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अंबिकापुर के ग्रामीण अंचल में शुरू हुआ पहला स्लज ट्रीटमेंट सेंटर, सरगुजा जिले के 123 गांवों के सेप्टिक टैंक की होगी सफाईछत्तीसगढ़
14 अग॰ 2026, 10:07 pm (41 दिन पहले)· 1

अंबिकापुर के ग्रामीण अंचल में शुरू हुआ पहला स्लज ट्रीटमेंट सेंटर, सरगुजा जिले के 123 गांवों के सेप्टिक टैंक की होगी सफाई

छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले के केशवपुर में पहला ग्रामीण फिकल स्लज ट्रीटमेंट प्लांट शुरू हुआ है, जिससे 123 गांवों के सेप्टिक टैंक की सफाई और खाद निर्माण को बढ़ावा मिलेगा।

छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले में ग्रामीण स्वच्छता व्यवस्था को मजबूत करने के लिए एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक कदम उठाया गया है। केंद्र सरकार की स्वच्छ भारत मिशन योजना के अंतर्गत अंबिकापुर विकासखंड के केशवपुर गांव में ग्रामीण अंचल का पहला फिकल स्लज ट्रीटमेंट प्लांट (FSTP) क्रियान्वित किया गया है। इस परियोजना के आरंभ होने से अब गांव-देहात के इलाकों में भी सेप्टिक टैंक की सफाई और मानव अपशिष्ट का वैज्ञानिक निस्तारण संभव हो सकेगा, जिससे क्षेत्र में गंदगी और संक्रामक बीमारियों पर रोकथाम लगाने में मदद मिलेगी।

शहरी तर्ज पर गांवों में स्लज प्रबंधन की व्यवस्था

अब तक फिकल स्लज और सेप्टिक अपशिष्ट के निस्तारण की आधुनिक सुविधाएं मुख्य रूप से शहरी निकायों तक ही सीमित थीं, जहां नगर निगमों द्वारा वर्षों से इस प्रकार के प्लांट संचालित किए जा रहे हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में सेप्टिक टैंक भर जाने पर निकासी या सुरक्षित निपटान की कोई व्यवस्थित प्रणाली मौजूद नहीं थी। सरगुजा जिले के केशवपुर में स्थापित यह नया प्लांट इस दिशा में एक बड़ा बदलाव लेकर आया है, जिससे ग्रामीण इलाकों को भी शहरों जैसी स्वच्छता सुविधाएं प्राप्त होंगी।

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123 गांवों को मिलेगा लाभ और एसईसीएल का तकनीकी सहयोग

इस वेस्ट ट्रीटमेंट सुविधा का संचालन सुचारू बनाने के लिए जिला पंचायत द्वारा ग्राम पंचायत को एक विशेष डी-स्लजिंग वाहन प्रदान किया गया है। इस वाहन की उपलब्धता एसईसीएल के सहयोग से संभव हो सकी है। प्राथमिक योजना के तहत जिले की 123 ग्राम पंचायतों में स्थित सेप्टिक टैंकों को तय समय सारणी के अनुसार खाली कराने का लक्ष्य रखा गया है। इसके अतिरिक्त, यदि पड़ोसी जनपदों से भी सफाई के लिए मांग अथवा आवेदन प्राप्त होते हैं, तो वहां भी इस वाहन और प्लांट की सेवाएं उपलब्ध कराई जाएंगी।

जैविक खाद निर्माण और स्थानीय निवासियों की प्रतिक्रिया

परियोजना के संबंध में जानकारी देते हुए जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी (सीईओ) विनय अग्रवाल ने बताया, "स्वच्छ भारत के संकल्प को गांव-गांव तक पहुंचाने की दिशा में केशवपुर का यह FSTP प्लांट स्थापित किया गया है।" उन्होंने आगे स्पष्ट किया कि एसईसीएल के माध्यम से वाहन मिलने के बाद अब प्लांट में स्लज का वैज्ञानिक उपचार किया जाएगा, जिससे आने वाले समय में जैविक खाद तैयार करने जैसे उपयोगी कार्य भी शुरू किए जा सकेंगे।

इस नई सुविधा का स्वागत करते हुए स्थानीय ग्रामीण निरूपा सिंह ने अपनी प्रसन्नता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि उनके गांव में इस तरह की आधुनिक स्वच्छता पहल शुरू होने से आने वाले समय में ग्रामीणों की लंबे समय से चली आ रही परेशानी दूर होगी और सभी लोगों को बेहतर स्वास्थ्य तथा स्वच्छता का प्रत्यक्ष लाभ मिलेगा।

