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अलवर के बुटोली गांव में 400 फीट गहरे बोरवेल में गिरा 9 साल का बच्चा भानु, SDRF और NDRF का रेस्क्यू ऑपरेशन जारीराजस्थान
31 अग॰ 2026, 9:58 pm (24 दिन पहले)· 3

अलवर के बुटोली गांव में 400 फीट गहरे बोरवेल में गिरा 9 साल का बच्चा भानु, SDRF और NDRF का रेस्क्यू ऑपरेशन जारी

राजस्थान के अलवर जिले के लक्ष्मणगढ़ क्षेत्र स्थित बुटोली गांव में 9 वर्षीय भानु पतंग पकड़ने के दौरान 400 फीट गहरे खुले बोरवेल में जा गिरा। वह करीब 40 फीट की गहराई पर अटका हुआ है, जिसे सुरक्षित बाहर निकालने के लिए एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीमें युद्धस्तर पर जुटी हैं।

राजस्थान के अलवर जिले के अंतर्गत आने वाले लक्ष्मणगढ़ क्षेत्र के बुटोली गांव में एक बड़ा हादसा सामने आया है, जहाँ नौ साल का एक मासूम बच्चा खेलते समय खुले बोरवेल में जा गिरा। बोरवेल की कुल गहराई करीब 400 फीट बताई जा रही है, जिसमें यह बच्चा फिलहाल लगभग 40 फीट की गहराई पर फंसा हुआ है। इस घटना के सामने आने के बाद पूरे इलाके में सनसनी फैल गई है और स्थानीय लोगों की भारी भीड़ घटनास्थल पर एकत्र हो गई है। बच्चे को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए प्रशासन और राहत एजेंसियों द्वारा लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।

घटना की सूचना मिलते ही प्रशासनिक अमला हरकत में आ गया और तुरंत राहत एवं बचाव कार्य शुरू कर दिया गया। बालक को सकुशल बाहर निकालने के लिए घटनास्थल पर तीन जेसीबी मशीनों की मदद से बड़े पैमाने पर खुदाई का काम किया जा रहा है। अब तक बोरवेल के पास लगभग 25 फीट तक की गहराई तक जमीन खोदी जा चुकी है, ताकि बच्चे तक पहुंचने का रास्ता बनाया जा सके। इस बचाव अभियान को गति देने के लिए राज्य आपदा मोचन बल यानी एसडीआरएफ और राष्ट्रीय आपदा मोचन बल यानी एनडीआरएफ की विशेष टीमें भी मौके पर पहुंच चुकी हैं। दोनों ही एजेंसियों ने मोर्चा संभाल लिया है और स्थानीय पुलिस तथा प्रशासन के अधिकारी भी लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं। ऑपरेशन के दौरान पूरी सावधानी बरती जा रही है ताकि बच्चे को किसी भी प्रकार का नुकसान न पहुंचे।

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बचाव दल के सामने आ रही बाधाओं को दूर करने के लिए विशेष कदम उठाए जा रहे हैं। रेस्क्यू के दौरान बोरवेल के भीतर पहले से ही फंसे एक बड़े पत्थर को बाहर निकालने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। अधिकारियों का मानना है कि इस पत्थर को हटाने के बाद बच्चे को ऊपर खींचने का रास्ता पूरी तरह साफ हो जाएगा। इसके अलावा, बोरवेल के अंदर लगातार ऑक्सीजन की आपूर्ति की जा रही है ताकि रेस्क्यू अभियान पूरा होने तक बच्चे को सांस लेने में किसी तरह की कठिनाई का सामना न करना पड़े और उसकी सेहत सुरक्षित बनी रहे।

