भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण देश में हाई-स्पीड सड़क संपर्क का दायरा बढ़ाते हुए तीन विशाल एक्सप्रेसवे परियोजनाओं को आपस में जोड़ने पर काम कर रहा है। इन तीनों खंडों के एक साथ जुड़ने से अंबाला से लेकर पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी तक लगभग 1500 किलोमीटर लंबा निर्बाध महाकॉरिडोर अस्तित्व में आ जाएगा। इस पूरे नेटवर्क की आधारशिला अंबाला-शामली, शामली-गोरखपुर और गोरखपुर-सिलीगुड़ी एक्सप्रेसवे हैं। यह आधुनिक सड़क मार्ग पंजाब, हरियाणा, दिल्ली-एनसीआर, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, बिहार और पश्चिम बंगाल के बीच अंतर-राज्यीय परिवहन को पूरी तरह बदल देगा।
सफर के समय में भारी कटौती और दिल्ली-एनसीआर को राहत
इस वृहद राजमार्ग तंत्र का सबसे बड़ा रणनीतिक और व्यावहारिक लाभ राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र और पूर्वोत्तर के प्रवेश द्वार के बीच देखने को मिलेगा। वर्तमान समय में सामान्य सड़क मार्ग अथवा पुराने राष्ट्रीय राजमार्गों से दिल्ली से सिलीगुड़ी की दूरी तय करने में यात्रियों को 28 से 32 घंटे तक का लंबा समय बिताना पड़ता है। प्रस्तावित नेटवर्क के पूरी तरह क्रियान्वित हो जाने के बाद यह समूची दूरी सिमटकर मात्र 15 से 16 घंटे की रह जाएगी। यात्रा समय आधा होने से निजी वाहन चालकों, सार्वजनिक बसों और विशेषकर मालवाहक वाहनों की आवाजाही को अभूतपूर्व रफ्तार मिलेगी।
इसके साथ ही दिल्ली-एनसीआर की परिधि में लगने वाले भीषण जाम से भी भारी राहत मिलेगी। वर्तमान व्यवस्था में पंजाब, जम्मू-कश्मीर और हरियाणा से बिहार या पश्चिम बंगाल जाने वाले अधिकांश भारी वाहन दिल्ली के बाहरी रिंग रोड अथवा ईस्टर्न पेरिफेरल पर निर्भर रहते हैं। नया गलियारा तैयार होने पर उत्तर भारत से पूर्वी भारत की ओर जाने वाला वाणिज्यिक ट्रैफिक राजधानी क्षेत्र में दाखिल हुए बिना ही शामली और गोरखपुर के रास्ते सीधे आगे निकल सकेगा। इससे दिल्ली के प्रदूषण और यातायात दबाव दोनों में कमी दर्ज की जाएगी।
कॉरिडोर की पहली कड़ी: 122 किमी लंबा अंबाला-शामली मार्ग
इस पूरे कॉरिडोर की शुरुआत उत्तर-पश्चिम दिशा में हरियाणा के अंबाला से होगी। लगभग 122 किलोमीटर लंबा अंबाला-शामली एक्सप्रेसवे हरियाणा को सीधे पश्चिमी उत्तर प्रदेश से जोड़ेगा। अंबाला भौगोलिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण जंक्शन है क्योंकि यह पंजाब, चंडीगढ़, हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर से आने वाले सभी प्रमुख मार्गों को समेटता है। इस नए खंड के निर्माण से इन उत्तरी राज्यों से पूर्वी भारत की तरफ जाने वाले वाहनों को दिल्ली की सीमा छुए बिना उत्तर प्रदेश में प्रवेश करने का एक सीधा और हाई-स्पीड विकल्प मिल जाएगा। वर्तमान में अंबाला से शामली जाने में करीब तीन घंटे लगते हैं, जो इस एक्सप्रेसवे के जरिए घटकर केवल सवा से डेढ़ घंटे रह जाएंगे। इसके अतिरिक्त हरियाणा के कुरुक्षेत्र और यमुनानगर जैसे प्रमुख औद्योगिक तथा कृषि क्षेत्रों को भी इस लिंक से सीधा लाभ पहुंचेगा।
उत्तर प्रदेश का सबसे लंबा मार्ग: 740 किमी का शामली-गोरखपुर खंड
इस विशाल परियोजना की दूसरी और सबसे व्यापक कड़ी शामली-गोरखपुर एक्सप्रेसवे है। लगभग 740 किलोमीटर की कुल लंबाई के साथ यह परियोजना पूरी होने पर उत्तर प्रदेश का सबसे लंबा एक्सप्रेसवे बनने जा रही है। यह मार्ग पश्चिमी उत्तर प्रदेश को सीधे तराई और पूर्वांचल के छोर यानी गोरखपुर से जोड़ेगा। उत्तर प्रदेश के करीब 22 जिलों को इस हाई-स्पीड सड़क नेटवर्क का सीधा लाभ मिलेगा, जिससे यह राज्य के लिए एक नई आर्थिक जीवनरेखा के रूप में उभरेगा।
