मौली मैनर्स की फीचर निर्देशन की शुरुआत के तौर पर सामने आई ब्रिटिश फिल्म एक्स्ट्रा ज्योग्राफी रिव्यू किशोरियों के मन के द्वंद्व और बड़े होने की जटिलताओं को बेहद संजीदगी से पेश करती है। चार्ली XCX के मशहूर बोल 'इट्स सो कन्फ्यूजिंग समटाइम्स टू बी अ गर्ल' इस कहानी के मूल सार को पूरी तरह बयां करते हैं। ब्रिटिश सिनेमा में टीनेज लड़कियों की जिंदगी को केंद्र में रखने वाली बेहतरीन फिल्मों की कतार में यह कहानी अपनी एक अलग पहचान बनाती है, जहां दो गहरी सहेलियां उम्र के एक ऐसे मोड़ पर पहुंचती हैं जहां उनके रास्ते अलग होने लगते हैं।
कहानी की शुरुआत और प्यार की तलाश
रोज़ ट्रेमेन की 2007 की लघु कहानी पर आधारित इस पटकथा को मिरियम बैटी ने लिखा है। फिल्म की शुरुआत एक लैक्रोस मैदान पर लेटी दो सहेलियों से होती है। इनमें से एक है आत्मविश्वास से भरी मिन्ना, जिसका किरदार गैलेक्सी क्लियर ने निभाया है, और दूसरी है थोड़ी संकोची फ्लिक, जिसकी भूमिका में मार्नी डग्गन नजर आती हैं। दोनों के सामने सबसे बड़ी फिक्र उनका भविष्य और ऑक्सब्रिज के आवेदन हैं। लड़कों, नशे या पार्ट-टाइम नौकरियों के भटकाव से दूर, उनका सारा ध्यान अपनी पढ़ाई पर ही रहता है। इसी बीच वे खुद को दुनियादार बनाने के इरादे से गर्मियों के लिए एक खास प्रोजेक्ट तय करती हैं, जो है किसी से प्यार करना। इस अजीबोगरीब प्रयोग का जरिया बनती हैं उनकी परेशान रहने वाली भूगोल शिक्षिका मिस डेलाविग्ने, जिनका किरदार एलिस एंगलर्ट ने निभाया है।
शेक्सपियर का नाटक और दोस्ती में दरार
यह भावनात्मक खोज दोनों सहेलियों के बीच पहली बार एक फासला पैदा कर देती है। स्कूल में विलियम शेक्सपियर के नाटक 'अ मिडसमर नाइट्स ड्रीम' के मंचन की तैयारियां शुरू होती हैं, जो मिन्ना का ध्यान भटका देती हैं। मिन्ना को परी रानी टिटानिया की भूमिका मिलती है और वह पड़ोस के स्कूल के लड़कों के साथ वक्त बिताने लगती है। दूसरी तरफ फ्लिक को पेड़ का मामूली रोल मिलता है, जिसके चलते वह प्यार को एक अकादमिक अध्ययन की तरह गहराई से समझने में जुट जाती है। धीरे-धीरे दोनों के बीच ईर्ष्या की एक गहरी दीवार खड़ी हो जाती है और उनका पुराना दोस्ताना बिखरने लगता है। शेक्सपियर के नाटक की तरह ही यह फिल्म भी पांच-अंकों की संरचना अपनाती है। हालांकि, कई अलग-अलग कहानी के धागों को एक साथ साधने की कोशिश में 94 मिनट की यह फिल्म बीच-बीच में थोड़ी उलझ जाती है और अपनी शुरुआती पैनी धार पूरी तरह बरकरार नहीं रख पाती।
कलाकारों का अभिनय और सिनेमैटिक माहौल
निर्देशक मौली मैनर्स और लेखक मिरियम बैटी ने टीनेज के तनाव, दबी हुई इच्छाओं और चुटीले हास्य को बहुत ही नफासत के साथ पर्दे पर उतारा है। इस पूरे अनुभव में सबसे चमकदार पहलू गैलेक्सी क्लियर और मार्नी डग्गन का सधा हुआ अभिनय साबित होता है। दोनों नए चेहरों ने किशोरावस्था की अजीब, आवेगी और कठिन सच्चाइयों को बेहद सहजता से जीकर दिखाया है।
बोर्डिंग स्कूल का शांत और अलग-थलग माहौल एक सजे हुए गुड़ियाघर की तरह दिखता है, जो समय और स्थान से परे महसूस होता है। हालांकि विजुअल्स बेहद आकर्षक हैं, लेकिन सामाजिक वर्ग के फर्क (जैसे मिन्ना का लैंजारोटे में छुट्टियां मनाना जबकि फ्लिक का स्कॉलरशिप पर पढ़ना) और उभरती समलैंगिक भावनाओं के पहलुओं को छूकर भी फिल्म उनकी पूरी गहराई में नहीं उतर पाती। इन तमाम बातों के बावजूद, यह फिल्म इस सच को बड़ी शिद्दत से बयां करती है कि अक्सर आपका पहला प्यार कोई और नहीं बल्कि आपकी सबसे अच्छी दोस्त ही होती है।



















