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अरुणाचल प्रदेश के पूर्वी सियांग में शिक्षकों की कमी पर 12 घंटे का बंद, 63 तबादलों पर रोक लगाने की मांगअरुणाचल प्रदेश
7 अक्तू॰ 2026, 1:40 pm (22 दिन पहले)· 3

अरुणाचल प्रदेश के पूर्वी सियांग में शिक्षकों की कमी पर 12 घंटे का बंद, 63 तबादलों पर रोक लगाने की मांग

अरुणाचल प्रदेश के पूर्वी सियांग जिले में सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की भारी कमी और 63 शिक्षकों के प्रस्तावित तबादले के विरोध में नौ संगठनों ने 12 घंटे का बंद रखा।

अरुणाचल प्रदेश के पूर्वी सियांग जिले में सरकारी विद्यालयों के भीतर शिक्षकों के खाली पड़े पदों को तत्काल भरने की मांग को लेकर बुधवार को बारह घंटे का पूर्ण बंद रखा गया। पासीघाट समेत जिले के विभिन्न हिस्सों में सुबह 5 बजे से शुरू हुआ यह बंद शाम 5 बजे तक प्रभावी रखने का आह्वान किया गया था। इस विरोध प्रदर्शन की अगुवाई लेगॉन्ग बांग्गो स्टूडेंट्स यूनियन समेत कुल नौ प्रमुख स्थानीय संगठनों ने की, जिन्होंने प्रशासन और राज्य सरकार के समक्ष विद्यार्थियों की पढ़ाई पर पड़ रहे प्रतिकूल असर का मुद्दा प्रमुखता से उठाया।

खाली पदों को भरने और 63 तबादलों पर रोक की मुख्य मांग

आंदोलनकारी संगठनों का कहना है कि पूर्वी सियांग के सरकारी विद्यालयों में पहले से ही शिक्षकों की भारी किल्लत है। ऐसे संवेदनशील समय में जिले से 63 शिक्षकों के प्रस्तावित तबादले की तैयारी की जा रही है, जिसका संगठनों ने पुरजोर विरोध किया है। छात्र और सामाजिक संगठनों ने मांग की है कि इन सभी 63 शिक्षकों के तबादलों पर तत्काल प्रभाव से रोक लगाई जाए और इस प्रक्रिया को फिलहाल स्थगित रखा जाए। संगठनों ने स्पष्ट किया कि जब तक नए शिक्षकों की नियुक्ति नहीं हो जाती, तब तक किसी भी शिक्षक को जिले से बाहर भेजना विद्यार्थियों के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने जैसा होगा।

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सरकारी शिक्षण संस्थानों की व्यवस्था चरमराने की चेतावनी

विरोध में शामिल समूहों ने तर्क दिया कि यदि पहले से स्टाफ की कमी से जूझ रहे स्कूलों से और अध्यापकों को हटा दिया गया, तो जिले की पूरी सरकारी शिक्षा प्रणाली चरमरा जाएगी। कई ग्रामीण और कस्बा स्तर के विद्यालयों में बुनियादी विषयों को पढ़ाने के लिए पर्याप्त शिक्षक उपलब्ध नहीं हैं। प्रदर्शनकारियों के अनुसार, इस बंद का मुख्य मकसद अरुणाचल प्रदेश सरकार और जिला प्रशासन का ध्यान सरकारी स्कूलों के बिगड़ते शैक्षणिक हालात की ओर खींचना है, ताकि नीति निर्माता इस दिशा में फौरी कदम उठा सकें।

प्रशासनिक जवाब की प्रतीक्षा और छात्रों के भविष्य की चिंता

जिले भर में बंद का आह्वान करते हुए संगठनों ने प्रशासन से आग्रह किया है कि खाली पड़े पदों को प्राथमिकता के आधार पर भरा जाए और ट्रांसफर सूची की नए सिरे से समीक्षा की जाए ताकि स्कूलों की जरूरतें पूरी हो सकें। संगठनों का मानना है कि कक्षाओं का सुचारू संचालन सुनिश्चित करने और बच्चों की पढ़ाई में किसी भी प्रकार का व्यवधान रोकने के लिए पर्याप्त संख्या में शिक्षकों की तैनाती अनिवार्य है। पूरे जिले में बंद का व्यापक असर देखने को मिला, जबकि राज्य सरकार अथवा जिला प्रशासन की तरफ से इन मांगों पर औपचारिक प्रतिक्रिया का इंतजार किया जा रहा है।

सवाल-जवाब

पूर्वी सियांग में 12 घंटे का बंद क्यों बुलाया गया?
सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की भारी कमी को दूर करने और 63 शिक्षकों के प्रस्तावित तबादले पर रोक लगाने की मांग को लेकर यह बंद आयोजित किया गया।
इस बंद का समय क्या था?
यह बंद बुधवार सुबह 5 बजे शुरू हुआ और शाम 5 बजे तक कुल 12 घंटों के लिए लागू रहा।
प्रदर्शन में कौन-से संगठन शामिल थे?
इस बंद में लेगॉन्ग बांग्गो स्टूडेंट्स यूनियन समेत कुल नौ स्थानीय संगठनों ने हिस्सा लिया।
प्रदर्शनकारी संगठनों की प्रमुख मांगें क्या हैं?
संगठन जिले के सरकारी स्कूलों में खाली पड़े शिक्षक पदों को जल्द भरने और 63 शिक्षकों के तबादले को तुरंत स्थगित करने की मांग कर रहे हैं।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 5

Arshdeep Ahluwalia@arshdeep-ahluwalia·21 दिन पहले

बच्चों की पढ़ाई के साथ ऐसा खिलवाड़ देखकर मुझे अपने वो दिन याद आ गए जब हमारे सरकारी स्कूल में महीनों तक गणित के शिक्षक ही नहीं थे। जब तक नए टीचर न आएं, तब तक मौजूद स्टाफ को हटाना किसी भी सूरत में ठीक नहीं है।

Arjun Mehta@arjun-mehta·21 दिन पहले

जब पहले से ही शिक्षकों की भारी कमी है, तब 63 शिक्षकों के तबादले की योजना समझ से बाहर है। ऐसी नीतियों से ग्रामीण इलाकों के बच्चों की पढ़ाई का बंटाधार होना तय है।

Ananya Iyer@ananya-iyer·21 दिन पहले

अर्जुन जी, आपकी बात सही है लेकिन क्या पता इन तबादलों के पीछे कोई प्रशासनिक मजबूरी हो, जिसके बारे में हमें पूरी जानकारी न हो।

Rohan Verma@rohan-verma·22 दिन पहले

बच्चों की पढ़ाई से खिलवाड़ कर रहे हैं। जब पहले से ही शिक्षकों की कमी है, तो बिना नई भर्ती के ट्रांसफर करना गलत है।

Ravikash Gupta@ravikash·22 दिन पहले

रोहन जी, बात सही है आपकी, पर क्या पता एडमिनिस्ट्रेशन के पास कोई मजबूरी हो या ट्रांसफर किसी प्रशासनिक जरूरत से हो रहे हों?

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