नागालैंड में आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के लाभार्थियों के लिए अपने स्वास्थ्य कार्ड को आधार से जोड़ना अनिवार्य कर दिया गया है। नागालैंड स्वास्थ्य सुरक्षा सोसायटी ने स्पष्ट किया है कि सूचीबद्ध अस्पतालों में बिना किसी रुकावट के कैशलेस इलाज की सुविधा जारी रखने के लिए यह प्रक्रिया पूरी करना जरूरी है। रिकॉर्ड की समीक्षा के दौरान यह बात सामने आई है कि राज्य में 1.14 लाख से अधिक आयुष्मान कार्ड अब तक आधार संख्या से नहीं जुड़े हैं। इस स्थिति को देखते हुए विभाग ने कार्डधारकों को 30 नवंबर 2026 तक का समय दिया है।
किन लाभार्थियों को कराना होगा सत्यापन
यह निर्देश विशेष रूप से उन सभी कार्डधारकों पर लागू होता है जिनके आयुष्मान कार्ड वर्ष 2018 से सितंबर 2022 के बीच बनाए गए थे। इस अवधि के दौरान बने कार्डों के धारकों को अपने कार्ड की आधार लिंकेज स्थिति की जांच करने के लिए कहा गया है। जिन लाभार्थियों का कार्ड अभी तक लिंक नहीं हुआ है, वे कार्ड जेनरेशन यानी बीआईएस पोर्टल के जरिए इस प्रक्रिया को पूरा कर सकते हैं। इसके अलावा विभाग ने ऐसे लाभार्थियों की एक सूची भी उपलब्ध कराई है जिनके कार्ड अब तक आधार से नहीं जुड़े हैं ताकि लोग आसानी से अपना नाम देख सकें।
लिंकेज के लिए तय किए गए केंद्र
नागालैंड स्वास्थ्य सुरक्षा सोसायटी ने नागरिकों की सुविधा के लिए कई विकल्प प्रदान किए हैं ताकि लोगों को किसी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े। लाभार्थी अपने जिले के मुख्य चिकित्सा अधिकारी कार्यालय, कॉमन सर्विस सेंटर और विलेज लेवल एंटरप्रेन्योर्स के जरिए अपना कार्ड लिंक करा सकते हैं। इसके साथ ही अधिकृत कार्ड वेंडर एजेंसियों और योजना से जुड़े सूचीबद्ध अस्पतालों में भी आधार जोड़ने की सुविधा उपलब्ध कराई गई है।
समय पर प्रक्रिया न करने पर कार्ड निष्क्रिय होने की चेतावनी
विभाग ने आगाह किया है कि 30 नवंबर 2026 की निर्धारित अंतिम तारीख बीत जाने के बाद बिना आधार वाले आयुष्मान कार्ड को निष्क्रिय किया जा सकता है। यदि किसी लाभार्थी का कार्ड निष्क्रिय हो जाता है, तो उसे दोबारा कैशलेस उपचार का लाभ प्राप्त करने के लिए बीआईएस पोर्टल के माध्यम से नए सिरे से ई-केवाईसी प्रक्रिया से गुजरना होगा।
नियमों में बदलाव की पृष्ठभूमि
जब 2018 से सितंबर 2022 के बीच इस योजना की शुरुआती शुरुआत की गई थी, तब सामाजिक-आर्थिक जाति जनगणना और राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा योजना के आंकड़ों से चिन्हित लाभार्थियों के कार्ड बिना आधार के भी बन जाते थे। बाद में राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण के आईटी प्लेटफॉर्म के माध्यम से लाभार्थियों की सटीक मैपिंग सुनिश्चित करने के लिए आधार लिंकेज को अनिवार्य बना दिया गया।























