देश की राजधानी स्थित नई दिल्ली रेलवे स्टेशन को आने वाले दशकों की परिवहन आवश्यकताओं के अनुसार आधुनिक रूप देने की विस्तृत प्रक्रिया धरातल पर तेज हो गई है। करीब 2500 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत वाले इस पुनर्विकास अभियान के तहत स्टेशन के पुराने ढांचे को चरणबद्ध तरीके से हटाकर नए बुनियादी ढांचे का निर्माण किया जा रहा है। प्रतिदिन लगभग 5 लाख यात्रियों की आवाजाही संभालने वाले और 350 से 400 ट्रेनों के संचालन का केंद्र बने इस 65 साल पुराने रेलवे परिसर में विश्व के सबसे बड़े रूट रिले इंटरलॉकिंग सिस्टम की व्यवस्था मौजूद है। यात्रियों के भारी दबाव को व्यवस्थित करने तथा परिसर को भविष्य के अनुकूल बनाने के लिए दोनों छोरों पर व्यापक सिविल वर्क चल रहा है।
पहाड़गंज छोर पर बुनियादी ढांचा तैयार करने की प्रक्रिया
स्टेशन के पहाड़गंज प्रवेश द्वार वाले हिस्से में पुरानी इमारतों के बड़े भाग को ढहाने और मलबे को साफ करने का चरण पूरा कर लिया गया है। पुराने निर्माण को पूरी तरह हटाए जाने के पश्चात जमीन के स्तर पर व्यापक खुदाई का काम संपन्न हो चुका है। अब निर्माण स्थल पर कंक्रीट ढलाई और नए भवन के लिए नींव तैयार करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। एक बड़े भूभाग में स्टील और सरियों का सघन जाल बिछाया जा चुका है ताकि आगामी बहुमंजिला ढांचे को ठोस आधार मिल सके। निर्माण के दौरान इस बात का विशेष ध्यान रखा जा रहा है कि स्टेशन परिसर के ठीक नीचे से दिल्ली मेट्रो की भूमिगत सुरंगें निकल रही हैं, जिसके कारण भारी मशीनरी और निर्माण गतिविधियों को सुरक्षा के कड़े मानकों के साथ संचालित किया जा रहा है।
प्लेटफॉर्म व्यवस्था और ट्रेनों के संभावित बदलाव
पहाड़गंज की तरफ से प्लेटफॉर्म संख्या 1 की ओर जाने वाले पहुंच मार्ग पर निर्माण गतिविधियां तेजी से आगे बढ़ रही हैं। वर्तमान में प्लेटफॉर्म संख्या 3 के आसपास और भूमिगत हिस्सों में भी बुनियादी ढांचे को तैयार किया जा रहा है। निर्माण के इस सघन दौर में भी स्टेशन पर यात्री सुविधाएं नियमित रूप से चालू रखी गई हैं। व्यापक निर्माण कार्य की गति को देखते हुए यह संभावना भी जताई जा रही है कि आने वाले समय में भीड़भाड़ को नियंत्रित करने के लिए कुछ ट्रेनों का प्रस्थान और ठहराव नई दिल्ली स्टेशन के बजाय शहर के अन्य रेलवे स्टेशनों पर स्थानांतरित किया जा सकता है। परिसर में चल रहे भारी निर्माण कार्यों को देखते हुए सफर करने वाले लोगों के लिए तय प्रस्थान समय से कम से कम 1 घंटा पहले पहुंचना बेहतर रहेगा।
अजमेरी गेट विस्तार और चार चरणों की कार्ययोजना
स्टेशन के दूसरी तरफ स्थित अजमेरी गेट और प्लेटफॉर्म संख्या 16 के निकटवर्ती क्षेत्र में भी पुनर्विकास का काम समानांतर रूप से चल रहा है। यह संपूर्ण योजना चार अलग-अलग चरणों में पूरी की जाएगी, जिसके पहले चरण के तहत प्लेटफॉर्म संख्या 1 से लेकर 5 तक के पूरे खंड पर विशेष ध्यान केंद्रित किया जा रहा है। पूरी परियोजना के अंतर्गत स्टेशन परिसर में लगभग 2.20 लाख वर्ग मीटर क्षेत्र में नई मुख्य इमारत विकसित की जाएगी, जो करीब 7 मंजिला होगी। पहाड़गंज और अजमेरी गेट दोनों ही दिशाओं में आधुनिक दो नई इमारतों का निर्माण होगा, जिनमें सुसज्जित प्रतीक्षालय, आधुनिक लिफ्ट, एस्केलेटर तथा खुदरा व्यावसायिक दुकानें शामिल होंगी।
यातायात कनेक्टिविटी, सुरक्षा और वाणिज्यिक सुविधाएं
आसपास के इलाकों में लगने वाले भारी जाम से निपटने के लिए स्टेशन के चारों ओर सात नए फ्लाईओवर और दो विशेष टनल बनाई जानी प्रस्तावित हैं। यात्रियों के वाहनों को बिना किसी रुकावट के प्रवेश और निकास द्वारों तक ले जाने के लिए स्टेशन को भविष्य में सीधे एलिवेटेड रोड नेटवर्क से जोड़ा जाएगा। स्टेशन परिसर में पर्यावरण अनुकूल सोलर ऊर्जा संयंत्र, उच्च गुणवत्ता वाले CCTV कैमरे और एक्सेस कंट्रोल सिस्टम से युक्त आधुनिक सुरक्षा ढांचा स्थापित होगा। वाहनों के सुगम ठहराव के लिए पहाड़गंज की ओर 40 बसों और अजमेरी गेट की तरफ 50 बसों की पार्किंग के साथ-साथ डेढ़ हजार कारों की क्षमता वाली मल्टीलेवल पार्किंग भी तैयार की जाएगी। इसके अतिरिक्त स्टेशन क्षेत्र के भीतर वाणिज्यिक कार्यालय, बैंक, शॉपिंग मॉल और रेस्टोरेंट जैसी नागरिक सुविधाएं भी उपलब्ध कराई जाएंगी।




















