बराबरी और साझेदारी का नया दौर, करवा चौथ पर पतियों के उपवास रखने की अनूठी परंपराडिजिटल अरेस्ट और साइबर ठगी पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, बैंक की लापरवाही पर पीड़ितों को मुआवजा दिलाने की तैयारीपहाड़ी धाम की थाली का गौरव: बिना प्याज़-टमाटर ऐसे तैयार करें क्रीमी और सुगंधित हिमाचली चना मदराबिहार के ऐतिहासिक प्रतीकों को कबाड़ से जीवंत बना रहे भोजपुर के इंजीनियर प्रशांतअमेरिकी चुनाव 2028: चुनावी नतीजों को नकारने वाले कई रिपब्लिकन नेता अटॉर्नी जनरल की दौड़ में शामिलचांदी की कीमतों में जोरदार गिरावट, छह दिनों में 40,000 रुपये तक लुढ़के दामआईआईटी मद्रास ने जारी किया गेट 2027 का पूरा शेड्यूल, रोबोटिक्स समेत नए बदलावों के साथ इस दिन से शुरू होंगे आवेदनआर्मेनिया की संसद में चुनावी वादे पर भिड़े नेता, लाइव प्रसारण के दौरान चले लात-घूंसे और फटे कपड़ेफीफा अंडर-15 विश्व कप में अफगानिस्तान से हारा भारत, अब कजाकिस्तान से टक्करऑनलाइन वित्तीय धोखाधड़ी में बैंक की चूक पर ग्राहकों को पूरा हर्जाना मिले: शीर्ष अदालत
अदालत ने वापस ली पचास हजार रुपये की पेनल्टी, स्टाफ को चाय और समोसा परोसने का दिया निर्देशदिल्ली
24 सित॰ 2026, 6:34 pm (35 दिन पहले)· 3

अदालत ने वापस ली पचास हजार रुपये की पेनल्टी, स्टाफ को चाय और समोसा परोसने का दिया निर्देश

निचली अदालत का आदेश छिपाने पर कंपनी पर पचास हजार रुपये की पेनल्टी लगाई गई थी, जिसे दिल्ली हाईकोर्ट ने बार एसोसिएशन स्टाफ को चाय और समोसा खिलाने की शर्त पर माफ कर दिया.

अदालती कार्यवाहियों में आमतौर पर तीखी बहस और गंभीर कानूनी दांव-पेंच देखने को मिलते हैं, परंतु राष्ट्रीय राजधानी स्थित दिल्ली हाईकोर्ट में एक ऐसा अनोखा वाकया सामने आया जिसने अदालत परिसर के पूरे माहौल को खुशनुमा बना दिया. एक कॉरपोरेट विवाद की सुनवाई के दौरान अदालत ने राहत मांगने आई कंपनी की गंभीर लापरवाही पर पहले भारी आर्थिक पेनल्टी लगाई, लेकिन बाद में माफी की गुहार पर ऐसा अनोखा फैसला सुनाया जिसकी चर्चा वकीलों और न्यायिक गलियारों में हर तरफ हो रही है.

चेक बाउंस विवाद में तथ्य छिपाने की कोशिश

यह पूरा कानूनी विवाद चेक बाउंस से जुड़े एक मामले से पैदा हुआ था. इस प्रकरण में इंदुस बीररा बेवरेजेज नामक फर्म ने अपने खिलाफ चल रहे चेक बाउंस केस को पूरी तरह रद्द करवाने के उद्देश्य से दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी. जब मामले की कानूनी सुनवाई जस्टिस सौरभ बनर्जी की बेंच के समक्ष शुरू हुई, तो पाया गया कि याचिकाकर्ता कंपनी ने पारदर्शी तरीका नहीं अपनाया. कंपनी ने मामले में पूर्व में आए निचली अदालत के एक बेहद महत्वपूर्ण आदेश की जानकारी को जानबूझकर छिपा लिया था, जिससे अदालत के समक्ष पूरा सच नहीं आ पाया था.

ये भी पढ़ें

जस्टिस सौरभ बनर्जी की बेंच ने लगाया था पचास हजार रुपये का हर्जाना

न्यायालय की कार्यवाही में तथ्यों को छिपाने और अलग-अलग मंचों पर परस्पर विरोधी रुख अपनाने पर पीठ ने कड़ा ऐतराज जताया. जस्टिस सौरभ बनर्जी की एकल पीठ ने स्पष्ट टिप्पणी की कि याचिकाकर्ता संस्था अदालत को गुमराह करके अपने पक्ष में अनुचित आदेश हासिल करने का प्रयास कर रही थी. न्यायिक प्रक्रिया के साथ खिलवाड़ करने की इस प्रवृत्ति पर सख्त रुख अपनाते हुए पीठ ने कंपनी पर पचास हजार रुपये की भारी-भरकम कॉस्ट लगा दी थी. कोर्ट ने यह स्पष्ट निर्देश भी जारी किया था कि यह 50,000 रुपये की राशि दिल्ली हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के सोशल सिक्योरिटी एंड वेलफेयर फंड में जमा कराई जानी चाहिए.

