्मक पहलू यह है कि यह आम जमाकर्ताओं के लिए अधिक अनुकूल वित्तीय माहौल तैयार करता है। जब केंद्रीय बैंक अपनी दरें बढ़ाता है, तो वाणिज्यिक बैंक और अन्य वित्तीय संस्थान भी ग्राहकों की नकदी और डिपॉजिट पर दी जाने वाली ब्याज दरों में बढ़ोतरी करने लगते हैं।
शॉर्ट-टर्म ब्याज दरों में तेजी आने से हाई-यील्ड बचत खाते, सर्टिफिकेट्स ऑफ डिपॉजिट (सीडी) और मनी मार्केट खाते निवेशकों के लिए काफी आकर्षक विकल्प बन जाते हैं। हालांकि, सभी बैंकों में यह लाभ एक समान गति या मात्रा में नहीं मिलता। बड़े पारंपरिक बैंक आमतौर पर अपनी डिपॉजिट दरों में धीमी गति से या मामूली वृद्धि करते हैं। इसके विपरीत, जो वित्तीय संस्थान आक्रामक रूप से नई जमा राशि जुटाने की होड़ में रहते हैं, वे ग्राहकों को अपेक्षाकृत अधिक प्रतिस्पर्धी रिटर्न की पेशकश करते हैं।
ऐसी स्थिति में केवल एक सामान्य बचत खाते में पैसा पड़े रहने देना समझदारी नहीं मानी जाती। जब बाजार में ब्याज दरें ऊंचे स्तर पर हों, तो विभिन्न बैंकों की जमा दरों की तुलना करना और भी महत्वपूर्ण हो जाता है। इसके अलावा, जो लोग फिक्स्ड-टर्म उत्पादों या सर्टिफिकेट्स ऑफ डिपॉजिट में पैसा लगाने की योजना बना रहे हैं, उन्हें अपना फंड ट्रांसफर करने से पहले लॉक-इन अवधि, समय से पहले पैसे निकालने की शर्तें और लागू डिपॉजिट इंश्योरेंस की सीमाओं की अच्छी तरह जांच कर लेनी चाहिए।
क्रेडिट कार्ड यूजर्स पर बढ़ेगा वित्तीय बोझ
फेडरल रिजर्व की नीतिगत दरों में बदलाव का सबसे तीव्र और सीधा झटका क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल करने वाले उपभोक्ताओं पर पड़ता है। अमेरिका में अधिकांश क्रेडिट कार्ड परिवर्तनीय (वेरिएबल) ब्याज दरों के साथ आते हैं। इसका सीधा अर्थ यह है कि जैसे ही व्यापक बाजार में शॉर्ट-टर्म दरें ऊपर जाती हैं, ऋणदाता अपनी ब्याज दरों में भी बढ़ोतरी कर देते हैं।
उपभोक्ता ऋण के लिए आधार माना जाने वाला प्राइम रेट आम तौर पर फेडरल रिजर्व की बेंचमार्क दर के साथ ही घटता-बढ़ता है। अमेरिका में कई क्रेडिट कार्डों पर ब्याज दरें पहले से ही 20 प्रतिशत से अधिक चल रही हैं। ऐसे में 25 आधार अंकों की नई बढ़ोतरी क्रेडिट कार्ड पर बकाया राशि को चुकाना और भी महंगा बना देगी।
इसका सबसे गंभीर असर उन लोगों पर पड़ेगा जो हर महीने अपने क्रेडिट कार्ड बिल का पूरा भुगतान करने के बजाय केवल मिनिमम अमाउंट का भुगतान करते हैं। जब ब्याज दरें बढ़ती हैं, तो न्यूनतम भुगतान की स्थिति में कर्ज से बाहर निकलने में लगने वाला समय काफी लंबा खिंच जाता है और ब्याज की कुल रकम में भारी इजाफा हो जाता है। रिवाल्विंग डेट के बोझ तले दबे उपभोक्ताओं को चाहिए कि वे अपनी भुगतान रणनीति की समीक्षा करें ताकि बढ़ती दरों के कारण उन पर अनावश्यक वित्तीय दबाव न बने।
ऑटो लोन और अन्य उपभोक्ता ऋणों पर क्या होगा असर
अन्य उपभोक्ता ऋणों की लागत इस बात पर निर्भर करेगी कि ली गई उधारी फिक्स्ड रेट पर है या फ्लोटिंग यानी वेरिएबल रेट पर। यदि किसी व्यक्ति ने पहले से फिक्स्ड रेट पर ऑटो लोन ले रखा है, तो उसकी मासिक ईएमआई पर कोई असर नहीं पड़ेगा क्योंकि लोन लेते समय ही उसकी ब्याज दर तय हो चुकी होती है।
हालांकि, जो उपभोक्ता अब एक नई गाड़ी खरीदने और उसके लिए नया ऑटो लोन लेने की योजना बना रहे हैं, उन्हें अतिरिक्त वित्तीय लागत का सामना करना पड़ सकता है। यदि बैंक और ऑटो फाइनेंस कंपनियां फेड के फैसले के बाद अपनी उधार दरें बढ़ाती हैं, तो नए खरीदारों को महंगी ईएमआई चुकानी होगी। यही नियम अन्य सभी प्रकार के वेरिएबल-रेट पर्सनल या कंज्यूमर लोन पर भी लागू होता है। उच्च बेंचमार्क धीरे-धीरे उधारी की लागत को बढ़ाता है, जिससे मासिक किस्तें बढ़ जाती हैं। जो परिवार पहले से ही बढ़ते मासिक खर्चों से जूझ रहे हैं, उनके लिए यह मामूली वृद्धि भी बजट को असंतुलित कर सकती है।
मॉर्गेज दरों और होम लोन का जटिल समीकरण
फेडरल रिजर्व की पॉलिसी दर और अमेरिकी मॉर्गेज दरों के बीच का संबंध पूरी तरह से सीधा या एक-के-बदले-एक जैसा नहीं होता। अमेरिका में 30-वर्षीय फिक्स्ड मॉर्गेज दरें रातों-रात तय होने वाली फेड की ओवरनाइट दर के बजाय मुख्य रूप से 10-वर्षीय ट्रेजरी यील्ड और दीर्घकालिक निवेशकों की अपेक्षाओं से निर्धारित होती हैं। यही कारण है कि बुधवार के निर्णय के बाद मॉर्गेज दरों की दिशा फेड दर की तुलना में अलग व्यवहार कर सकती है।
हाल के दिनों में 10-वर्षीय अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड अक्टूबर 2023 में देखे गए उच्च स्तरों की ओर बढ़ी है। इसी के चलते औसत 30-वर्षीय फिक्स्ड मॉर्गेज दर एक साल से अधिक समय में पहली बार 7 प्रतिशत के स्तर को पार कर गई है।
हालांकि, जिन कर्जदारों के पास एडजस्टेबल-रेट मॉर्गेज (एआरएम) या होम इक्विटी लाइन्स ऑफ क्रेडिट (एचईएलओसी) मौजूद हैं, उन पर फेड के इस फैसले का सीधा असर देखने को मिलेगा। ये लोन उत्पाद शॉर्ट-टर्म ब्याज दर बेंचमार्क से बहुत करीब से जुड़े होते हैं। जैसे ही केंद्रीय बैंक की नीतिगत दरें ऊपर जाती हैं, इन उत्पादों के तहत ली गई उधारी तुरंत अधिक महंगी हो जाती है, जिससे गृहस्वामियों पर अतिरिक्त मासिक बोझ पड़ना तय है।


















