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अजमेर नगर निगम में मेयर चुनाव आज, कांग्रेस की किरण गढ़वाल और बीजेपी की अनामिका शर्मा में कड़ा मुकाबलाराजस्थान
21 सित॰ 2026, 11:48 am (4 दिन पहले)· 0

अजमेर नगर निगम में मेयर चुनाव आज, कांग्रेस की किरण गढ़वाल और बीजेपी की अनामिका शर्मा में कड़ा मुकाबला

अजमेर नगर निगम में मेयर पद के लिए कांग्रेस और बीजेपी के बीच रोमांचक मुकाबला जारी है, जहां 11 निर्दलीय पार्षद सत्ता की चाबी अपने हाथ में लिए हुए हैं।

राजस्थान के अजमेर नगर निगम में नया मेयर चुनने के लिए चुनावी सरगर्मी अपने चरम पर पहुंच चुकी है। अस्सी वार्डों वाले इस प्रतिष्ठित नगर निगम में सत्ता की चाबी किसी एक पार्टी के पास नहीं है, बल्कि पूरा दारोमदार निर्दलीय जीतकर आए ग्यारह पार्षदों के रुख पर आ टिका है। राजस्थान विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी के गृहक्षेत्र में होने वाले इस चुनाव में बहुमत के लिए इकतालीस का जादुई आंकड़ा हासिल करना अनिवार्य है। इस मुकाबले में कांग्रेस की ओर से किरण गढ़वाल और बीजेपी की तरफ से अनामिका शर्मा आमने-सामने खड़ी हैं। दोनों ही खेमों ने शहर की सत्ता संभालने के लिए अपनी पूरी राजनीतिक ताकत झोंक दी है।

बहुमत के समीकरण और दोनों दलों की स्थिति

अजमेर नगर निगम चुनावों के जो नतीजे सामने आए हैं, उनमें कांग्रेस सबसे बड़े दल के रूप में उभरी है। कांग्रेस पार्टी के खाते में कुल सैंतीस पार्षद आए हैं, जबकि बीजेपी बत्तीस सीटें जीतकर दूसरे स्थान पर रही है। इसके अलावा ग्यारह वार्डों में निर्दलीय उम्मीदवारों ने जीत दर्ज की है। कांग्रेस को अपना बोर्ड गठित करने और किरण गढ़वाल को मेयर बनाने के लिए केवल चार और पार्षदों के समर्थन की जरूरत है। दूसरी ओर बीजेपी की अनामिका शर्मा को मेयर पद की कुर्सी तक पहुंचने के लिए नौ अतिरिक्त पार्षदों का आंकड़ा जुटाना होगा। दोनों पार्टियां लगातार यह दावा कर रही हैं कि निर्दलीय उनके साथ हैं और वे आसानी से अपना बोर्ड बना लेंगी।

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बेंगलुरु से पुष्कर तक पार्षदों की बाड़ाबंदी

पार्षदों को टूटने और पाला बदलने से बचाने के लिए दोनों ही सियासी दलों ने भारी घेराबंदी की रणनीति अपनाई। कांग्रेस पार्टी मतदान समाप्त होने के तुरंत बाद से ही बेहद सतर्कता बरत रही थी। अपने पार्षदों को किसी भी तरह की टूट से सुरक्षित रखने के लिए कांग्रेस ने उन्हें राजस्थान से बाहर कर्नाटक के बेंगलुरु भेज दिया था। इस पूरी घेराबंदी का जिम्मा पार्टी नेता धर्मेंद्र राठौड़ ने संभाला हुआ था। बेंगलुरु की इस बाड़ाबंदी में तीन निर्दलीय पार्षद भी कांग्रेस पार्षदों के साथ मौजूद रहे। रविवार को इन सभी पार्षदों को वापस अजमेर लाया गया। कांग्रेस खेमे का कहना है कि उनके साथ तीन निर्दलीय पहले से हैं और उन्हें केवल एक और पार्षद का समर्थन चाहिए। दो अन्य निर्दलीय पार्षद मुस्लिम समुदाय से आते हैं, जिन्हें लेकर कांग्रेस आश्वस्त है कि वे उनके पक्ष में ही मतदान करेंगे।

