गोरखपुर शहर में बुनियादी नागरिक सुविधाओं के विकास और रखरखाव को लेकर प्रशासनिक स्तर पर लगातार प्रगति के दावे किए जाते रहे हैं। आम जनता की रोजमर्रा की समस्याओं को सीधे तौर पर सुनने और उनके त्वरित निस्तारण के मकसद से नगर निगम परिसर में प्रत्येक मंगलवार को जनसुनवाई का आयोजन किया जाता है। इस साप्ताहिक मंच पर सुबह 10 बजे से दोपहर 2 बजे तक नगर आयुक्त के साथ अन्य वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी मौजूद रहते हैं। वे नागरिकों के प्रार्थना पत्रों की समीक्षा करते हैं और संबंधित विभाग के कर्मचारियों को मौके पर ही कार्रवाई के दिशा-निर्देश जारी करते हैं।
साप्ताहिक मंच पर उमड़ी शहरवासियों की भीड़
इस साप्ताहिक समाधान शिविर में शहर के अलग-अलग वार्डों और मोहल्लों से कई नागरिक अपनी निजी व सार्वजनिक समस्याएं लेकर पहुंचे। सभागार में एकत्र हुए लोगों में से कुछ को विभागीय अधिकारियों की ओर से त्वरित निस्तारण का आश्वासन प्राप्त हुआ, जबकि कई ऐसे नागरिक भी उपस्थित थे जो कई महीनों से लगातार नगर निगम कार्यालय के चक्कर लगाने को मजबूर हैं। प्रशासनिक वादों और जमीनी हकीकत के बीच का यह अंतर लोगों की बातचीत में साफ तौर पर सामने आया।
बांसगांव कॉलोनी में साल भर से सड़क व नाली का संकट
बिलंदपुर स्थित बांसगांव कॉलोनी की निवासी ज्योत्सना मिश्रा अपनी क्षेत्रीय समस्या को लेकर जनसुनवाई में पहुंचीं। उन्होंने बताया कि वह पिछले करीब एक साल से अपनी बस्ती की टूटी सड़क और जल निकासी के लिए जरूरी नाली के निर्माण को लेकर लगातार नगर निगम कार्यालय के चक्कर काट रही हैं। ज्योत्सना मिश्रा के अनुसार, उन्होंने पूर्व में भी कई बार अपनी शिकायतें दर्ज कराई हैं और हर बार उन्हें निर्माण कार्य जल्द पूरा कराने का मौखिक भरोसा दिया गया, किंतु धरातल पर अब तक कोई ठोस प्रगति नहीं हुई है।
सड़क और नाली की यह बदहाली पूरी बांसगांव कॉलोनी के निवासियों के लिए रोजमर्रा की भारी असुविधा का कारण बनी हुई है। बारिश और सामान्य दिनों में भी जलजमाव तथा गड्ढों से आवागमन प्रभावित रहता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि नगर निगम से बार-बार आश्वासन की औपचारिकता तो पूरी कर दी जाती है, मगर जमीनी स्तर पर विकास कार्य शुरू होने का इंतजार खत्म होने का नाम नहीं ले रहा है।
हाउस टैक्स भुगतान के बावजूद लगातार आ रहे नोटिस
जनसुनवाई में केवल निर्माण संबंधी कार्य ही नहीं, बल्कि राजस्व और कर प्रणाली से जुड़ी प्रशासनिक गलतियों के मामले भी सामने आए। जितेंद्र नामक एक स्थानीय नागरिक नगर निगम के कर विभाग की लापरवाही को लेकर अपनी आपत्ति दर्ज कराने पहुंचे। उन्होंने बताया कि अपने आवासीय भवन का हाउस टैक्स पूरी तरह जमा कर देने के बावजूद उन्हें लगातार टैक्स जमा करने के अनुस्मारक यानी रिमाइंडर नोटिस भेजे जा रहे हैं।
जितेंद्र ने स्पष्ट किया कि इस परेशानी को लेकर यह उनकी नगर निगम कार्यालय में पहली उपस्थिति थी। वह मुख्य रूप से यह समझने आए थे कि जब बैंक अथवा निगम के रिकॉर्ड में भुगतान दर्ज हो चुका है, तो फिर से बकाया दर्शाते हुए रिमाइंडर क्यों जारी किया जा रहा है। बार-बार आ रहे इन नोटिसों के कारण उन्हें बेवजह मानसिक परेशानी और समय की बर्बादी का सामना करना पड़ रहा है।
शिकायतों के समयबद्ध निस्तारण पर उठते सवाल
नगर निगम द्वारा प्रत्येक मंगलवार को आयोजित होने वाली यह जनसुनवाई स्थानीय नागरिकों को अपनी बात सीधे उच्चाधिकारियों के समक्ष रखने का एक प्रभावी मंच उपलब्ध कराती है। नगर आयुक्त की मौजूदगी में शिकायतों पर तुरंत संज्ञान लिया जाता है और संबंधित पटल को निस्तारण का आदेश दिया जाता है। इसके बावजूद, महीनों से अटके हुए मामलों की मौजूदगी इस व्यवस्था की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करती है।
जब नागरिक एक साल तक लगातार चक्कर काटने के बाद भी बुनियादी समस्याओं के हल के लिए कतार में खड़े दिखते हैं, तो यह प्रश्न उठना स्वाभाविक है कि शिकायतों के निस्तारण की वास्तविक निगरानी किस स्तर पर की जा रही है। केवल निर्देश जारी करना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि तय समयसीमा के भीतर कितने प्रार्थना पत्रों का वास्तविक समाधान जमीनी स्तर पर हो पाया, इसकी निरंतर समीक्षा ही इस व्यवस्था को सफल बना सकती है।



















