देश के तेजी से विस्तार ले रहे विमानन उद्योग में व्यापार सुगमता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से सुरक्षा और मंजूरी प्रक्रियाओं में बड़े प्रशासनिक सुधार किए गए हैं। नागरिक उड्डयन सुरक्षा ब्यूरो (BCAS) द्वारा तैयार की गई इस नई प्रणाली के तहत अब विभिन्न हवाईअड्डों पर कार्यरत संस्थाओं को हर श्रेणी के काम के लिए अलग-अलग सुरक्षा मंजूरी लेने के पुराने झंझट से मुक्ति मिल जाएगी। अब केवल एक सुरक्षा मंजूरी हासिल करने पर वह कुल 9 अलग-अलग कार्य श्रेणियों के लिए पूरी तरह वैध मानी जाएगी। इसके साथ ही इस मंजूरी की समयसीमा भी 5 साल निर्धारित की गई है, जिससे सेवा प्रदाताओं को बार-बार नवीनीकरण की कागजी प्रक्रियाओं में नहीं उलझना पड़ेगा।
मंजूरी व्यवस्था का सरलीकरण और क्षेत्रीय स्तर पर संवाद
नियमों में इन व्यावहारिक तब्दीलियों की जानकारी देते हुए BCAS के महानिदेशक राजेश निर्वाण ने स्पष्ट किया कि इन सुधारों का प्रमुख ध्येय प्रक्रियात्मक जटिलताओं को घटाना और आवेदनों के निपटारे में लगने वाले समय में प्रभावी कटौती करना है। अधिकारियों के अनुसार यह एकल सुरक्षा मंजूरी सभी संबंधित श्रेणियों पर समान रूप से लागू रहेगी और इसका दायरा किसी एक विशेष अनुबंध या सीमित श्रेणी तक सीमित नहीं रहेगा। आवेदकों तथा विभिन्न कंपनियों की व्यावहारिक परेशानियों को मौके पर ही सुलझाने के मकसद से BCAS के सभी क्षेत्रीय कार्यालयों में मंगलवार को ओपन हाउस सत्रों का आयोजन भी आरंभ कर दिया गया है। इसके जरिए आवेदनकर्ता सीधे सुरक्षा नियामकों से संपर्क साधकर अपनी तकनीकी व कागजी समस्याओं का निवारण करवा सकेंगे।
एकल सुरक्षा मंजूरी के दायरे में आने वाली 9 प्रमुख श्रेणियां
अब तक लागू व्यवस्था के अंतर्गत BCAS हवाईअड्डों पर सेवाएं देने वाली हर इकाई के लिए पृथक रूप से जांच-पड़ताल कर अलग अनुमति जारी करता था। नई व्यवस्था में निम्नलिखित 9 प्रमुख श्रेणियों को एक ही छतरी के नीचे समाहित कर दिया गया है
- अधिकृत एजेंट (ऑथराइज्ड एजेंट)
- ग्राउंड हैंडलिंग सेवाएं
- विमानन कैटरिंग प्रदाता
- रियायतग्राही (कन्सेशनायर)
- विनियमित एजेंट (रेगुलेटेड एजेंट)
- सहायक सेवा प्रदाता (ऑक्जिलरी सर्विस प्रोवाइडर)
- फिक्स्ड बेस्ड ऑपरेटर (FBO)
- निजी सुरक्षा एजेंसियां (प्राइवेट सिक्योरिटी एजेंसी)
- ईंधन आपूर्ति फार्म (फ्यूल फार्म)
इन सभी सेवाओं के लिए अब एकल सुरक्षा अनुमति मान्य होगी जो पूरे 5 साल तक प्रभावी रहेगी। इसके अलावा अनुबंध संबंधी नियमों को भी पहले की तुलना में अधिक लचीला बनाया गया है। यदि किसी कंपनी का अनुबंध समाप्त भी हो जाता है, तो मात्र इस तकनीकी आधार पर उसकी सुरक्षा मंजूरी नहीं रोकी जाएगी, बशर्ते कंपनी ने अपनी वैध अनुबंध अवधि के भीतर ही मंजूरी के लिए औपचारिक आवेदन प्रस्तुत कर दिया हो।
सुरक्षा जांच में तय समयसीमा और व्यावसायिक गतिविधियों में स्वायत्तता
प्रशासनिक देरी को समाप्त करने के लिए सुरक्षा वेटिंग की पूरी प्रक्रिया को भी पुनर्गठित किया गया है। अब फाइलों के निरीक्षण के दौरान बार-बार अलग-अलग आपत्तियां दर्ज करने के बजाय सभी जरूरी स्पष्टीकरण एक ही बार में संयुक्त रूप से मांगे जाएंगे। आवेदनों के निस्तारण के लिए एक निश्चित समयसीमा तय की गई है और देरी वाले सभी लंबित मामलों की निगरानी सीधे वरिष्ठ अधिकारी करेंगे। इससे हवाईअड्डों पर निर्माण कार्यों तथा अन्य बुनियादी विकास परियोजनाओं को गति देने में मदद मिलेगी।
