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आगरा की जर्जर इमारत में छिपी है शहीद भगत सिंह की क्रांतिकारी विरासतउत्तर प्रदेश
8 जुल॰ 2026, 9:32 pm (112 दिन पहले)· 4

आगरा की जर्जर इमारत में छिपी है शहीद भगत सिंह की क्रांतिकारी विरासत

उत्तर प्रदेश के आगरा शहर में एक ऐसी ऐतिहासिक इमारत मौजूद है जहां शहीद भगत सिंह ने छिपकर आजादी की योजनाएं बनाई थीं और यहीं बम बनाने का काम हुआ था। आज यह स्थान उपेक्षा का शिकार होकर एक खंडहर में तब्दील हो चुका है।

आगरा अपनी मुगलकालीन वास्तुकला और विश्व प्रसिद्ध स्मारकों के लिए जाना जाता है, लेकिन इस शहर का एक गौरवशाली अध्याय भारतीय स्वतंत्रता संग्राम से भी गहराई से जुड़ा है। कम ही लोग जानते हैं कि आगरा की गलियों ने उन क्रांतिकारियों को शरण दी थी जिन्होंने देश को आजाद कराने की कसम खाई थी। शहर के नूरी दरवाजा इलाके में एक ऐसी इमारत आज भी मौजूद है जिसे लोग भगत सिंह द्वार के नाम से जानते हैं। कभी यह स्थान क्रांतिकारियों की गुप्त गतिविधियों का केंद्र हुआ करता था, लेकिन आज यह जर्जर हाल में है और खंडहर का रूप ले चुका है।

क्रांतिकारियों का सुरक्षित ठिकाना

इतिहासकार डॉ. भानु प्रताप सिंह के अनुसार, नूरी दरवाजा स्थित यह गुप्त इमारत एक ऐसा केंद्र थी जहां भगत सिंह और उनके क्रांतिकारी साथी छात्र बनकर रहा करते थे। उस दौरान वे छद्म वेश में यहां रहकर अपनी गुप्त रणनीतियां तैयार किया करते थे। यह वही ऐतिहासिक स्थान है जहां यतींद्र नाथ दास और उनके सहयोगियों ने उस बम को तैयार किया था, जिसे 8 अप्रैल 1929 को दिल्ली की सेंट्रल असेंबली में फेंका गया था। इसके अलावा, हिंदुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन के सेनापति चंद्रशेखर आज़ाद भी यहां गुप्त रूप से रुकते थे, जहां उन्होंने बलराज नाम का उपयोग किया था।

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प्रशिक्षण और बम टेस्टिंग की कहानी

आगरा के पास स्थित कीठम और कैलाश के जंगलों में क्रांतिकारी अपनी युद्ध कला को निखारते थे। चंद्रशेखर आज़ाद इन जंगलों में अपने साथियों को हथियारों के इस्तेमाल और निशानेबाजी की बारीकियां सिखाते थे। भगत सिंह और उनके अन्य साथी इसी इलाके की एकांत जगहों पर अपने द्वारा बनाए गए बमों का परीक्षण किया करते थे, ताकि असेंबली में फेंके जाने वाले बमों की सटीकता और प्रभाव की जांच की जा सके।

सुरक्षा के लिए थी तीन गुप्त निकास द्वार

स्थानीय निवासी मदन सिंह बताते हैं कि क्रांतिकारियों ने इस विशेष इमारत को अपनी गतिविधियों के लिए इसलिए चुना था क्योंकि इसमें सुरक्षा की बेहतरीन व्यवस्था थी। इस बिल्डिंग में कुल तीन गुप्त रास्ते थे, जिनका इस्तेमाल आपात स्थिति में बाहर निकलने के लिए किया जाता था। जब भी ब्रिटिश पुलिस या अंग्रेजी फौज का छापा पड़ता, तो क्रांतिकारी इन्हीं गुप्त रास्तों से आसानी से बच निकलते थे। यह बनावट उन्हें पकड़े जाने से बचाने में अत्यंत मददगार साबित होती थी।

म्यूजियम बनाने की मांग

आज इस स्थान पर शहीद भगत सिंह की एक प्रतिमा स्थापित है। स्थानीय निवासी हर साल उनके जन्मदिन पर यहां इकट्ठा होते हैं और उन्हें श्रद्धांजलि देते हैं। हालांकि, मदन सिंह और अन्य स्थानीय लोगों की मांग है कि सरकार इस ऐतिहासिक धरोहर को बचाए और इसका जीर्णोद्धार करे। उनका कहना है कि इस इमारत को एक भव्य म्यूजियम के रूप में विकसित किया जाना चाहिए ताकि भविष्य की पीढ़ी को देश के उन महान क्रांतिकारियों के संघर्ष और उनके द्वारा दिए गए बलिदान की पूरी जानकारी मिल सके।

सवाल-जवाब

शहीद भगत सिंह आगरा में कहां रहते थे?
भगत सिंह नूरी दरवाजा स्थित एक गुप्त इमारत में छात्र का भेष बदलकर रहते थे।
सेंट्रल असेंबली में बम कहां बनाया गया था?
8 अप्रैल 1929 को दिल्ली की सेंट्रल असेंबली में फेंका गया बम आगरा की इसी इमारत में यतींद्र नाथ दास और उनके साथियों द्वारा तैयार किया गया था।
चंद्रशेखर आज़ाद किस नाम से यहां रहते थे?
चंद्रशेखर आज़ाद इस इमारत में बलराज नाम का उपयोग कर गुप्त तरीके से रहते थे।
इमारत में सुरक्षा के लिए क्या खास था?
इस इमारत में बाहर निकलने के तीन गुप्त रास्ते थे, जिनका उपयोग पुलिस के आने पर क्रांतिकारियों द्वारा बचने के लिए किया जाता था।
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