यह दर्दनाक हादसा उस समय हुआ जब नौ साल का भानु पतंग लूटने के चक्कर में दौड़ रहा था। दौड़ते वक्त उसका पैर अचानक उस खुले बोरवेल पर रखे एक पत्थर पर आ गया। बच्चे का वजन पड़ते ही वह पत्थर अपनी जगह से खिसक गया, जिसके कारण भानु का संतुलन बिगड़ गया और वह सीधे गहरे बोरवेल के भीतर जा गिरा। कुछ ही पलों में घटी इस अचानक हुई घटना से वहां हड़कंप मच गया। आसपास मौजूद ग्रामीणों ने तुरंत अपनी तरफ से बच्चे को बचाने का प्रयास शुरू किया और प्रशासनिक अधिकारियों को इसकी जानकारी दी, जिसके बाद भारी मशीनें और बचाव दल मौके पर पहुंचे।

प्रशासन और जनप्रतिनिधियों की मौजूदगी

इस पूरे रेस्क्यू ऑपरेशन की व्यक्तिगत रूप से निगरानी करने के लिए रामगढ़ के विधायक सुखवंत सिंह स्वयं घटनास्थल पर मौजूद हैं। इसके अलावा अलवर की जिला कलक्टर आर्तिका शुक्ला समेत तमाम प्रशासनिक अधिकारी भी मौके पर डेरा डाले हुए हैं। कानून व्यवस्था बनाए रखने और भीड़ को नियंत्रित करने के लिए भारी पुलिस बल तैनात किया गया है। बुटोली गांव की हर गली और चौराहे पर लोग चिंतित मुद्रा में खड़े हैं और सबकी निगाहें इस बचाव अभियान पर टिकी हुई हैं। हर कोई भगवान से यही प्रार्थना कर रहा है कि नन्हा भानु सुरक्षित बाहर आ जाए।

दूसरी ओर, इस भयानक हादसे के बाद से भानु के माता-पिता और परिवार के अन्य सदस्यों का रो-रोकर बुरा हाल है। परिवार के तमाम लोग अपने जिगर के टुकड़े को सकुशल देखने की आस लगाए बैठे हैं। मौके पर मौजूद ग्रामीण पीड़ित परिवार को ढांढस बंधाने का प्रयास कर रहे हैं। प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि बोरवेल की गहराई और भीतर फंसे पत्थरों के बीच बच्चे तक बिना किसी बाधा के पहुंचा जाए। करीब 400 फीट गहरे बोरवेल में 40 फीट की गहराई पर अटके भानु को बचाने के लिए जेसीबी से खुदाई, ऑक्सीजन सप्लाई और पत्थर हटाने का काम एक साथ चल रहा है। अब पूरा देश और स्थानीय लोग यही उम्मीद कर रहे हैं कि बचाव टीमें जल्द से जल्द इस ऑपरेशन को सफलतापूर्वक पूरा करेंगी।

सवाल-जवाब

भानु किस जिले के किस गांव में बोरवेल में गिरा?
भानु अलवर जिले के लक्ष्मणगढ़ क्षेत्र के बुटोली गांव में बोरवेल में गिरा है।
बोरवेल की कुल गहराई कितनी है और बच्चा कितनी गहराई पर फंसा है?
बोरवेल की कुल गहराई करीब 400 फीट है और बच्चा लगभग 40 फीट की गहराई पर अटका हुआ है।
बच्चा बोरवेल में कैसे गिरा?
भानु पतंग लूटने के लिए दौड़ रहा था और उसका पैर बोरवेल के ऊपर रखे ढीले पत्थर पर पड़ने से वह नीचे गिर गया।
बचाव कार्य में कौन-सी एजेंसियां जुटी हुई हैं?
बचाव कार्य में एसडीआरएफ और एनडीआरएफ की टीमें स्थानीय प्रशासन और पुलिस के साथ मिलकर जुटी हैं।
बच्चे को निकालने के लिए क्या प्रयास किए जा रहे हैं?
जेसीबी मशीनों से जमीन की खुदाई की जा रही है, बोरवेल के अंदर ऑक्सीजन पहुंचाई जा रही है और फंसा हुआ पत्थर हटाया जा रहा है।
मौके पर कौन-कौन से अधिकारी और नेता मौजूद हैं?
रामगढ़ विधायक सुखवंत सिंह और जिला कलक्टर आर्तिका शुक्ला प्रशासनिक टीम के साथ मौके पर मौजूद हैं।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 5

