अंतरराष्ट्रीय सीमा के समीप पाकिस्तान से ड्रोन माध्यम से मादक पदार्थों और अवैध हथियारों की तस्करी करने वाले एक बड़े नेटवर्क के खिलाफ पुलिस को बड़ी कामयाबी मिली है। मामले के मुख्य सरगना राकेश प्रजापत को पुलिस टीम ने पंजाब स्थित अमृतसर जामनगर एक्सप्रेसवे से हिरासत में ले लिया है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार आरोपी वहां से जोधपुर भागने की योजना बना रहा था, लेकिन गुप्त सूचना के आधार पर उसे दबोच लिया गया।
13 महीने की फरारी और फरीदकोट जेल से गिरोह का संचालन
सदर पुलिस थाने के सभागार में आयोजित पत्रकार वार्ता को संबोधित करते हुए पुलिस अधीक्षक मृदुल कच्छावा ने कार्रवाई का पूरा ब्योरा पेश किया। उन्होंने जानकारी दी कि आरोपी राकेश प्रजापत पिछले लगभग 13 महीनों से अपनी पहचान छिपाकर देश के विभिन्न राज्यों में पनाह ले रहा था। इससे पूर्व, वर्ष 2024-25 की अवधि में वह पंजाब की फरीदकोट जेल में करीब एक साल तक बंद रहा था। जांच में सामने आया कि सलाखों के पीछे रहते हुए भी उसने अपना नेटवर्क बंद नहीं होने दिया और वहीं से पूरे गिरोह का संचालन करता रहा।
तस्करी का तरीका और सोशल मीडिया पर दुबई किंग का जलवा
पुलिस की शुरुआती पूछताछ में यह तथ्य उजागर हुआ है कि आरोपी खुद कभी सीमावर्ती इलाकों में खेप लेने सामने नहीं आता था। वह अपने भरोसेमंद साथियों के जरिए पाकिस्तान से ड्रोन से गिराई गई हेरोइन और अवैध हथियारों को उठवाता था और फिर उसे सुरक्षित पंजाब की मंडियों तक भिजवा देता था। इस अवैध धंधे से अर्जित काली कमाई से वह बेहद विलासितापूर्ण जीवन शैली व्यतीत कर रहा था। पाली जिले के चौपड़ा गांव का मूल निवासी राकेश सोशल मीडिया पर काफी सक्रिय रहता था। उसने इंटरनेट पर दुबई किंग तथा सरकार नाम से समूह बना रखे थे, जिनमें वह स्वचालित हथियारों, नकदी और अपनी तस्वीरों के साथ शायरी पोस्ट करता था।
22 आपराधिक मामले और 75 हजार रुपये का घोषित इनाम
पुलिस अधीक्षक के अनुसार राकेश प्रजापत के विरुद्ध राजस्थान, पंजाब, गोवा और कर्नाटक के विभिन्न थानों में कुल 22 गंभीर आपराधिक मुकदमे दर्ज हैं। उसकी गिरफ्तारी के लिए बीकानेर, पाली, ब्यावर, पंजाब तथा गोवा की पुलिस लंबे समय से छापेमारी कर रही थी। आरोपी की धरपकड़ पर बीकानेर Range IG की ओर से 50,000 रुपये तथा पाली पुलिस द्वारा 25,000 रुपये का नकद इनाम घोषित किया गया था।
सहयोगी की गिरफ्तारी से खुला 50 करोड़ की खेप का राज
इस पूरे मामले की कड़ियां पूर्व में गिरफ्तार किए गए आरोपी वीरेन्द्र राजपुरोहित से की गई सघन पूछताछ के बाद जुड़ीं। 2 अगस्त को खाजूवाला स्थित चक 6 बीडी सीमा क्षेत्र में पाकिस्तानी ड्रोन द्वारा गिराई गई 10 किलोग्राम हेरोइन, 11 पिस्टल, 33 मैगजीन तथा 100 जिंदा कारतूस पुलिस ने जब्त किए थे। अंतरराष्ट्रीय बाजार में जब्त हेरोइन की कीमत लगभग 50 करोड़ रुपये आंकी गई थी। इस सिलसिले में ब्यावर के जैतारण निवासी वीरेन्द्र राजपुरोहित को गिरफ्तार किया गया था, जो जोधपुर में रह रहा था।
वीरेन्द्र ने खुलासा किया कि राकेश प्रजापत ने उसे यह खेप उठाने का काम सौंपा था। दोनों की पहली मुलाकात वर्ष 2018 में बेंगलुरु में हुई थी। 15 जुलाई 2026 को राकेश ने जलालाबाद से वर्चुअल नंबर का उपयोग कर वीरेन्द्र से संपर्क साधा और उसे खाजूवाला बॉर्डर से माल उठाकर पंजाब पहुंचाने का निर्देश दिया। इसके बाद वीरेन्द्र ने 18 जुलाई को इलाके की रेकी की और 1 अगस्त को खेप लेकर निकलते समय 32 हेड के पास पकड़ा गया।
70 करोड़ की पुरानी बरामदगी और हवाला नेटवर्क पर शिकंजा
जांच अधिकारियों ने बताया कि अप्रैल 2026 में खाजूवाला पूगल मार्ग पर लावारिस स्कूटी से बरामद 14 किलोग्राम हेरोइन (जिसकी अनुमानित कीमत 70 करोड़ रुपये थी) के तार भी राकेश प्रजापत से जुड़े पाए गए थे। पुलिस को उम्मीद है कि राकेश की रिमांड के दौरान पाकिस्तान में बैठे उसके आकाओं, हवाला के जरिए पैसों के लेनदेन और भारत में फैले अन्य मददगारों के बारे में कई महत्वपूर्ण सुराग मिलेंगे। वर्तमान में जांच एजेंसियां आरोपी की चल अचल संपत्तियों और वित्तीय स्रोतों की गहनता से जांच कर रही हैं।



