वर्तमान सड़क ढांचे के तहत शामली से गोरखपुर की यात्रा पूरी करने में लगभग 14 से 15 घंटे का समय व्यतीत होता है। नया एक्सप्रेसवे बन जाने के बाद यह सफर घटकर केवल 7 से 8 घंटे में पूरा किया जा सकेगा। पश्चिमी यूपी के कृषि प्रधान व औद्योगिक हब से पूर्वांचल, बिहार और बंगाल की तरफ जाने वाले व्यापारिक माल की ढुलाई लागत और समय में इसके जरिए भारी बचत दर्ज होगी।
दिल्ली और उत्तराखंड के लिए शामली से सीधा संपर्क
यद्यपि यह कॉरिडोर सीधे दिल्ली के मुख्य शहर से होकर नहीं गुजरता, लेकिन राष्ट्रीय राजधानी को शामली के पास बन रहे दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे इंटरचेंज के माध्यम से इससे जोड़ा जाएगा। इस रणनीतिक इंटरचेंज के चलते दिल्ली-एनसीआर का ट्रैफिक सीधे शामली पहुंचकर अंबाला-गोरखपुर-सिलीगुड़ी मार्ग पर निर्बाध गति से दौड़ सकेगा। इसी इंटरचेंज के माध्यम से उत्तराखंड के देहरादून और हरिद्वार जैसे प्रमुख तीर्थ व पर्यटन स्थलों से आने-जाने वाले यात्रियों को भी उत्तर प्रदेश के पूर्वी जिलों और बिहार की ओर जाने के लिए सीधा एक्सप्रेसवे नेटवर्क मिल जाएगा।
पूर्वांचल से पूर्वोत्तर की राह: 519 किमी लंबा गोरखपुर-सिलीगुड़ी मार्ग
इस परियोजना की तीसरी और अंतिम कड़ी लगभग 519 किलोमीटर लंबा गोरखपुर-सिलीगुड़ी एक्सप्रेसवे है। यह हाई-स्पीड मार्ग पूर्वी उत्तर प्रदेश के गोरखपुर से प्रारंभ होकर उत्तर बिहार के समतल मैदानी इलाकों से गुजरते हुए पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी तक जाएगा। उत्तर बिहार के कई ऐसे क्षेत्रों को पहली बार राष्ट्रीय स्तर के आधुनिक हाई-स्पीड कॉरिडोर से जोड़ा जा रहा है, जो अब तक बेहतर सड़क बुनियादी ढांचे से वंचित थे।
विशेष रूप से बिहार के सीमावर्ती जिले जैसे किशनगंज और अररिया इस परियोजना के केंद्र में हैं। इन अपेक्षाकृत पिछड़े इलाकों में तेज कनेक्टिविटी आने से क्षेत्रीय व्यापार, कृषि मंडियों, गोदामों और लॉजिस्टिक्स पार्कों का जाल बिछेगा। वर्तमान में गोरखपुर से सिलीगुड़ी की यात्रा तय करने में 15 से 18 घंटे तक लग जाते हैं। नया मार्ग बनने के बाद यह समय घटकर लगभग 7 से साढ़े सात घंटे रह जाएगा, जिससे अंतर-राज्यीय आवागमन बेहद सुगम हो जाएगा।
रणनीतिक चिकन नेक और राष्ट्रीय सुरक्षा का पहलू
इस पूरे कॉरिडोर का अंतिम पड़ाव पश्चिम बंगाल का सिलीगुड़ी शहर है। सिलीगुड़ी को रणनीतिक शब्दावली में 'चिकन नेक' या सिलीगुड़ी कॉरिडोर के नाम से जाना जाता है। यह बेहद संकरा भू-भाग भारत के मुख्य भूभाग को पूर्वोत्तर के सभी आठ राज्यों से जोड़ता है। पड़ोसी देशों की सीमाओं के निकट होने के कारण इस क्षेत्र की सामरिक अहमियत अत्यधिक संवेदनशील है।
अंबाला से सिलीगुड़ी तक एक निर्बाध और चौड़े हाई-स्पीड एक्सप्रेसवे नेटवर्क का निर्माण केवल नागरिक परिवहन या व्यापार तक सीमित नहीं रहेगा। राष्ट्रीय सुरक्षा के दृष्टिकोण से यह भारतीय सशस्त्र बलों और भारी सैन्य साजो-सामान को पश्चिमी और उत्तरी सीमाओं से त्वरित गति से पूर्वोत्तर सीमावर्ती मोर्चों तक पहुंचाने के लिए एक मजबूत वैकल्पिक मार्ग साबित होगा। इससे देश की सैन्य लॉजिस्टिक्स क्षमता को अप्रत्याशित मजबूती मिलेगी।


