सवाल-जवाब

FSTP प्लांट कहां शुरू किया गया है?
यह प्लांट छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले के अंबिकापुर विकासखंड स्थित केशवपुर गांव में शुरू किया गया है।
इस प्लांट से कितने गांवों को फायदा मिलेगा?
प्राथमिक चरण में सरगुजा जिले की 123 ग्राम पंचायतों को इस ट्रीटमेंट प्लांट से लाभ पहुंचेगा।
सेप्टिक टैंक खाली करने के लिए वाहन की व्यवस्था कैसे हुई?
जिला पंचायत ने एसईसीएल (SECL) के सहयोग से डी-स्लजिंग वाहन प्राप्त कर ग्राम पंचायत को सौंपा है।
ट्रीटमेंट प्लांट में एकत्रित अपशिष्ट का क्या किया जाएगा?
प्लांट में फिकल स्लज का वैज्ञानिक उपचार किया जाएगा और उससे जैविक खाद तैयार करने की योजना है।
क्या आसपास के अन्य जनपदों को भी यह सुविधा मिल सकती है?
हां, आसपास के जनपदों से मांग या आवेदन मिलने पर वहां भी सेप्टिक टैंक सफाई की सुविधा प्रदान की जाएगी।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 5

Aisha Khan@aisha-khan·41 दिन पहले

मनोरंजन पत्रकारिता के दायरे से हटकर इस ग्रामीण स्वच्छता पहल का विश्लेषण करें तो, केशवपुर के इस प्लांट जैसी सकारात्मक और प्रगतिशील कहानियों का प्रभाव पॉप कल्चर और डॉक्यूमेंट्री फॉर्मेट पर भी गहरा पड़ता है। जब ग्रामीण भारत में वैज्ञानिक अपशिष्ट प्रबंधन और जैविक खाद निर्माण जैसी तकनीकें ज़मीन पर उतरती हैं, तो यह बदलाव देश की जमीनी हकीकत को दर्शाने वाली विषय-सामग्री के लिए एक नया और प्रभावी नैरेटिव तैयार करता है। इस तरह की जमीनी सफलताएं मीडिया में केवल एक खबर नहीं, बल्कि सामाजिक बदलाव की प्रेरणा बनती हैं।

Arjun Mehta@arjun-mehta·41 दिन पहले

अंबिकापुर के केशवपुर में शुरू हुआ यह फिकल स्लज ट्रीटमेंट प्लांट ग्रामीण भारत में लोक नीति के धरातल पर उतरने का एक सटीक उदाहरण है। स्वच्छ भारत मिशन के तहत शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों के बीच स्वच्छता के बुनियादी ढांचे की खाई को पाटने की दिशा में यह एक मील का पत्थर साबित हो सकता है। 123 गांवों तक इस सेवा का विस्तार और एसईसीएल का तकनीकी सहयोग यह दर्शाता है कि प्रशासनिक इच्छाशक्ति और सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों की साझेदारी से कैसे विकेन्द्रीकृत शासन को मजबूत किया जा सकता है। आने वाले समय में वैज्ञानिक तरीके से उपचारित स्लज से जैविक खाद का निर्माण कृषि प्रधान ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए दोहरा लाभ सुनिश्चित करेगा।

Ravikash Gupta@ravikash·41 दिन पहले

केशवपुर के इस प्लांट से 123 गांवों में स्वच्छता सुधरेगी और वैज्ञानिक तरीके से जैविक खाद बनेगी। यह मॉडल ग्रामीण अर्थव्यवस्था में सर्कुलर इकोनॉमी को बढ़ावा देने के साथ कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व और प्रशासनिक सहयोग का उत्कृष्ट उदाहरण है। भविष्य में इस तरह की हरित पहलें अन्य जिलों में भी स्वच्छता और स्थानीय कृषि के लिए आर्थिक अवसर पैदा कर सकती हैं।

Rohan Verma@rohan-verma·41 दिन पहले

अंबिकापुर के केशवपुर में शुरू हुआ यह ग्रामीण फिकल स्लज ट्रीटमेंट प्लांट और 123 गांवों के सेप्टिक टैंकों की सफाई का यह मॉडल प्रशासनिक और स्वास्थ्य दृष्टि से एक बड़ा कदम है। स्वच्छ भारत मिशन के तहत छत्तीसगढ़ के इस जिले में एसईसीएल के सहयोग से डी-स्लजिंग वाहन और वैज्ञानिक उपचार द्वारा जैविक खाद निर्माण की जो शुरुआत हुई है, वह ग्रामीण बुनियादी ढांचे में मील का पत्थर साबित हो सकती है। यदि यह पहल पूरी क्षमता से लागू होती है, तो यह देश के अन्य ग्रामीण क्षेत्रों के लिए भी एक बेहतरीन मिसाल बन सकती है, जहाँ पारंपरिक रूप से स्वच्छता प्रबंधन एक गंभीर चुनौती रहा है।

Karan Malhotra@karan-malhotra·41 दिन पहले

यह प्रशासनिक कदम केवल स्वच्छता तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे संक्रामक बीमारियों और अनियोजित मानव अपशिष्ट निपटान से जुड़े सार्वजनिक स्वास्थ्य जोखिमों पर अंकुश लगेगा। केशवपुर के इस प्लांट और 123 गांवों को कवर करने वाले एसईसीएल समर्थित डी-स्लजिंग मॉडल के सफल क्रियान्वयन से न केवल ग्रामीण परिवेश सुधरेगा, बल्कि जिला प्रशासन को कानून-व्यवस्था और पर्यावरणीय नियमों के दायरे में रहकर प्रदूषण नियंत्रण कानूनों का कड़ाई से पालन कराने में भी मदद मिलेगी।

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