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आजमगढ़ के लसड़ा कला में धान की निराई के दौरान गिरी आकाशीय बिजली, एक महिला की मौत और छह गंभीर रूप से झुलसींउत्तर प्रदेश
27 अग॰ 2026, 11:56 pm (62 दिन पहले)· 4

आजमगढ़ के लसड़ा कला में धान की निराई के दौरान गिरी आकाशीय बिजली, एक महिला की मौत और छह गंभीर रूप से झुलसीं

उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ जिले के लसड़ा कला गांव में खेत में काम कर रही महिलाओं पर आकाशीय बिजली गिरने से 40 वर्षीय नीतू देवी की मौत हो गई, जबकि छह अन्य महिलाएं झुलस गईं।

उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ जिले में गुरुवार को एक दर्दनाक हादसा सामने आया, जहां बरदह थाना क्षेत्र के अंतर्गत लसड़ा कला गांव के सिवान में धान के खेत में काम कर रही महिलाओं पर अचानक आकाशीय बिजली गिर गई। इस भीषण हादसे में 40 वर्षीय नीतू देवी की मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई, जबकि छह अन्य महिलाएं गंभीर रूप से झुलस गईं। अचानक हुए इस हादसे के बाद खेत में काम कर रहे अन्य ग्रामीणों के बीच अफरातफरी और चीख-पुकार मच गई। स्थानीय लोगों ने तुरंत राहत कार्य शुरू करते हुए सभी प्रभावित महिलाओं को नजदीकी स्वास्थ्य केंद्रों में पहुंचाया।

खेत में निराई के दौरान हुआ हादसा

प्राप्त जानकारी के अनुसार, लसड़ा कला गांव के सिवान स्थित धान के खेत में कई महिलाएं एक साथ खरपतवार निकालने यानी निराई का कार्य कर रही थीं। इसी दौरान आसमान में घने बादल छा गए और अचानक एक तेज कड़कड़ाहट की आवाज के साथ आकाशीय बिजली सीधे खेत में आ गिरी। इसकी चपेट में आने से हरिकांत राम की पत्नी नीतू देवी (40), संतोष की पत्नी अनीता देवी, राजकुमार की पत्नी रेनू देवी, शाहजू राम की पत्नी राधिका देवी, जगदीश की पुत्री सरिता, रामभुवन की पुत्री संजना और फूलचंद्र की पत्नी गीता देवी गंभीर रूप से झुलस गईं।

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अस्पताल में महिला को घोषित किया मृत, दो गंभीर महिलाएं जौनपुर रेफर

हादसे के तुरंत बाद ग्रामीणों की मदद से नीतू देवी, अनीता देवी और रेनू देवी को तत्काल सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) महुजा ले जाया गया। वहां डॉक्टरों ने स्वास्थ्य जांच के बाद नीतू देवी को मृत घोषित कर दिया। वहीं, झुलसी महिलाओं में शामिल अनीता देवी गर्भवती हैं। अनीता देवी और रेनू देवी दोनों की नाजुक हालत को देखते हुए डॉक्टरों ने प्राथमिक उपचार के बाद उन्हें बेहतर और विशेषज्ञ इलाज के लिए जिला अस्पताल जौनपुर के लिए रेफर कर दिया।

चार अन्य घायलों का उपचार जारी

दूसरी तरफ, हादसे में घायल हुई चार अन्य महिलाओं राधिका देवी, सरिता, संजना और गीता देवी को 108 एंबुलेंस सेवा की मदद से प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHC) ठेकमा ले जाया गया। ठेकमा केंद्र पर तैनात डॉक्टरों ने चारों घायलों का प्राथमिक उपचार किया और उनकी स्थिति की गंभीरता को देखते हुए उन्हें भी आगे के इलाज के लिए जिला अस्पताल रेफर कर दिया। फिलहाल सभी घायलों का इलाज जारी है।

परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़, पुलिस ने शुरू की कार्रवाई

नीतू देवी की अकस्मात मृत्यु की खबर जैसे ही उनके घर पहुंची, परिजनों में कोहराम मच गया। नीतू देवी अपने पीछे तीन बेटों और एक बेटी का रोता-बिलखता परिवार छोड़ गई हैं। उनके पति मजदूरी करके परिवार का पालन-पोषण करते हैं। इस दुखद घटना ने आर्थिक रूप से कमजोर परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया है। घटना की सूचना मिलते ही बरदह पुलिस बल मौके पर पहुंचा और शव को अपने कब्जे में लिया। थाना अध्यक्ष चंद्रदीप कुमार ने बताया कि पुलिस ने आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी करते हुए शव का पंचनामा तैयार किया और उसे पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है।

ग्रामीणों ने की आर्थिक मुआवजे की मांग

खेत में आकाशीय बिजली गिरने की इस घटना से लसड़ा कला और आसपास के ग्रामीण इलाकों में गहरा सन्नाटा और दहशत का माहौल है। स्थानीय ग्रामीणों और पंचायत प्रतिनिधियों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि मृतक नीतू देवी के आश्रित परिजनों को सरकारी नियमानुसार तत्काल उचित आर्थिक मुआवजा प्रदान किया जाए। साथ ही, हादसे में झुलसी सभी छह महिलाओं को शासन की ओर से मुफ्त और बेहतर चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं।

