जापानी येन को लेकर वैश्विक मुद्रा बाजार में संतुलन तेजी से बदल रहा है। बैंक ऑफ जापान द्वारा नीतिगत दरों में किए जा रहे क्रमिक इजाफे के कारण कैरी ट्रेड के लिए फंडिंग करेंसी के तौर पर जापानी मुद्रा का पारंपरिक आकर्षण कम हो रहा है। इसके बावजूद, हालिया कारोबारी गतिविधियों और डॉलर के मुकाबले येन की धीमी पड़ती गति ने वैकल्पिक फंडिंग मुद्राओं की तलाश से जुड़ी तात्कालिक चिंता को कुछ हद तक शांत कर दिया है। विश्लेषकों का मानना है कि नीतिगत निर्णयों और बॉन्ड प्रतिफल में आने वाले उतार-चढ़ाव ने विदेशी मुद्रा विनिमय के समीकरणों को एक नया मोड़ दिया है।
जुलाई और सितंबर में येन की उठापटक और हस्तक्षेप का असर
विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार में हाल के महीनों के दौरान डॉलर और येन के अनुपात में दो बड़े उतार-चढ़ाव दर्ज किए गए। जुलाई के अंत में जापान के वित्त मंत्रालय और अमेरिकी ट्रेजरी के साझा हस्तक्षेप के चलते मुद्रा जोड़े में जोरदार गिरावट देखी गई थी। इस कदम का सीधा मकसद येन को सहारा देना था, जिसने बाजार के प्रतिभागियों को यह सोचने पर मजबूर कर दिया कि क्या कैरी ट्रेड के लिए किसी अन्य फंडिंग करेंसी का रुख करना चाहिए। इसके बाद सितंबर की शुरुआत में भी इस जोड़ी में तेज गिरावट दर्ज की गई, लेकिन उस समय किसी प्रकार का आधिकारिक हस्तक्षेप नहीं हुआ था। आधिकारिक दखल के बिना आई इस कमजोरी ने इस बहस को और अधिक प्रासंगिक बना दिया था कि क्या येन पर लंबे समय तक निर्भर रहा जा सकता है।
हालांकि, बाद के दिनों में जापानी येन ने अमेरिकी डॉलर के सामने अपनी तेजी की रफ्तार खो दी। इस सुस्त पड़ती गति के कारण वैकल्पिक मुद्राओं को खोजने की चर्चा ठंडी पड़ गई। राबोबैंक की वरिष्ठ एफएक्स रणनीतिकार जेन फोली के अनुसार, जब जुलाई के अंत में जापानी येन के समर्थन में जापान के वित्त मंत्रालय और अमेरिकी ट्रेजरी के बीच साझा हस्तक्षेप के दम पर यूएसडी/जेपीवाई में तेज गिरावट आई, तो इसने कैरी ट्रेड के लिए वैकल्पिक फंडिंग मुद्राओं को लेकर सवाल खड़े कर दिए। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि सितंबर की नीतिगत बैठक में दर वृद्धि की घोषणा के बावजूद, बैंक ऑफ जापान का रुख उतना आक्रामक नहीं रहा जितनी बाजार को उम्मीद थी।
नीतिगत रुख और अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड का सहारा
बैंक ऑफ जापान ने सितंबर की अपनी बैठक में बाजार की अपेक्षाओं के अनुरूप ही ब्याज दरों में बढ़ोतरी की थी। इसके बावजूद केंद्रीय बैंक का आधिकारिक मार्गदर्शन उतना सख्त या आक्रामक नहीं दिखाई दिया, जितना ट्रेडर्स मानकर चल रहे थे। नीतिगत नरमी के संकेतों और बैंक ऑफ जापान की नरम टिप्पणियों के बीच अमेरिकी डॉलर को अपनी बढ़त बनाए रखने में मदद मिली है। इसके साथ ही भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं के दौर में अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में आई नई तेजी ने डॉलर की मांग को फिर से हवा दे दी है।