पेनल्टी माफी की अर्जी पर सामने आया अनूठा फरमान

लाखों रुपये के कारोबारी लेन-देन और पचास हजार रुपये की इस पेनल्टी के झटके के बाद कंपनी को अपनी विधिक भूल का अहसास हुआ. कंपनी ने अदालत में दोबारा दस्तक दी और लगाए गए जुर्माने को वापस लेने के लिए बाकायदा एक नई माफी याचिका दाखिल की. जस्टिस सौरभ बनर्जी की बेंच ने मामले में कानूनी नरमी तो दिखाई, लेकिन बिना किसी सबक के राहत देने से इनकार कर दिया. पीठ ने पचास हजार रुपये के आर्थिक जुर्माने को निरस्त करने की अर्जी तो स्वीकार कर ली, परंतु इसके स्थान पर एक अनूठा आदेश पारित कर दिया.

एक सप्ताह के भीतर कर्मचारियों को खिलानी होगी चाय और समोसे

अदालत ने अपने आदेश में यह दिलचस्प शर्त रखी कि याचिकाकर्ता कंपनी के वकील को दिल्ली हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के सभी कर्मचारियों को अपने हाथों से गरमा-गरम चाय और समोसे खिलाने होंगे. पीठ ने इस काम को पूरा करने के लिए एक हफ्ते की समयसीमा निर्धारित की और स्पष्ट किया कि कर्मचारियों का यह सत्कार तय अवधि में सुनिश्चित किया जाए. इस मानवीय और अनूठे फैसले ने यह दर्शाया कि अदालतें अनुशासन सिखाने के लिए केवल कड़े आर्थिक दंड का सहारा नहीं लेतीं, बल्कि कई बार ऐसे हल्के-फुल्के और सद्भाव भरे आदेश भी देती हैं जो माहौल को सहज बना देते हैं. अब कानूनी हलकों में इस आदेश की जमकर चर्चा हो रही है.

सवाल-जवाब

दिल्ली हाईकोर्ट ने किस मामले में पचास हजार रुपये का जुर्माना लगाया था?
इंदुस बीररा बेवरेजेज द्वारा चेक बाउंस मामले में निचली अदालत का अहम आदेश छिपाने पर कोर्ट ने यह जुर्माना लगाया था.
यह फैसला किस जज की बेंच ने सुनाया?
यह आदेश दिल्ली हाईकोर्ट में जस्टिस सौरभ बनर्जी की एकल पीठ ने सुनाया.
जुर्माने की राशि किस फंड में जमा कराने का निर्देश दिया गया था?
कोर्ट ने 50,000 रुपये की राशि दिल्ली हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के सोशल सिक्योरिटी एंड वेलफेयर फंड में जमा कराने का आदेश दिया था.
अदालत ने जुर्माना माफ करते हुए क्या अनोखी शर्त रखी?
कोर्ट ने कंपनी के वकील को दिल्ली हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के सभी कर्मचारियों को अपने हाथों से चाय और समोसे खिलाने का निर्देश दिया.
इस अनोखे निर्देश को पूरा करने के लिए अदालत ने कितना समय दिया है?
अदालत ने बार एसोसिएशन के कर्मचारियों को चाय और समोसा खिलाने के लिए एक सप्ताह की समयसीमा तय की है.
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 5

Riya Menon@riya-menon·35 दिन पहले

अदालत का यह अंदाज़ वाकई मजेदार है! जुर्माने के बजाय चाय-समोसे की शर्त से सबका दिल खुश हो गया।

Karan Malhotra@karan-malhotra·35 दिन पहले

समोसे और चाय से क्या ही सबक मिलेगा, जुर्माना ही ठीक था।

Meera Joshi@meera-joshi·35 दिन पहले

करण, बात तो सही है आपकी, लेकिन क्या सच में वकीलों को चाय-समोसा खिलाने से कोई अगली बार कोर्ट में सच छिपाने से डरेगा?

Arjun Mehta@arjun-mehta·35 दिन पहले

50 हज़ार की पेनल्टी की जगह सीधे चाय-समोसा खिलाने की शर्त! अदालत का ये अंदाज़ वाकई गजब है।

Rohan Verma@rohan-verma·35 दिन पहले

अरे वाह! पैसे वसूलने की बजाय चाय-समोसे की ऐसी सजा हो तो वकीलों और कोर्ट स्टाफ की भी मौज है। उत्तर प्रदेश की अदालतों में भी ऐसी हल्की-फुल्की और अनोखी सजाओं का दौर शुरू होना चाहिए ताकि कड़क कचहरी के माहौल में थोड़ा सुकून मिल सके।

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR
Chamar no WhatsApp