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आजमगढ़ में आक्रामक कुत्तों पर लगेगी लगाम, नगर पालिका ने एनिमल बर्थ कंट्रोल सेंटर के लिए मांगा 1 करोड़ का फंडउत्तर प्रदेश
23 सित॰ 2026, 3:52 pm (36 दिन पहले)· 2

आजमगढ़ में आक्रामक कुत्तों पर लगेगी लगाम, नगर पालिका ने एनिमल बर्थ कंट्रोल सेंटर के लिए मांगा 1 करोड़ का फंड

आजमगढ़ शहर में आवारा कुत्तों के हमलों और रेबीज के बढ़ते मामलों को देखते हुए नगर पालिका ने 1 करोड़ रुपये की लागत से एबीसी सेंटर बनाने की योजना तैयार की है।

उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ शहर में आवारा और आक्रामक कुत्तों के बढ़ते हमलों ने आम नागरिकों का सड़कों पर चलना मुश्किल कर दिया है। जिला अस्पताल में हर दिन रेबीज रोधी टीके लगवाने के लिए दर्जनों मरीज पहुंच रहे हैं, जिससे स्थिति की गंभीरता साफ नजर आती है। स्थानीय निवासियों और राहगीरों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए, नगर पालिका परिषद आजमगढ़ ने कुत्तों की आबादी को वैज्ञानिक और मानवीय तरीके से नियंत्रित करने के लिए एक विस्तृत कार्ययोजना तैयार की है।

शासन को भेजा गया 1 करोड़ रुपये का वित्तीय प्रस्ताव

अधिशासी अधिकारी बृजेश कुमार ने बताया कि अदालती निर्देशों और सरकारी प्राथमिकताओं का पालन करते हुए आजमगढ़ में एक आधुनिक एनिमल बर्थ कंट्रोल (ABC) सेंटर स्थापित करने का निर्णय लिया गया है। इस परियोजना के क्रियान्वयन के लिए जिलाधिकारी के जरिए शासन को 1 करोड़ रुपये का औपचारिक प्रस्ताव भेजा जा चुका है। न्यायिक आदेशों और जनसुरक्षा से जुड़ा मामला होने के कारण उम्मीद जताई जा रही है कि चालू माह में ही बजट स्वीकृत हो जाएगा। बजट जारी होते ही सेंटर के निर्माण और जरूरी उपकरणों की स्थापना का काम शुरू कर दिया जाएगा।

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सर्वे के आधार पर तय होगी दो-स्तरीय कार्ययोजना

नगर पालिका प्रशासन ने आवारा कुत्तों के नियंत्रण के लिए एक व्यापक दो-स्तरीय रणनीति बनाई है। इसके तहत सबसे पहले पूरे नगर निकाय क्षेत्र में सघन सर्वे कराया जाएगा। इस सर्वे के जरिए आक्रामक, काटने की प्रवृत्ति वाले और गंभीर संक्रामक बीमारियों से पीड़ित कुत्तों की अलग पहचान की जाएगी। ऐसे बीमार और हिंसक कुत्तों को विशेष निगरानी में रखा जाएगा ताकि आम लोगों को जानलेवा संक्रमण और हमलों से सुरक्षित रखा जा सके।

दूसरी ओर, सर्वे में सामान्य और स्वस्थ पाए जाने वाले कुत्तों को सुरक्षित तरीके से पकड़कर उनका वैज्ञानिक बंध्याकरण और टीकाकरण किया जाएगा। सर्जरी और देखभाल की प्रक्रिया पूरी होने के बाद, नियमों के अनुसार इन कुत्तों को वापस उसी इलाके में छोड़ा जाएगा जहां से उन्हें पकड़ा गया था। इससे नए आवारा कुत्तों का जमावड़ा रुक सकेगा और प्रजनन दर पर प्रभावी रोक लगेगी।