दूसरी तरफ बीजेपी ने भी अपने बत्तीस पार्षदों को एकजुट रखने के लिए पहले राजधानी जयपुर में रखा और बाद में उन्हें तीर्थनगरी पुष्कर स्थानांतरित कर दिया गया। बीजेपी की इस बाड़ाबंदी में छह निर्दलीय पार्षद शामिल बताए गए हैं। इस समीकरण के मुताबिक बीजेपी को बहुमत साबित करने के लिए अब भी तीन अन्य पार्षदों का समर्थन हासिल करना बाकी है। सियासी हलकों में यह चर्चा भी जोरों पर है कि बीजेपी विपक्षी खेमे में सेंधमारी करने की कोशिश कर रही है, ताकि क्रॉस वोटिंग के जरिए आवश्यक संख्या बल जुटाया जा सके।

प्रशासन का कड़ा पहरा और आरोप-प्रत्यारोप

मतदान का समय सुबह दस बजे से दोपहर दो बजे तक निर्धारित किया गया है। चुनाव की संवेदनशीलता को देखते हुए स्थानीय प्रशासन और पुलिस पूरी तरह मुस्तैद हैं। नगर निगम परिसर के आसपास सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं और बैरिकेडिंग लगाकर त्रिस्तरीय सुरक्षा घेरा तैयार किया गया है। निगम कार्यालय में केवल अधिकृत व्यक्तियों को ही प्रवेश दिया जा रहा है और किसी भी बाहरी व्यक्ति की एंट्री पर पूर्ण प्रतिबंध है। यहां तक कि मीडिया कर्मियों को भी परिसर से तीन सौ मीटर दूर रोक दिया गया है।

इस पूरे घटनाक्रम के बीच कांग्रेस पार्टी लगातार स्थानीय प्रशासन पर मिलीभगत करने और पक्षपात बरतने का आरोप लगा रही है। इसके जवाब में बीजेपी नेताओं का कहना है कि वे चुनाव आयोग और प्रशासन की तय गाइडलाइन का पूरी निष्ठा से पालन कर रहे हैं। हालांकि मतदान प्रक्रिया के दौरान क्रॉस वोटिंग की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। चर्चा है कि कुछ कांग्रेसी पार्षद राज्य सरकार की नीतियों के साथ जाकर अपना वोट बदल सकते हैं। अब दोनों दलों के दावों की अंतिम परीक्षा मतदान कक्ष के भीतर होने वाली वोटिंग पर टिकी है।

सवाल-जवाब

अजमेर नगर निगम में कुल कितने वार्ड हैं और बहुमत का आंकड़ा क्या है?
अजमेर नगर निगम में कुल 80 वार्ड हैं और मेयर पद पर जीत हासिल करने के लिए 41 पार्षदों के बहुमत का आंकड़ा आवश्यक है।
मेयर पद के लिए मुख्य मुकाबला किन उम्मीदवारों के बीच है?
मेयर पद के लिए कांग्रेस की किरण गढ़वाल और बीजेपी की अनामिका शर्मा के बीच सीधा मुकाबला है।
चुनाव नतीजों में कांग्रेस और बीजेपी को कितनी-कितनी सीटें मिली हैं?
चुनावों में कांग्रेस को 37 सीटें और बीजेपी को 32 सीटें मिली हैं, जबकि 11 वार्डों में निर्दलीय पार्षदों ने जीत हासिल की है।
कांग्रेस और बीजेपी ने अपने पार्षदों की बाड़ाबंदी कहां की थी?
कांग्रेस ने अपने पार्षदों को कर्नाटक के बेंगलुरु में रखा था, जबकि बीजेपी ने अपने पार्षदों को पहले जयपुर और बाद में पुष्कर में ठहराया था।
मेयर चुनाव के लिए मतदान का समय क्या तय किया गया है?
मतदान का समय सुबह 10:00 बजे से दोपहर 2:00 बजे तक निर्धारित किया गया है।
नगर निगम परिसर में सुरक्षा और मीडिया को लेकर प्रशासन के क्या निर्देश हैं?
परिसर में त्रिस्तरीय बैरिकेडिंग और पुलिस पहरा लगाया गया है, जबकि मीडिया कर्मियों को निगम भवन से 300 मीटर दूरी पर ही रोक दिया गया है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 5