बुधवार के एशियाई कारोबारी सत्र में यूएसडी/जेपीवाई 158.50 के करीब डेढ़ हफ्ते के उच्च स्तर पर टिका रहा। बाजार में तेजी की उम्मीद कर रहे खरीदार आगे की स्थिति स्पष्ट होने के लिए 200-दिवसीय एसएमए के स्तर को पार करने का इंतजार कर रहे हैं, जबकि सभी की निगाहें आने वाले एफओएमसी मिनट्स पर टिकी हुई हैं। लाइव बाजार आंकड़ों के अनुसार, मुद्रा जोड़ी 158.39 के स्तर पर दर्ज की गई, जबकि इसका पिछला बंद भाव 157.96 रहा था, जो 0.27 प्रतिशत की दैनिक बढ़त दर्शाता है। तकनीकी संकेतकों में 14-दिवसीय आरएसआई 57 के स्तर पर है, एमएसीडी 0.13 और सिग्नल -0.13 पर है जो तेजी का संकेत देता है, जबकि 200-दिवसीय एसएमए 158.52 पर बना हुआ है।
कमोडिटी और अन्य मुद्राओं में दबाव
अमेरिकी डॉलर और बॉन्ड प्रतिफल में दोबारा तेजी लौटने का असर अन्य प्रमुख परिसंपत्तियों और मुद्राओं पर भी साफ देखा गया। ऑस्ट्रेलियाई डॉलर और अमेरिकी डॉलर की जोड़ी अपने हालिया सुधार को बनाए रखने के लिए संघर्ष करती दिखी और बुधवार के एशियाई सत्र में 0.7000 के स्तर से नीचे नकारात्मक रुख के साथ कारोबार करती रही। ऑस्ट्रेलियाई केंद्रीय बैंक की सख्त नीतियों की उम्मीदों के बावजूद मजबूत डॉलर ने इस मुद्रा जोड़ी पर दबाव बनाए रखा। दूसरी तरफ, सोने की कीमतों में लगभग 1.20 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई, क्योंकि निवेशक साल के अंत से पहले ब्याज दरों में एक और बढ़ोतरी की संभावना तलाशने के लिए एफओएमसी मिनट्स का इंतजार कर रहे हैं।
इसके अलावा, यूरोप में नीतिगत मोर्चे पर अलग चुनौतियां उभर रही हैं। आम तौर पर जब मुद्रास्फीति अपने लक्ष्य से दोगुनी रफ्तार से चल रही हो, तो यूरोपीय सेंट्रल बैंक के पास ब्याज दरों में बढ़ोतरी का सीधा रास्ता होता है। लेकिन वर्तमान परिस्थितियां सामान्य नहीं हैं। इस बार बॉन्ड बाजार पहले ही आंशिक सख्ती का काम कर रहा है, जिससे यूरोपीय सेंट्रल बैंक के सामने एक जटिल दुविधा की स्थिति पैदा हो गई है। वैश्विक स्तर पर जोखिम धारणा में भी गिरावट आई है, जहां यूरोपीय शेयर सूचकांकों में बिकवाली गहरी हो गई है और ब्रेंट क्रूड ऑयल 102 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया है।
क्रिप्टो बाजार में मुनाफावसूली और आगे का रुख
डिजिटल परिसंपत्तियों के क्षेत्र में भी बिकवाली का दबाव देखा गया। बिटकॉइन में हाल ही में 87,200 डॉलर के पास आपूर्ति के चलते आई अस्वीकृति के बाद सुधार और गिरावट का दौर शुरू हुआ। ऑल्टकॉइन्स भी व्यापक स्तर पर गिरावट के रुझान में रहे, जहां इथेरियम 2,600 डॉलर के प्रमुख समर्थन स्तर की ओर फिसल गया और रिपल अपने 1.45 डॉलर के मांग क्षेत्र के करीब नीचे की ओर बढ़ता नजर आया। बाजार के तमाम प्रतिभागी अब फेडरल रिजर्व की आगामी बैठकों के ब्योरे और केंद्रीय बैंकों के रुख पर अपनी रणनीति केंद्रित कर रहे हैं।




