Carlos Mendoza@carlos-mendoza·24 दिन पहले

यह घटना एक बार फिर से ग्रामीण और अर्ध-शहरी इलाकों में खुले बोरवेल के खतरनाक रूप से अप्रयुक्त और असुरक्षित रहने की गंभीर समस्या को उजागर करती है। हालांकि एसडीआरएफ और एनडीआरएफ की टीमें ऑक्सीजन आपूर्ति और समानांतर खुदाई के साथ युद्धस्तर पर जुटी हैं, लेकिन इस तरह की लापरवाही रोकने के लिए कड़े कानूनों और सख्त प्रशासनिक जवाबदेही की अत्यधिक आवश्यकता है ताकि भविष्य में ऐसी त्रासदियों की पुनरावृत्ति न हो।

Ravikash Gupta@ravikash·24 दिन पहले

अलवर के इस हादसे ने एक बार फिर ग्रामीण और अर्ध-शहरी इलाकों में खुले, लावारिस बोरवेलों से जुड़े गंभीर प्रशासनिक और कानूनी सुरक्षा संकट को उजागर किया है। सुप्रीम कोर्ट के स्पष्ट दिशा-निर्देशों के बावजूद इस तरह के लापरवाही भरे खुले गड्ढे बच्चों की जान के लिए लगातार बड़ा खतरा बने हुए हैं। रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान ऑक्सीजन की आपूर्ति और मलबे को हटाने के साथ-साथ यह जरूरी है कि जिला प्रशासन ऐसे सभी असुरक्षित और बंद पड़े बोरवेलों की तुरंत पहचान कर उनकी रीचार्जिंग और पक्की सीलिंग सुनिश्चित करे ताकि भविष्य में ऐसी त्रासदियों को रोका जा सके।

Arjun Mehta@arjun-mehta·24 दिन पहले

यह हादसा प्रशासनिक तंत्र की उस सुस्ती को बेनकाब करता है जहाँ सर्वोच्च न्यायालय के आदेश केवल कागजों तक सीमित रह जाते हैं। जब तक बोरवेल मालिकों और स्थानीय निरीक्षण अधिकारियों की जवाबदेही तय कर आपराधिक लापरवाही के मुकदमे दर्ज नहीं किए जाएंगे, तब तक इस तरह के जानलेवा हादसों पर रोक लगाना असंभव होगा। नीतिगत स्तर पर अब कड़े दंड का प्रावधान करने की सख्त जरूरत है।

Rohan Verma@rohan-verma·24 दिन पहले

खुले बोरवेल से जुड़ी ऐसी दुर्घटनाएं बार-बार सामने आना हमारी व्यवस्था की गंभीर प्रशासनिक चूक को उजागर करती हैं। सुप्रीम कोर्ट के कड़े दिशानिर्देशों के बावजूद ज़मीनी स्तर पर लापरवाही बरती जा रही है, जिससे मासूमों की जान दांव पर लग रही है। इस घटना के बाद यह आवश्यक हो गया है कि प्रशासन पूरे राज्य में ऐसे सभी असुरक्षित और खुले बोरवेलों की अनिवार्य रूप से पहचान करे और दोषियों पर सख्त कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित करे ताकि भविष्य में इस तरह के हादसे रोके जा सकें।

Karan Malhotra@karan-malhotra·24 दिन पहले

रोहन द्वारा उठाए गए प्रशासनिक लापरवाही के मुद्दे से आगे बढ़कर, हमें यह देखना होगा कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों की अवहेलना केवल प्रशासनिक शिथिलता नहीं, बल्कि आपराधिक उपेक्षा है। कानून के जानकारों के अनुसार, ऐसे मामलों में भारतीय न्याय संहिता के तहत गैर-इरादतन हत्या या लापरवाही से मौत के आरोप में बोरवेल मालिकों और जिम्मेदार अधिकारियों पर सख्त मुकदमे दर्ज होने चाहिए। जब तक त्वरित और मिसाल कायम करने वाली कानूनी कार्रवाई नहीं होगी, तब तक इन जानलेवा सुरक्षा चूकों पर लगाम नहीं लग सकती।

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