राजस्थान के अजमेर में अल्पसंख्यक विभाग की पोस्टमेट्रिक छात्रवृत्ति राशि में बड़े स्तर पर हुई धोखाधड़ी और गबन के सिलसिले में पुलिस को एक अहम कामयाबी हासिल हुई है। अजमेर के क्लॉक टावर थाना पुलिस ने एक अंतरराज्यीय कार्रवाई को अंजाम देते हुए पश्चिम बंगाल से एक मुख्य आरोपी को दबोच लिया है। पकड़े गए आरोपी की पहचान अलाउद्दीन के रूप में की गई है। सरकारी योजनाओं के तहत जरूरतमंद विद्यार्थियों को मिलने वाली वित्तीय सहायता के नाम पर यह फर्जीवाड़ा किया गया था, जिसके बाद पुलिस टीम तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर आरोपी तक पहुंचने में सफल रही।
अल्पसंख्यक कल्याण पोर्टल में सेंधमारी और ऑनलाइन छेड़छाड़
जांच अधिकारियों के सामने यह तथ्य आया है कि आरोपी और उसके नेटवर्क में शामिल लोगों ने अल्पसंख्यक विभाग के आधिकारिक छात्रवृत्ति पोर्टल का गलत इस्तेमाल किया। शिक्षा विभाग से जुड़ी पोस्टमेट्रिक स्कॉलरशिप की पूरी व्यवस्था डिजिटल और ऑनलाइन माध्यम से संचालित होती है। आरोपियों ने इस ऑनलाइन प्रक्रिया की खामियों अथवा संवेदनशील डेटा तक गैरकानूनी पहुंच बनाकर फर्जी प्रविष्टियां कीं। सरकारी पोर्टल पर उपलब्ध सूचनाओं का दुरुपयोग करते हुए छात्रवृत्ति के लिए स्वीकृत होने वाली धनराशि को सुनियोजित तरीके से इधर-उधर किया गया। क्लॉक टावर थाना पुलिस इस तकनीकी पहलू की गहराई से पड़ताल कर रही है कि आरोपी ने पोर्टल के सिस्टम में किस स्तर पर घुसपैठ की और लाभार्थियों के नाम पर भेजी जाने वाली राशि को किस प्रकार अपने प्रभाव में लिया।
पश्चिम बंगाल में पुलिस की छापेमारी और गिरफ्तारी
छात्रवृत्ति गबन के इस प्रकरण की जांच जब आगे बढ़ी, तो तकनीकी निगरानी और डिजिटल लोकेशन के आधार पर आरोपी के पश्चिम बंगाल में सक्रिय होने के पुख्ता सुराग मिले। इसके तुरंत बाद अजमेर के क्लॉक टावर थाने की एक विशेष पुलिस टीम पश्चिम बंगाल रवाना की गई। वहां स्थानीय स्तर पर दबिश देकर अलाउद्दीन को हिरासत में ले लिया गया और कानूनी औपचारिकताएं पूरी करने के बाद उसे अजमेर लाया गया। पुलिस हिरासत में आरोपी से लगातार पूछताछ की जा रही है ताकि छात्रवृत्ति हड़पने के इस पूरे तौर-तरीके, इसमें प्रयुक्त तकनीकी उपकरणों और राज्य या अंतरराज्यीय स्तर पर शामिल अन्य मददगारों का पर्दाफाश किया जा सके।
बैंक खाता सीज, वित्तीय लेन-देन की फॉरेंसिक पड़ताल
मामले में वित्तीय गड़बड़ी की पुष्टि करने के लिए पुलिस ने आरोपी अलाउद्दीन के बैंक खाते को तुरंत प्रभाव से सीज करवा दिया है। पुलिस अब बैंक अधिकारियों के समन्वय से खाते के पुराने और नए सभी लेन-देन के रिकॉर्ड खंगाल रही है। जांचकर्ताओं का मुख्य ध्यान इस बात पर केंद्रित है कि सरकारी खजाने से निकली छात्रवृत्ति की राशि किन-किन तारीखों में इस खाते में जमा हुई और बाद में उसे किन अन्य खातों में ट्रांसफर किया गया या नकद निकाला गया। पुलिस यह भी स्पष्ट करने में जुटी है कि इस खाते के जरिए कुल कितने पैसों का हेरफेर हुआ और क्या इस पैसे से अन्य बिचौलियों या फर्जी आवेदकों को भी आर्थिक लाभ पहुंचाया गया था।
पूरे गिरोह और गबन की कुल राशि का आकलन जारी
क्लॉक टावर थाना पुलिस के मुताबिक, यह मामला केवल एक व्यक्ति के स्तर तक सीमित नहीं दिखता बल्कि इसके पीछे एक संगठित गिरोह के काम करने की प्रबल आशंका है। सरकारी खजाने और विद्यार्थियों के भविष्य से जुड़ी योजना में सेंधमारी के कारण प्रशासन इस मामले को बेहद गंभीरता से ले रहा है। पुलिस टीम अब आरोपी से मिले बयानों के आधार पर छात्रवृत्ति पोर्टल के तकनीकी लॉग्स, शैक्षणिक संस्थानों के रिकॉर्ड और अन्य संदिग्ध बैंक खातों की कड़ियों को आपस में जोड़ रही है। इस विस्तृत तफ्तीश के पूरा होने के बाद ही यह आधिकारिक तौर पर सामने आ सकेगा कि इस पूरे घोटाले में कुल कितने लाख या करोड़ रुपये का गबन किया गया और इस जालसाजी में कितने लोग प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से शामिल थे।


















