एंथ्रोपिक के आईपीओ दस्तावेजों से खुलासे, जानें कैसे बना रही है अपने कस्टमर्स को लॉयलबाराबंकी का पौराणिक पारिजात वृक्ष बना शिव भक्तों का केंद्र, भगवान शिव को चढ़ाए जाते हैं इसके सुनहरे फूलवर्ल्ड अंडर-19 बॉक्सिंग में आदित्य का कमाल, खिताबी मुकाबले में पक्की की जगहऐप्पल का फोल्डेबल फोन मार्केट में आते ही विवादों में, स्क्रीन टूटने की शिकायतों के बीच आईफिक्सिट ने खोली सच्चाईअनुराधा पौडवाल ने चरम कामयाबी के बीच क्यों छोड़ दी थी फिल्मी दुनियामौत के बाद अब खाद बनेगा इंसानी शरीर, ऑस्ट्रेलिया के इस राज्य ने दी अनोखी कानूनी मंजूरीसोने की चाल 4,000 डॉलर के पास अटकी, सिस्टमैटिक बिकवाली के बीच केंद्रीय बैंकों की खरीदारी ने संभाला मोर्चाईसीबी की नीतिगत बैठक और फ्रांस के बॉन्ड संकट के बीच वैश्विक मुद्रा बाजारों में हलचलरजनीकांत की 'जेलर 2' ने 12वें दिन पार किया 400 करोड़ का आंकड़ा, बनी सबसे बड़ी तमिल फिल्मअरुणाचल सीमा विवाद पर बीजिंग की प्रतिक्रिया, भारत से सहयोग की अपील
आईआईटी बॉम्बे छात्र खुदकुशी मामले में प्रोफेसर सूर्यनारायण दुल्ला का पुराना ईमेल सामने आया, कैंपस में भेदभाव रोकने की दी थी सीखमहाराष्ट्र
23 सित॰ 2026, 12:43 pm (34 दिन पहले)· 1

आईआईटी बॉम्बे छात्र खुदकुशी मामले में प्रोफेसर सूर्यनारायण दुल्ला का पुराना ईमेल सामने आया, कैंपस में भेदभाव रोकने की दी थी सीख

आईआईटी बॉम्बे के छात्र साहिल वाकोडे की खुदकुशी के बाद मुंबई क्राइम ब्रांच की जांच जारी है। इस बीच आरोपी बनाए गए प्रोफेसर सूर्यनारायण दुल्ला का जुलाई 2024 का एक पुराना ईमेल सामने आया है, जिसमें उन्होंने विद्यार्थियों को जाति और रैंक पूछने से मना किया था।

भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान बॉम्बे के छात्र साहिल वाकोडे की मौत के मामले में पुलिस की पड़ताल लगातार आगे बढ़ रही है। इस घटना की तहकीकात कर रही मुंबई क्राइम ब्रांच की टीम ने संस्थान के कई अन्य विद्यार्थियों से पूछताछ की है और उनके आधिकारिक बयान कलमबद्ध किए हैं। जांच अधिकारियों ने विशेष रूप से परीक्षा कक्ष में उपस्थित रहे सहपाठियों और साहिल के करीबी मित्रों से बातचीत करके उस समय के हालात को समझने का प्रयास किया है। साहिल के परिजनों ने इस दुखद कदम के लिए संस्थान के प्रोफेसर सूर्यनारायण दुल्ला को सीधे तौर पर जिम्मेदार ठहराते हुए गंभीर आरोप लगाए हैं, जिसके आधार पर अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति अत्याचार निवारण कानून के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है और प्रोफेसर को अनिवार्य अवकाश पर भेज दिया गया है।

जांच के बीच चर्चा का केंद्र बना जुलाई 2024 का संदेश

इस पूरे घटनाक्रम और कानूनी कार्रवाई के बीच प्रोफेसर सूर्यनारायण दुल्ला द्वारा पूर्व में विद्यार्थियों को भेजा गया एक आधिकारिक ईमेल सार्वजनिक चर्चा में आ गया है। यह संवाद 27 जुलाई 2024 की तारीख का है, जब प्रोफेसर दुल्ला संस्थान में डीन ऑफ स्टूडेंट अफेयर्स के प्रशासनिक पद पर सेवाएं दे रहे थे। उस समय उन्होंने पूरे छात्र समुदाय को संबोधित करते हुए एक विस्तृत परामर्श जारी किया था। इस संदेश का मुख्य उद्देश्य संस्थान के भीतर किसी भी प्रकार के सामाजिक या व्यक्तिगत स्तर पर होने वाले अनुचित व्यवहार पर रोक लगाना था।

ये भी पढ़ें

जाति, प्रवेश श्रेणी और परीक्षा रैंक पूछने पर लगाई थी रोक

उस ईमेल में प्रोफेसर दुल्ला ने विद्यार्थियों को सख्त परामर्श दिया था कि वे अपने किसी भी सहपाठी से उसकी जाति, जन्म स्थान, दाखिले की श्रेणी, जेईई एडवांस्ड की रैंक या गेट परीक्षा के अंकों के बारे में अनावश्यक पूछताछ न करें। प्रोफेसर का कहना था कि कई बार छात्र केवल साधारण उत्सुकता या बातचीत शुरू करने के इरादे से ऐसे सवाल पूछ लेते हैं, लेकिन यह जिज्ञासा अनजाने में ही साथी विद्यार्थी के प्रति पूर्वाग्रह, हीन भावना या भेदभावपूर्ण वातावरण को जन्म दे देती है। इसलिए संस्थान की अकादमिक व्यवस्था में इस तरह के व्यक्तिगत प्रश्नों से पूरी तरह बचना आवश्यक बताया गया था।

