महाराष्ट्र सरकार ने मुंबई पुलिस की माउंटेड पुलिस यूनिट को अधिक सक्षम और मजबूत बनाने की दिशा में एक अहम कदम उठाया है। राज्य के गृह विभाग की ओर से 4 सितंबर 2026 को इस संबंध में एक आधिकारिक शासन निर्णय जारी किया गया है, जिसके तहत यूनिट के भीतर 70 नए 'अश्वारोही खिलाड़ी' पद तैयार करने की मंजूरी दी गई है।
पदों का होगा पुनर्गठन
इस पूरी प्रक्रिया के तहत पुलिस विभाग के कुल स्वीकृत पदों की संख्या में किसी प्रकार की बढ़ोतरी नहीं की जाएगी। योजना के मुताबिक, बृहन्मुंबई के पुलिस आयुक्त की स्थापना के तहत वर्तमान में काम कर रहे 70 पदों को सरकार को सौंपा जाएगा। इसके बदले में बिल्कुल समान वेतनमान के आधार पर 70 नए पद अश्वारोही खिलाड़ी संवर्ग के अंतर्गत सृजित किए जाएंगे, जिससे मौजूदा व्यवस्था का केवल पुनर्गठन होगा।
इस तरह आगे बढ़ा प्रस्ताव
इस बदलाव के पीछे बृहन्मुंबई के पुलिस आयुक्त कार्यालय की ओर से भेजा गया एक प्रस्ताव मुख्य रूप से शामिल था। इस प्रस्ताव में यह मांग उठाई गई थी कि माउंटेड पुलिस यूनिट के लिए पहले से कार्यरत पदों को समर्पित कर दिया जाए और उनके स्थान पर अश्वारोही खिलाड़ियों के लिए नए पदों का गठन किया जाए।
उच्चस्तरीय समिति की मुहर
इस प्रस्ताव पर विचार करने के लिए 6 जुलाई 2026 को मुख्य सचिव की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय सचिव समिति की बैठक का आयोजन किया गया था। इसी बैठक में इस प्रस्ताव पर अपनी सहमति दी गई, जिसके बाद गृह विभाग ने औपचारिक तौर पर शासन निर्णय जारी करने की प्रक्रिया पूरी की।
नियम और संसाधनों की सीमाएं
सरकार की तरफ से जारी निर्देशों में यह भी स्पष्ट किया गया है कि इस माउंटेड पुलिस यूनिट के लिए अलग से सेवा प्रवेश नियम बनाए जाएंगे। इसके अलावा यह भी साफ कर दिया गया है कि परिशिष्ट में निर्धारित किए गए इन 70 पदों के अलावा कोई भी नया अतिरिक्त पद नहीं बनाया जाएगा और न ही इस यूनिट के लिए कोई अतिरिक्त धनराशि उपलब्ध कराई जाएगी।
घोड़ों के रखरखाव और देखभाल को लेकर भी शासन निर्णय में खास दिशा-निर्देश दिए गए हैं। इसके तहत घोड़ों के स्वास्थ्य, उनके खान-पान और अस्तबल से जुड़ी सभी व्यवस्थाओं को केवल पहले से उपलब्ध संसाधनों के माध्यम से ही मैनेज करना होगा।
यूनिट की बढ़ेगी कार्यक्षमता
सरकार के इस बड़े फैसले के बाद अब मुंबई पुलिस की माउंटेड यूनिट में विशेष रूप से अश्वारोही खिलाड़ियों की नियुक्तियों का रास्ता पूरी तरह से साफ हो गया है। प्रशासनिक हलकों में यह माना जा रहा है कि इस कदम से यूनिट की कार्यकुशलता और प्रशासनिक संचालन क्षमता में उल्लेखनीय सुधार देखने को मिलेगा।


















