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आजाद भारत के पहले चुनाव को मुमकिन बनाने वाले गणितज्ञ अफसर सुकुमार सेन की अनकही कहानीभारत
7 अक्तू॰ 2026, 7:21 pm (7 मिनट पहले)· 0

आजाद भारत के पहले चुनाव को मुमकिन बनाने वाले गणितज्ञ अफसर सुकुमार सेन की अनकही कहानी

देश के पहले मुख्य चुनाव आयुक्त सुकुमार सेन ने आजादी के बाद बिना किसी पुराने अनुभव के भारत का पहला और दूसरा आम चुनाव सफलतापूर्वक कराया था।

भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार इन दिनों विवादों के केंद्र में बने हुए हैं, जिसने देश की चुनाव प्रणाली और इसके शीर्ष पद के इतिहास की ओर लोगों का ध्यान खींचा है। जब ब्रिटिश हुकूमत से आजादी मिले भारत को कुछ ही वर्ष बीते थे, तब एक नवजात लोकतांत्रिक राष्ट्र के सामने अपनी पहली चुनी हुई सरकार बनाने की अभूतपूर्व चुनौती खड़ी थी। उस दौर में देश के पास इतने विशाल भौगोलिक क्षेत्र और भारी आबादी के बीच मतदान आयोजित करने का कोई प्रशासनिक अनुभव मौजूद नहीं था। दुनिया भर में इतनी बड़ी आबादी के लिए एक साथ लोकतांत्रिक प्रक्रिया अपनाने की कोई पुरानी मिसाल भी नहीं मिलती थी। ऐसे नाजुक और ऐतिहासिक मोड़ पर पूरी चुनावी प्रक्रिया की नींव रखने की जिम्मेदारी सुकुमार सेन के कंधों पर आई थी।

गणित की पृष्ठभूमि और अकादमिक उत्कृष्टता

सुकुमार सेन का जन्म 2 जनवरी 1898 को हुआ था। उन्होंने अपनी प्रारंभिक और उच्च शिक्षा कोलकाता के प्रतिष्ठित प्रेसिडेंसी कॉलेज से पूरी की और बाद में लंदन के यूनिवर्सिटी कॉलेज में अध्ययन किया। प्रेसिडेंसी कॉलेज में उन्होंने गणित विषय में अपना ग्रेजुएशन पूरा किया था। गणित के क्षेत्र में उनकी असाधारण प्रतिभा और उत्कृष्ट प्रदर्शन के सम्मान में उन्हें आइजक न्यूटन स्कॉलरशिप से भी नवाजा गया था। यह तार्किक और व्यवस्थित सोच आगे चलकर उनके जटिल प्रशासनिक कार्यों में बेहद उपयोगी साबित हुई।

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प्रशासनिक सफर और मुख्य चुनाव आयुक्त का दायित्व

साल 1922 में सुकुमार सेन भारतीय सिविल सेवा यानी आईसीएस में शामिल हुए। ब्रिटिश हुकूमत के दौर में उन्होंने प्रशासनिक ढांचे के भीतर कई अहम जिम्मेदारियां संभालीं। देश को आजादी मिलने के बाद उन्हें पश्चिम बंगाल के मुख्य सचिव का अहम पद सौंपा गया। जब स्वतंत्र भारत में चुनाव आयोग का गठन हुआ, तब 21 मार्च 1950 को उन्होंने देश के पहले मुख्य चुनाव आयुक्त के रूप में कार्यभार ग्रहण किया।

इस अहम संवैधानिक पद के लिए तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के समक्ष सुकुमार सेन के नाम की सिफारिश पश्चिम बंगाल के तत्कालीन मुख्यमंत्री बिधान चंद्र रॉय ने की थी। बिधान चंद्र रॉय का स्पष्ट मानना था कि गणित में दक्ष होने के साथ-साथ सुकुमार सेन एक बेहद अनुशासित, सख्त और निष्पक्ष प्रशासनिक अधिकारी हैं, जो कड़े फैसलों को बिना किसी दबाव के लागू कर सकते हैं। उनके कुशल नेतृत्व में देश ने 1951-52 के पहले आम चुनाव और फिर 1957 के दूसरे आम चुनाव की विशाल प्रक्रिया को पूरी निष्पक्षता से संपन्न किया।

सूडान में चुनाव और राष्ट्रीय सम्मान

सुकुमार सेन की चुनावी प्रबंधन क्षमता केवल भारतीय सीमाओं तक ही सीमित नहीं रही। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उनकी योग्यता को पहचानते हुए साल 1953 में अफ्रीकी देश सूडान के पहले आम चुनाव के आयोजन का दायित्व भी उन्हें सौंपा गया, जहां उन्होंने अंतरराष्ट्रीय चुनाव आयोग के अध्यक्ष के रूप में अपनी भूमिका निभाई।

भारत के लोकतांत्रिक ढांचे की आधारशिला रखने और चुनावी व्यवस्था को सफलतापूर्वक स्थापित करने के अतुलनीय योगदान के लिए भारत सरकार ने साल 1954 में उन्हें पद्म भूषण से सम्मानित किया। वह 19 दिसंबर 1958 को मुख्य चुनाव आयुक्त के पद से सेवानिवृत्त हुए और साल 1963 में उनका निधन हो गया।

सवाल-जवाब

भारत के पहले मुख्य चुनाव आयुक्त कौन थे?
भारत के पहले मुख्य चुनाव आयुक्त आईसीएस अधिकारी सुकुमार सेन थे, जिन्होंने 21 मार्च 1950 को यह पदभार संभाला था।
सुकुमार सेन की उच्च शिक्षा और विषय क्या था?
उन्होंने कोलकाता के प्रेसिडेंसी कॉलेज से गणित में ग्रेजुएशन किया था और लंदन के यूनिवर्सिटी कॉलेज से आगे की पढ़ाई की थी, जिसके लिए उन्हें आइजक न्यूटन स्कॉलरशिप मिली थी।
सुकुमार सेन के नाम का सुझाव प्रधानमंत्री नेहरू को किसने दिया था?
पश्चिम बंगाल के तत्कालीन मुख्यमंत्री बिधान चंद्र रॉय ने प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू को सुकुमार सेन का नाम सुझाया था।
सुकुमार सेन की अगुवाई में भारत में कौन से आम चुनाव संपन्न हुए?
उनकी अगुवाई में भारत का पहला आम चुनाव 1951-52 में और दूसरा आम चुनाव 1957 में संपन्न हुआ था।
सुकुमार सेन ने भारत के अलावा किस देश का पहला चुनाव कराया था?
उन्होंने साल 1953 में अंतरराष्ट्रीय चुनाव आयोग के अध्यक्ष के रूप में अफ्रीकी देश सूडान का पहला आम चुनाव कराया था।
सुकुमार सेन को पद्म भूषण से कब सम्मानित किया गया था?
भारत सरकार ने चुनावी व्यवस्था स्थापित करने में उनके योगदान के लिए साल 1954 में उन्हें पद्म भूषण से सम्मानित किया था।
सुकुमार सेन मुख्य चुनाव आयुक्त पद से कब सेवानिवृत्त हुए थे?
वह 19 दिसंबर 1958 को मुख्य चुनाव आयुक्त के पद से सेवानिवृत्त हुए थे, और साल 1963 में उनका निधन हुआ।
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