एनजीओ और निजी एजेंसियों के जरिए होगा पारदर्शी संचालन

इस पूरी परियोजना को सुचारू रूप से लागू करने के लिए गैर सरकारी संगठनों, थर्ड पार्टी एजेंसियों और विशेषज्ञ निजी संस्थाओं की सेवाएं ली जाएंगी। पारदर्शी व्यवस्था बनाए रखने के लिए टेंडर प्रक्रिया अपनाई जाएगी और चयनित संस्थाओं को निर्धारित भुगतान सीधे उनके बैंक खातों में डीबीटी के जरिए भेजा जाएगा। प्रशासनिक अधिकारियों का लक्ष्य है कि अगले 10 से 15 दिनों के भीतर सभी कागजी औपचारिकताएं पूरी कर ली जाएं, ताकि शासन से फंड मिलते ही जमीनी स्तर पर अभियान शुरू किया जा सके।

सवाल-जवाब

आजमगढ़ में एबीसी सेंटर स्थापित करने के लिए कितनी धनराशि का प्रस्ताव भेजा गया है?
नगर पालिका परिषद आजमगढ़ ने जिलाधिकारी के माध्यम से शासन को 1 करोड़ रुपये का वित्तीय प्रस्ताव भेजा है।
कुत्तों के नियंत्रण के लिए प्रशासन की क्या रणनीति है?
प्रशासन पहले सघन सर्वे कर बीमार व आक्रामक कुत्तों को अलग करेगा, फिर स्वस्थ कुत्तों का बंध्याकरण व टीकाकरण कर उन्हें उनके मूल स्थान पर छोड़ेगा।
इस परियोजना को धरातल पर उतारने के लिए क्या समय सीमा तय की गई है?
प्रशासन का लक्ष्य अगले 10 से 15 दिनों में सभी प्रारंभिक व कागजी औपचारिकताएं पूरी करने का है।
एबीसी सेंटर के संचालन में किन संस्थाओं की मदद ली जाएगी?
इस कार्य के लिए टेंडर प्रक्रिया के जरिए गैर सरकारी संगठनों और निजी विशेषज्ञ संस्थाओं को जोड़ा जाएगा, जिन्हें डीबीटी से भुगतान मिलेगा।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 5

Vikram Yadav@vikram-yadav·35 दिन पहले

आजमगढ़ के जिला अस्पताल में हर रोज़ एंटी-रेबीज लगवाने वालों की लंबी कतारें देखकर सिहरन हो जाती है। पिछले महीने जब मैं उधर से गुजर रहा था, तो एक आवारा कुत्ते ने बाइक वाले को गिरा दिया था। 1 करोड़ का यह फंड सिर्फ कागजों तक सीमित न रहे, तभी गलियों में बच्चों का निकलना सुरक्षित होगा।

Arjun Mehta@arjun-mehta·35 दिन पहले

आजमगढ़ में आवारा कुत्तों का आतंक वाकई गंभीर है। एक करोड़ का फंड तो मांग लिया गया है, लेकिन क्या यह पैसा समय पर और सही जगह इस्तेमाल हो पाएगा?

Ravikash Gupta@ravikash·35 दिन पहले

अर्जुन जी, बात सही है फंड की, पर असली खेल तो टेंडर और एजेंसियों की पारदर्शिता पर अटकेगा।

Rohan Verma@rohan-verma·35 दिन पहले

आजमगढ़ में आवारा कुत्तों का आतंक सचमुच बहुत बढ़ गया है, अस्पताल में रोज कतार लग रही है। उम्मीद है इस बजट से जल्द राहत मिलेगी।

Karan Malhotra@karan-malhotra·35 दिन पहले

रोहन जी, बिल्कुल सही कहा आपने। अदालतों के कई निर्देश और एनिमल बर्थ कंट्रोल के नियम पहले से हैं, पर धरातल पर अमलीकरण में हमेशा देरी होती है।

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