फ्लोर प्लान के अनुमोदन को लेकर भी BCAS ने अपने कार्यक्षेत्र को अधिक व्यावहारिक बनाया है। ब्यूरो अब अपना पूरा ध्यान केवल सुरक्षा और संरक्षा से जुड़े तकनीकी पहलुओं पर केंद्रित रखेगा। वहीं हवाईअड्डे के भीतर व्यावसायिक स्थानों का आवंटन करने, दुकानों की रूपरेखा तय करने और बैठने की व्यवस्था निर्धारित करने जैसे गैर-सुरक्षा मामलों में एयरपोर्ट ऑपरेटरों को पूरी व्यावसायिक स्वतंत्रता दी जाएगी। यदि कोई ऑपरेटर स्वीकृत क्षेत्र के भीतर व्यावसायिक गतिविधि की प्रकृति बदलना चाहता है, तो उसे इसकी पूरी छूट होगी। यानी सुरक्षा से जुड़ा नियंत्रण नियामक के पास रहेगा, जबकि वाणिज्यिक संचालन ऑपरेटर संभालेंगे।
डिजिटल पहल और फेशियल बायोमेट्रिक्स से एयरोड्रोम एंट्री परमिट
नियमों को सरल बनाते हुए कई श्रेणियों में विस्तृत सुरक्षा कार्यक्रम जमा करने की बाध्यता को हटाकर केवल एक स्व-घोषणा पत्र (अंडरटेकिंग) को मंजूरी का आधार बनाया जाएगा। माना जा रहा है कि इस सरल कदम से क्षेत्र की 70 फीसदी से अधिक संस्थाओं को सीधे लाभ पहुंचेगा। इस पूरी प्रक्रिया को सरल टेम्पलेट्स के जरिए e-CAS डिजिटल प्लेटफॉर्म पर ट्रांसफर किया जा रहा है।
इसी क्रम में हवाईअड्डा परिसर में प्रवेश के लिए जरूरी एयरोड्रोम एंट्री परमिट (AEP) को शत-प्रतिशत ऑनलाइन किया जा रहा है। अब तक कर्मियों को फिंगरप्रिंट दर्ज कराने के लिए व्यक्तिगत रूप से दफ्तरों के चक्कर काटने पड़ते थे, जिसे खत्म कर अब चेहरे की पहचान पर आधारित ऑनलाइन फेशियल बायोमेट्रिक्स प्रणाली अपनाई जाएगी। देश भर के हवाईअड्डों पर प्रतिवर्ष करीब 15 लाख AEP जारी होते हैं। इस विशाल कार्यभार को सुचारू बनाने के लिए तैयार किया जा रहा नया डिजिटल पोर्टल अक्टूबर में लाइव होने की पूरी उम्मीद है।
e-CAS 2.0 पर केंद्रीयकृत सेवाएं और विमानन क्षेत्र का विस्तार
सुरक्षा मंजूरी, सुरक्षा ऑडिट और प्रशिक्षण कार्यक्रमों सहित BCAS की सभी आवश्यक सेवाओं को एक एकीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म e-CAS 2.0 पर लाया जा रहा है। इस कदम से आवेदनों की रियल-टाइम ट्रैकिंग, लंबित मामलों की पारदर्शी निगरानी और उत्तरदायी अधिकारियों की जवाबदेही तय हो सकेगी। नागरिक उड्डयन सचिव समीर कुमार सिन्हा ने इस सुधार पर अपनी बात रखते हुए कहा कि मंत्रालय विमानन क्षेत्र में ईज ऑफ डूइंग बिजनेस को सुदृढ़ करने के लिए निरंतर काम कर रहा है और सभी प्रशासनिक समस्याओं का निस्तारण एक निर्धारित समयसीमा में करने के प्रयास किए जा रहे हैं।
यह प्रशासनिक पुनर्गठन देश में तेजी से फैल रहे विमानन क्षेत्र की जरूरतों के सर्वथा अनुकूल है। भारत में वर्ष 2014 के दौरान केवल 74 हवाईअड्डे संचालित थे, जिनकी संख्या जुलाई 2026 तक बढ़कर 165 तक पहुंच चुकी है। वित्तीय वर्ष 2025-26 के दौरान लगभग 42 करोड़ यात्रियों ने हवाई सफर किया, जबकि वर्ष 2035 तक देश के बेड़े में 2,250 से अधिक वाणिज्यिक विमान शामिल होने का अनुमान लगाया गया है। वर्तमान में उड़ान (UDAN) योजना के तहत 679 क्षेत्रीय हवाई मार्ग सक्रिय रूप से संचालित किए जा रहे हैं। सुरक्षा मानकों से कोई समझौता किए बिना अनुपालन के अनावश्यक बोझ को घटाना ही इन सभी सुधारों का मूल मंत्र है, जिससे विमान रखरखाव (MRO) केंद्रों, उड़ान प्रशिक्षण संगठनों और एयरपोर्ट से जुड़ी तमाम सहयोगी संस्थाओं को सुचारू रूप से कार्य करने में सीधी मदद मिलेगी।


















