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अजमेर के 62 वर्षीय टेलर रेखराज ठाडा को मिला 974.97 करोड़ का आयकर नोटिस, पैन कार्ड के दुरुपयोग का खुलासाराजस्थान
20 अग॰ 2026, 12:00 pm (36 दिन पहले)· 3

अजमेर के 62 वर्षीय टेलर रेखराज ठाडा को मिला 974.97 करोड़ का आयकर नोटिस, पैन कार्ड के दुरुपयोग का खुलासा

राजस्थान के अजमेर जिले में 15 हजार रुपये महीना कमाने वाले 62 वर्षीय टेलर रेखराज ठाडा को 974.97 करोड़ रुपये का टैक्स नोटिस मिला है, जिससे पैन कार्ड के दुरुपयोग का मामला उजागर हुआ है।

राजस्थान के अजमेर जिले में स्थित गोविंदगढ़ के रहने वाले 62 वर्षीय रेखराज ठाडा सिलाई का काम करके अपने परिवार का पेट पालते हैं। महीने में मुश्किल से 15 हजार रुपये कमाने वाले इस मामूली टेलर के सामने उस समय दुखों का पहाड़ टूट पड़ा, जब आयकर विभाग ने उन्हें 974.97 करोड़ रुपये की टैक्स रिकवरी का नोटिस थमा दिया। इतनी भारी-भरकम राशि का डिमांड नोटिस देखते ही रेखराज और उनके परिजन हक्के-बक्के रह गए। जिस व्यक्ति का पूरा परिवार सीमित आय में गुजारा करता हो, उसे अचानक अरबों रुपये की देनदारी का नोटिस मिल जाना किसी बड़े झटके से कम नहीं था। इस टैक्स नोटिस के सामने आने के बाद से ही पूरा परिवार गहरे मानसिक तनाव और अनिश्चितता के माहौल में जीने को मजबूर है।

आयकर विभाग का नोटिस और जवाब देने की 20 अगस्त की समय-सीमा

मामले की शुरुआत उस समय हुई जब 13 अगस्त 2026 को आयकर विभाग का एक औपचारिक नोटिस रेखराज ठाडा के घर पहुंचा। इस पत्र में विभाग ने स्पष्ट तौर पर 974.97 करोड़ रुपये की टैक्स रिकवरी की बात कही थी और रेखराज को 20 अगस्त तक अपना रुख स्पष्ट करने और जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया था। अचानक मिले इस सरकारी नोटिस को देखकर रेखराज समझ नहीं पाए कि आखिर किस आधार पर उनसे इतने करोड़ों रुपये का हिसाब मांगा जा रहा है। उन्होंने तुरंत इस नोटिस की जानकारी अपने परिजनों, रिश्तेदारों और आसपास के परिचित लोगों को दी। मामले की गंभीरता को देखते हुए सभी ने सलाह दी कि इस नोटिस के पीछे के असली कारणों का पता लगाने के लिए वित्तीय दस्तावेजों की गहराई से जांच करानी होगी।

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पैन कार्ड के कथित दुरुपयोग और सीए की जांच में हुआ बड़ा खुलासा

आयकर नोटिस की सच्चाई जानने के लिए परिजनों ने एक परिचित चार्टर्ड अकाउंटेंट (CA) से संपर्क किया और उनसे टैक्स रिकॉर्ड की पड़ताल करने का अनुरोध किया। जब CA ने आयकर विभाग के पोर्टल और अन्य वित्तीय रजिस्टरों की बारीक जांच की, तो एक चौंकाने वाली सच्चाई सामने आई। आधिकारिक रिकॉर्ड में रेखराज ठाडा को गुजरात के सूरत शहर में पंजीकृत 'जय बाबेरी डायमंड प्राइवेट लिमिटेड' नामक कंपनी का निदेशक दर्शाया गया था। यह जानकारी मिलते ही रेखराज के पैरों तले जमीन खिसक गई। रेखराज का स्पष्ट कहना है कि उन्होंने अपने जीवन में कभी कोई कंपनी नहीं बनाई, न ही करोड़ों रुपये का कोई व्यवसाय किया और न ही वे कभी गुजरात गए हैं। इसके बावजूद उनके PAN कार्ड के डेटा का कथित तौर पर गलत इस्तेमाल करके उन्हें कागजों पर इस डायमंड कंपनी का निदेशक बना दिया गया था।

2011 से संचालित कंपनी और दूसरी डायमंड फर्म में भी नाम

मामले की पड़ताल के दौरान यह तथ्य भी सामने आया कि जिस कंपनी से रेखराज का नाम जोड़ा गया है, वह वर्ष 2011 से ही कागजों पर संचालित की जा रही है। यानी पिछले 15 वर्षों से उनके PAN कार्ड का इस्तेमाल किसी बड़े कारोबारी नेटवर्क में किया जा रहा था, जिसकी भनक उन्हें 13 अगस्त 2026 को नोटिस मिलने तक बिल्कुल नहीं थी। इतना ही नहीं, जब CA ने वित्तीय अभिलेखों की और अधिक गहनता से जांच की, तो एक अन्य डायमंड कंपनी में भी रेखराज का नाम निदेशक के रूप में दर्ज मिला। एक मामूली सिलाई का काम करने वाले व्यक्ति का नाम दो-दो हीरा कारोबार से जुड़ी कंपनियों में निदेशक के रूप में दर्ज होना इस बात का सीधा संकेत है कि यह किसी संगठित गिरोह द्वारा किया गया वित्तीय फर्जीवाड़ा हो सकता है।