उत्तर प्रदेश में बिजली गिरने की हालिया घटनाएं

गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों में मानसून सत्र के दौरान आकाशीय बिजली गिरने से लगातार जान-माल का नुकसान हो रहा है। हाल ही में मुरादाबाद जिले में बारिश से बचने के लिए एक बड़े पेड़ के नीचे खड़े पांच लोगों पर आकाशीय बिजली गिर गई थी, जिसमें दो लोगों की मौके पर ही मौत हो गई थी और तीन लोग गंभीर रूप से घायल हुए थे। इसके अलावा, राज्य में पूर्व में हुई भारी बारिश, तूफान और बिजली गिरने की घटनाओं में 18 लोगों की जान जा चुकी है, 5 लोग घायल हुए थे और 24 मवेशियों की मौत हुई थी, जिसके बाद मुख्यमंत्री द्वारा पीड़ित परिवारों को राहत राशि देने के निर्देश जारी किए गए थे।

सवाल-जवाब

आजमगढ़ में आकाशीय बिजली गिरने की घटना कहां हुई?
यह घटना उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ जिले के बरदह थाना क्षेत्र स्थित लसड़ा कला गांव के सिवान (खेत) में हुई।
हादसे में कुल कितने लोग प्रभावित हुए?
हादसे में 40 वर्षीय नीतू देवी की मौत हो गई और छह अन्य महिलाएं गंभीर रूप से झुलस गईं।
घायल महिलाओं को किस अस्पताल में भर्ती कराया गया है?
गंभीर रूप से झुलसी अनीता देवी और रेनू देवी को जिला अस्पताल जौनपुर रेफर किया गया है, जबकि चार अन्य महिलाओं को ठेकमा प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र से जिला अस्पताल भेजा गया।
हादसे के समय महिलाएं क्या कर रही थीं?
सभी महिलाएं धान के खेत में खरपतवार निकालने यानी निराई का कार्य कर रही थीं।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 5

Omar AL Mansoori@omar-mansoori·62 दिन पहले

यह दुर्घटना ग्रामीण अर्थव्यवस्था और कृषि श्रमिकों की सुरक्षा पर जलवायु परिवर्तन के बढ़ते गंभीर प्रभावों को उजागर करती है। धान के खेतों में खुले आसमान के नीचे काम करने वाले किसान और मजदूर अत्यधिक जोखिम में रहते हैं, खासकर जब मौसम अचानक बदलता है। इस घटना से यह स्पष्ट है कि कृषि क्षेत्रों में आकाशीय सुरक्षा उपकरणों, समय पर मिलने वाली मौसम चेतावनियों और विशेष आपदा प्रशिक्षण की घोर कमी है, जिससे गरीब परिवारों पर इस तरह की मानवीय और आर्थिक आपदाएं बार-बार टूटती हैं।

Arjun Mehta@arjun-mehta·62 दिन पहले

यह हादसा ग्रामीण क्षेत्रों में जलवायु परिवर्तन और मौसम चेतावनी प्रणालियों की विफलता को उजागर करता है। खेतों में खुले आसमान के नीचे काम करने वाले किसानों और श्रमिकों के लिए शुरुआती चेतावनी तंत्र का अभाव और आपदा राहत नीतियों का जमीनी स्तर पर कमजोर क्रियान्वयन गंभीर चिंता का विषय है।

Ravikash Gupta@ravikash·62 दिन पहले

यह त्रासदी ग्रामीण भारत की ग्रामीण आजीविका पर जलवायु परिवर्तन के आर्थिक और मानवीय दुष्प्रभावों को स्पष्ट रूप से दर्शाती है। खुले आसमान के नीचे कृषि कार्य करने वाले दैनिक मजदूर वर्ग के लिए मौसम की अग्रिम सूचना और बीमा सुरक्षा का अभाव एक बड़ी संरचनात्मक कमजोरी है, जो ऐसे गरीब परिवारों को आर्थिक तंगी और गहरे संकट में धकेल देती है।

Karan Malhotra@karan-malhotra·62 दिन पहले

यह घटना कृषि क्षेत्र में काम करने वाले श्रमिकों के लिए प्राकृतिक आपदाओं से सुरक्षा के गंभीर इंतजामों की जरूरत को रेखांकित करती है। खेतों में खुले आसमान के नीचे काम करने वाले किसानों और मजदूरों को मौसम की चेतावनी और बिजली से बचाव के सुरक्षा उपायों के प्रति जागरूक करना प्रशासन और आपदा प्रबंधन की प्राथमिकता होनी चाहिए। साथ ही, पीड़ित मजदूर परिवार को तत्काल आर्थिक सहायता मिलना न्यायसंगत होगा।

Rohan Verma@rohan-verma·62 दिन पहले

यह हादसा स्पष्ट करता है कि ग्रामीण अंचल के खुले खेतों में काम करने वाले किसान और मजदूर मौसम विभाग की त्वरित चेतावनियों और सुरक्षित आश्रयों से कितने दूर हैं। मानसून सत्र के दौरान इस तरह की आकाशीय बिजली की घटनाओं से होने वाली जनहानि को रोकने के लिए कृषि बाहुल्य क्षेत्रों में अर्ली-वार्निंग सिस्टम और सुरक्षा उपायों को जमीन पर उतारना अब और टाला नहीं जा सकता।

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