संवेदनशील विषयों और डिजिटल सामग्री को लेकर दी थी चेतावनी

प्रोफेसर ने परिसर के भीतर आपसी बातचीत में गरिमा और संवेदनशीलता बनाए रखने पर विशेष जोर दिया था। उन्होंने छात्रों को स्पष्ट रूप से सचेत किया था कि धर्म, लिंग, सामाजिक पहचान अथवा किसी व्यक्ति के लैंगिक रुझान को लेकर अनुचित टिप्पणियां बिल्कुल न की जाएं। इसके अलावा, विद्यार्थियों को जातिवादी, सांप्रदायिक, महिला विरोधी या किसी की सेक्शुअल ओरिएंटेशन का मजाक उड़ाने वाले संदेश, चुटकुले या अन्य आपत्तिजनक डिजिटल सामग्री को साझा या आगे भेजने से पूरी तरह दूर रहने का निर्देश दिया गया था। ईमेल में यह भी साफ किया गया था कि ऐसी गतिविधियां शैक्षणिक माहौल को विषाक्त बनाती हैं और ऐसा करने वालों के खिलाफ संस्थान कड़ा अनुशासनात्मक कदम उठा सकता है।

मौजूदा आरोपों के बीच ईमेल के मायने

यह पुराना पत्राचार ऐसे दौर में फिर से सामने आया है जब प्रोफेसर दुल्ला स्वयं छात्र के माता-पिता की ओर से लगाए गए गंभीर आरोपों और आपराधिक जांच का सामना कर रहे हैं। उस दौर में डीन के रूप में उनका भेजा गया यह पत्र दर्शाता है कि संस्थान के स्तर पर जातिगत और सामाजिक संवेदनशीलता को बढ़ावा देने के लिए औपचारिक दिशा-निर्देश जारी किए गए थे, जबकि वर्तमान में उन पर लगे आरोपों की सच्चाई जानने के लिए पुलिस साक्ष्य और गवाहों के बयानों का विश्लेषण कर रही है।

सवाल-जवाब

साहिल वाकोडे मामले में मुंबई क्राइम ब्रांच किन लोगों के बयान दर्ज कर रही है?
मुंबई क्राइम ब्रांच की टीम ने परीक्षा कक्ष में मौजूद विद्यार्थियों और साहिल के दोस्तों के बयान दर्ज किए हैं।
आईआईटी बॉम्बे के प्रोफेसर सूर्यनारायण दुल्ला पर क्या कानूनी कार्रवाई हुई है?
साहिल के माता-पिता के आरोपों के बाद उनके खिलाफ एससी/एसटी एक्ट में केस दर्ज किया गया है और उन्हें छुट्टी पर भेज दिया गया है।
प्रोफेसर सूर्यनारायण दुल्ला का पुराना ईमेल किस तारीख का है?
यह ईमेल 27 जुलाई 2024 को भेजा गया था, जब वे संस्थान में डीन ऑफ स्टूडेंट अफेयर्स के पद पर तैनात थे।
जुलाई 2024 के ईमेल में छात्रों को क्या न पूछने की हिदायत दी गई थी?
ईमेल में छात्रों को किसी साथी से उसकी जाति, जन्म श्रेणी, जेईई एडवांस्ड रैंक या गेट स्कोर पूछने से बचने की सलाह दी गई थी।
ईमेल में किस प्रकार के डिजिटल संदेशों पर रोक लगाने की बात कही गई थी?
ईमेल में जातिवादी, धार्मिक, महिला विरोधी और सेक्शुअल ओरिएंटेशन से जुड़े आपत्तिजनक चुटकुलों व संदेशों को शेयर करने पर मनाही की गई थी।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 5

Rajesh Kumar@rajesh-kumar·32 दिन पहले

जो प्रोफेसर खुद ईमेल लिखकर भेदभाव रोकने की बातें सिखा रहे थे, आज उन्हीं पर एससी-एसटी एक्ट के तहत केस दर्ज हो गया है। मामला बेहद गंभीर है और पुलिस जांच से ही सच्चाई सामने आएगी कि कैंपस के भीतर असल में क्या चल रहा था।

Ravikash Gupta@ravikash·32 दिन पहले

आईआईटी के दिनों का एक दोस्त आज भी अपनी रैंक और जाति छुपाकर रखता था। कैंपस में ये बातें इतनी डरावनी बन जाती हैं कि घुटन होने लगती है।

Amit Patel@amit-patel·32 दिन पहले

रविकेश, आपकी बात से पूरी तरह सहमत होना मुश्किल है। क्या वाकई सिर्फ एक ईमेल या रैंक पूछने से कैंपस का ऐसा माहौल बन जाता है कि कोई जान दे दे? मुझे इसमें कुछ और कमी लगती है।

Rohan Verma@rohan-verma·33 दिन पहले

जुलाई 2024 के उस ईमेल में प्रोफेसर ने खुद ही जाति और रैंक न पूछने की बात कही थी, और आज उन्हीं पर एससी-एसटी एक्ट का मामला दर्ज है। विडंबना देखिए कि नियम बनाने वाले ही घेरे में आ गए।

Karan Malhotra@karan-malhotra·33 दिन पहले

रोहन, बात बिल्कुल सही है। ऐसी ही एक यूनिवर्सिटी में मैंने खुद देखा था कि जब सीनियर डीन ऐसे नियम बनाते थे, तब भी हॉस्टल के कमरों में पीछे से वही सब बातें चलती रहती थीं।

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR
Chamar no WhatsApp