गुजरात के गांधीनगर जिले में बड़े पैमाने पर नकली देसी घी बनाने वाले एक गिरोह का पर्दाफाश हुआ है। मंगलवार रात पुलिस और खाद्य सुरक्षा विभाग की संयुक्त टीम ने सांतज जीआईडीसी स्थित रकनपुर गांव में एक विनिर्माण इकाई पर अचानक छापा मारा। इस कार्रवाई के दौरान गजानन फूड प्रोडक्ट्स नामक फैक्ट्री के भीतर वनस्पति फैट, संदिग्ध रासायनिक तत्व और कई प्रतिष्ठित कंपनियों के नकली लेबलों का विशाल जखीरा बरामद हुआ। अधिकारियों ने तुरंत पूरी सामग्री को अपने कब्जे में लेकर जांच शुरू कर दी है।
छापेमारी में 6500 किलोग्राम वनस्पति फैट और केमिकल बरामद
जांच अधिकारियों ने जब फैक्ट्री परिसर की तलाशी ली, तो वहां भारी मात्रा में वनस्पति फैट का भंडारण मिला। तौल और गिनती के बाद कुल 6500 किलोग्राम वनस्पति फैट को सील कर दिया गया। इसके साथ ही मौके पर आरएम वैल्यू एन्हांसर भी पाया गया। विशेषज्ञों के अनुसार, इस रासायनिक पदार्थ का प्रयोग फैट की संरचना और गुणों को बदलकर उसे असली देसी घी जैसा रूप, महक और बनावट देने के लिए किया जाता है। टीम ने परीक्षण के लिए इन सभी सामग्रियों के नमूने एकत्र किए हैं।
पास के गोदाम में छिपाकर रखे गए थे लाखों फर्जी लेबल
फैक्ट्री परिसर के बाद जांच टीम ने पास में ही बने एक अन्य गोदाम की गहन तलाशी ली। वहां जांचकर्ताओं को नामी और लोकप्रिय देसी घी ब्रांड्स के लाखों की संख्या में मुद्रित नकली लेबल मिले। ये रैपर और लेबल विभिन्न आकारों और वजन वाले पैकेटों के लिए तैयार किए गए थे। आश्चर्यजनक तथ्य यह सामने आया कि मुख्य इकाई में वनस्पति फैट से जुड़े नाममात्र के लेबल थे, जबकि अलग गोदाम में बाजार के जाने-माने ब्रांड्स के रैपरों का अंबार लगा था। इससे स्पष्ट संकेत मिलता है कि मिलावटी उत्पाद को नामी ब्रांड्स के पैकेटों में भरकर खुले बाजार में बेचने की तैयारी थी।
लाइसेंस केवल वनस्पति फैट का, मौके पर मिले नामी घी कंपनियों के रैपर
शुरुआती पड़ताल में यह तथ्य सामने आया कि फैक्ट्री संचालकों के पास भारतीय खाद्य संरक्षा एवं मानक प्राधिकरण यानी एफएसएसएआई का वैध लाइसेंस केवल वनस्पति फैट तैयार करने का था। इसके बावजूद परिसर से उन ब्रांड्स के लेबल बरामद हुए, जिनसे फैक्ट्री प्रबंधन ने किसी भी प्रकार के व्यावसायिक संबंध से साफ इनकार कर दिया था। अब पुलिस और प्रवर्तन एजेंसियां इस दिशा में जांच कर रही हैं कि इन नकली रैपरों की छपाई कहां से कराई गई थी और तैयार माल किन-किन शहरों या खुदरा दुकानों तक पहुंचाया जाता था।
एफडीसीए और फोरेंसिक टीम ने जुटाए वैज्ञानिक साक्ष्य
मामले के गंभीर स्वास्थ्य प्रभावों को देखते हुए खाद्य एवं औषधि नियंत्रण प्रशासन तथा फोरेंसिक साइंस लैबोरेटरी की टीमों को फौरन मौके पर बुलाया गया। वैज्ञानिक विशेषज्ञों ने वनस्पति फैट, मिले रसायनों और तैयार उत्पादों के अधिकृत नमूने लिए हैं, जिन्हें विस्तृत रासायनिक विश्लेषण के लिए प्रयोगशाला भेजा गया है। इससे पहले भी गुजरात के सूरत स्थित कामरेज और बनासकांठा के डीसा इलाके में 6,000 लीटर नकली और मिलावटी घी पकड़े जाने की कार्रवाई सामने आ चुकी है।
पूरा स्टॉक जब्त, वितरण नेटवर्क खंगालने में जुटी पुलिस
अधिकारियों ने फैक्ट्री में मौजूद कच्चे माल, मशीनरी के हिस्से और लाखों नकली लेबल्स को जब्त कर सीलिंग की औपचारिकता पूरी कर ली है। अब यह पता लगाया जा रहा है कि इस गिरोह ने अब तक कितनी मात्रा में नकली घी तैयार कर बाजार में खपाया है और इस रैकेट के तार किन थोक व्यापारियों से जुड़े हैं। फॉरेंसिक लैब की रिपोर्ट प्राप्त होते ही मामले में शामिल सभी आरोपियों के खिलाफ सख्त कानूनी धाराओं में आगे की कार्रवाई की जाएगी।



