परिवार का संघर्ष और अधिकारियों के चक्कर

करोड़ों रुपये की टैक्स देनदारी का नोटिस आने के बाद से रेखराज का पूरा परिवार दहशत में है। रेखराज की मदद के लिए उनके दो बेटे और एक भाई लगातार सरकारी दफ्तरों और प्रशासनिक अधिकारियों के चक्कर काट रहे हैं। परिवार का कहना है कि किसी निर्दोष व्यक्ति के पहचान पत्र और PAN कार्ड की जानकारी चुराकर या धोखाधड़ी से उसका गलत इस्तेमाल करके उसे कॉर्पोरेट कंपनियों का निदेशक बनाना एक गंभीर अपराध है। परिवार ने मांग की है कि जिन लोगों ने रेखराज के नाम का अनुचित लाभ उठाया और बिना उनकी जानकारी के इतना बड़ा कारोबार कागजों पर खड़ा किया, उनकी तुरंत पहचान की जाए और उन पर सख्त कानूनी कार्रवाई हो।

अजमेर पुलिस में शिकायत और एसपी ग्रामीण की जांच

इस बड़े वित्तीय फर्जीवाड़े की निष्पक्ष जांच की मांग को लेकर परिजनों ने पुलिस का दरवाजा खटखटाया है। रेखराज और उनके परिजनों ने अजमेर SP ग्रामीण लालचंद कायल से मिलकर पूरे प्रकरण की विस्तार से जानकारी दी और अपनी शिकायत दर्ज कराई। शिकायत मिलने के बाद अजमेर पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए विस्तृत जांच शुरू कर दी है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, अब कंपनियों के कॉर्पोरेट मामलों के मंत्रालय (MCA) के रिकॉर्ड, बैंक खातों, आयकर रिटर्न और PAN कार्ड के इस्तेमाल से जुड़े तमाम दस्तावेजों की गहन जांच की जाएगी। पुलिस इस बात का पता लगाने का प्रयास कर रही है कि रेखराज के दस्तावेज सूरत की इन कंपनियों तक कैसे पहुंचे और निदेशक पद पर उनकी फर्जी नियुक्ति किसने कराई। फिलहाल, 15 हजार रुपये मासिक कमाने वाले एक टेलर को 974.97 करोड़ रुपये का नोटिस मिलने की यह घटना पूरे राजस्थान में चर्चा का विषय बनी हुई है।

सवाल-जवाब

अजमेर के टेलर रेखराज ठाडा को आयकर विभाग ने कितने रुपये का टैक्स नोटिस भेजा है?
आयकर विभाग ने 62 वर्षीय टेलर रेखराज ठाडा को 974.97 करोड़ रुपये की टैक्स रिकवरी का नोटिस जारी किया है।
नोटिस में रेखराज ठाडा को जवाब देने के लिए कितनी समय-सीमा दी गई थी?
नोटिस 13 अगस्त 2026 को प्राप्त हुआ था और विभाग ने 20 अगस्त 2026 तक जवाब और स्पष्टीकरण दाखिल करने का समय दिया था।
जांच के दौरान सीए की पड़ताल में क्या खुलासा हुआ?
सीए की पड़ताल में सामने आया कि सूरत की 'जय बाबेरी डायमंड प्राइवेट लिमिटेड' और एक अन्य डायमंड कंपनी में रेखराज का नाम अवैध रूप से निदेशक के रूप में दर्ज था।
मामले की शिकायत किस पुलिस अधिकारी के समक्ष दर्ज कराई गई है?
परिजनों ने अजमेर एसपी ग्रामीण लालचंद कायल से मिलकर मामले की शिकायत दर्ज कराई है, जिसके बाद पुलिस ने प्राथमिक जांच शुरू कर दी है।
रेखराज ठाडा की मासिक कमाई कितनी है?
रेखराज ठाडा गोविंदगढ़ में सिलाई का काम करते हैं और उनकी मासिक कमाई लगभग 15 हजार रुपये है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 2

Karan Malhotra@karan-malhotra·35 दिन पहले

यह मामला संगठित वित्तीय अपराध और पहचान की चोरी की ओर इशारा करता है, जहाँ पिछले पंद्रह वर्षों से एक साधारण टेलर के पैन कार्ड का उपयोग कागजी कंपनियों के संचालन के लिए किया जा रहा था। कानून-व्यवस्था और जाँच एजेंसियों के लिए यह चुनौती है कि वे उस बड़े सिंडिकेट का पर्दाफाश करें जिसने इस फर्जीवाड़े को अंजाम दिया। यदि इस स्तर पर कड़े कदम नहीं उठाए गए, तो ऐसे साइबर और टैक्स फ्रॉड आम नागरिकों की सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा बन सकते हैं।

Rohan Verma@rohan-verma·35 दिन पहले

यह घटना दिखाती है कि कैसे आम नागरिकों की निजी और वित्तीय पहचान अब सुरक्षित नहीं है। पिछले पंद्रह वर्षों से एक मामूली टेलर के पैन कार्ड का दुरुपयोग यह साबित करता है कि फर्जी कंपनियों के संचालन के लिए साइबर अपराधियों और वित्तीय धोखाधड़ी करने वाले गिरोहों का नेटवर्क किस हद तक फैला हुआ है। यदि इस मामले की गहराई से जाँच कर मास्टरमाइंड को बेनकाब नहीं किया गया, तो भविष्य में ऐसे मामलों से न सिर्फ कर व्यवस्था की विश्वसनीयता खतरे में पड़ेगी, बल्कि देश के ईमानदार नागरिक भी इस तरह के बड़े प्रशासनिक और कानूनी संकट में फंस सकते हैं।

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