Li Wei@li-wei·3 दिन पहले

अजमेर नगर निगम के इस चुनाव में जिस तरह से बेंगलुरु और पुष्कर में पार्षदों की बाड़ाबंदी देखने को मिली है, वह भारतीय स्थानीय निकायों की दलीय राजनीति में बढ़ती अनिश्चितता और जोड़-तोड़ की संस्कृति को उजागर करती है। कांग्रेस के पास सैंतीस सीटों के साथ शुरुआती बढ़त जरूर है, और उसे बहुमत के लिए केवल चार और पार्षदों की दरकार है, लेकिन ग्यारह निर्दलीय पार्षदों की भूमिका और रिसॉर्ट पॉलिटिक्स के इस दौर में अंतिम क्षणों तक क्रॉस वोटिंग का खतरा बना हुआ है। विधानसभा अध्यक्ष के गृहक्षेत्र में हो रहा यह मुकाबला केवल एक मेयर की कुर्सी की लड़ाई नहीं है, बल्कि यह स्थानीय स्तर पर दोनों प्रमुख दलों की रणनीतिक और मनोवैज्ञानिक मजबूती की बड़ी परीक्षा भी बन चुका है।

Arjun Mehta@arjun-mehta·3 दिन पहले

अजमेर नगर निगम के इस चुनाव में स्पीकर के गृहक्षेत्र की प्रतिष्ठा दांव पर है। कांग्रेस के पास सबसे बड़े दल के रूप में बढ़त और बेंगलुरु की बाड़ाबंदी का सुरक्षा चक्र है, जबकि बीजेपी पुष्कर शिविर के जरिए समीकरण साधने में जुटी है। ग्यारह निर्दलीय पार्षदों की यह फौज तय करेगी कि बाड़ाबंदी की रणनीति सफल होती है या अंतिम समय की क्रॉस वोटिंग उलटफेर करती है।

Rohan Verma@rohan-verma·3 दिन पहले

अजमेर नगर निगम के इस दिलचस्प मुकाबले में असली खेल अब सदन के भीतर फ्लोर मैनेजमेंट और क्रॉस वोटिंग पर टिक गया है। कांग्रेस के पास संख्या बल का शुरुआती फायदा जरूर है, लेकिन विधानसभा अध्यक्ष के गृहक्षेत्र में होने के कारण सत्ताधारी दल से जुड़े समीकरणों और बाड़ाबंदी के अंतिम समय के प्रबंधन से जोड़-तोड़ की गुंजाइश पूरी तरह से बनी हुई है।

Ravikash Gupta@ravikash·3 दिन पहले

अजमेर नगर निगम के इस मेयर चुनाव में केवल राजनीतिक दलों की रणनीति की ही परीक्षा नहीं है, बल्कि यह स्थानीय शहरी निकायों के वित्तीय और प्रशासनिक भविष्य पर भी गहरा प्रभाव डालेगा। पैंतीस और बत्तीस के आंकड़े के बीच फंसे इस चुनाव में ग्यारह निर्दलीय पार्षदों की भूमिका यह तय करेगी कि आगामी पांच वर्षों में अजमेर का विकास बजट और बुनियादी ढांचा परियोजनाएं किस दिशा में आगे बढ़ती हैं। फ्लोर मैनेजमेंट और गुप्त मतदान की अनिश्चितता यह स्पष्ट करती है कि स्थानीय निकाय चुनाव अब केवल संख्या का खेल नहीं, बल्कि राजनीतिक स्थिरता का एक बड़ा संकेतक बन चुके हैं।

Karan Malhotra@karan-malhotra·3 दिन पहले

अजमेर नगर निगम के इस मेयर चुनाव में कानून-व्यवस्था और सुरक्षा एजेंसियों की भूमिका बेहद संवेदनशील हो गई है। बेंगलुरु और पुष्कर से पार्षदों की वापसी के बाद क्रॉस-वोटिंग, व्हिप के उल्लंघन और पाला बदलने की आशंकाओं के चलते जिला प्रशासन और पुलिस बल पर मतदान प्रक्रिया को निष्पक्ष और शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराने का भारी दबाव रहेगा।

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