नागालैंड के राज्यपाल नंद किशोर यादव ने गुरुवार को राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग के कामकाज का विस्तृत जायजा लिया। कोहिमा स्थित लोक भवन में आयोजित इस उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक के दौरान बाल अधिकारों की सुरक्षा से जुड़े तंत्र को मजबूत करने और धरातल पर आ रही दिक्कतों को दूर करने पर गहन चर्चा हुई। आयोग के प्रतिनिधियों ने बैठक में बताया कि राज्य भर में बाल सुरक्षा से जुड़े बुनियादी ढांचे का विस्तार करने, जरूरी कर्मचारियों की तैनाती करने और नियमित वित्तीय संसाधनों की व्यवस्था करने में गंभीर चुनौतियां सामने आ रही हैं।
विशेष देखभाल वाले बच्चों के लिए सुविधाओं का अभाव
समीक्षा बैठक के दौरान आयोग की ओर से प्रस्तुत विवरण में इस बात को प्रमुखता से रेखांकित किया गया कि देखरेख और संरक्षण की आवश्यकता वाले बच्चों के लिए पर्याप्त व्यवस्थाएं उपलब्ध नहीं हैं। विशेष रूप से मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से जूझ रहे नाबालिगों, नशीले पदार्थों के सेवन के शिकार हुए बच्चों तथा दिव्यांग बच्चों के पुनर्वास और उपचार के लिए विशेष केंद्रों व प्रशिक्षित विशेषज्ञों की भारी कमी बनी हुई है। आयोग ने स्पष्ट किया कि जब तक इन संवेदनशील वर्गों के लिए समर्पित संस्थागत सुविधाएं तैयार नहीं की जातीं, तब तक सुरक्षा पहलों का पूरा लाभ जमीनी स्तर पर नहीं पहुंच सकता।
कानूनों के क्रियान्वयन और अंतर-विभागीय समन्वय का ब्योरा
आयोग ने वर्ष 2023 से लेकर अब तक की अपनी प्रमुख गतिविधियों और उपलब्धियों का ब्योरा राज्यपाल के समक्ष रखा। इस अवधि में राज्य के विभिन्न जिलों में बाल संरक्षण से जुड़े महत्वपूर्ण कानूनों की निगरानी पर विशेष बल दिया गया। इनमें किशोर न्याय अधिनियम 2015, पॉक्सो कानून 2012, शिक्षा का अधिकार कानून 2009 और बाल एवं किशोर श्रम निषेध कानून 1986 का प्रभावी अनुपालन सुनिश्चित करने के प्रयास शामिल रहे। इसके अलावा आयोग ने पुलिस, न्यायपालिका, समाज कल्याण, स्वास्थ्य, शिक्षा और श्रम विभागों के साथ गैर-सरकारी संगठनों का एक साझा मंच तैयार किया है, ताकि मामलों का त्वरित निस्तारण हो सके। जनजातीय निकायों, ग्राम परिषदों और स्कूलों के सहयोग से सुदूर इलाकों तक जागरूकता अभियान भी संचालित किए गए।
संस्थागत निरीक्षण, विशेष प्रशिक्षण और भविष्य की रूपरेखा
बाल अधिकारों की वास्तविक स्थिति परखने के लिए आयोग ने बाल देखरेख संस्थानों, संप्रेक्षण गृहों, विशेष गृहों और शैक्षणिक संस्थानों का नियमित निरीक्षण किया। पुलिसकर्मियों को किशोर न्याय और पॉक्सो अधिनियम के प्रावधानों के प्रति संवेदनशील बनाने के लिए राज्य और जिला स्तर पर सघन प्रशिक्षण सत्र आयोजित किए गए। इसके साथ ही मीडिया बिरादरी के लिए बाल-अनुकूल रिपोर्टिंग और बच्चों की पहचान सुरक्षित रखने पर विशेष कार्यशालाएं भी आयोजित की गईं। पूर्वोत्तर क्षेत्र में बाल अधिकारों के संयुक्त रोडमैप के तहत आयोग ने अरुणाचल प्रदेश के तवांग में आयोजित समागम में भाग लेकर तवांग घोषणापत्र तैयार करने में भी सक्रिय भूमिका निभाई।
भविष्य की कार्ययोजना साझा करते हुए आयोग ने अदालतों और थानों में बाल-अनुकूल कक्ष स्थापित करने पर जोर दिया ताकि कानूनी प्रक्रियाओं के संपर्क में आने वाले बच्चों को भयमुक्त माहौल मिल सके। आने वाले दिनों में सभी जिलों में बाल तस्करी की रोकथाम, नशा मुक्ति, डिजिटल सुरक्षा और दिव्यांग बच्चों के अधिकारों के प्रति स्थानीय समुदायों व प्रशासनिक तंत्र को और अधिक जागरूक करने का अभियान जारी रखा जाएगा।



















