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अरुणाचल प्रदेश की पर्यावरण एक्टिविस्ट भानु तातक पर एफसीआरए उल्लंघन के आरोप में सीबीआई ने दर्ज किया केसअरुणाचल प्रदेश
15 सित॰ 2026, 10:01 pm (42 दिन पहले)· 0

अरुणाचल प्रदेश की पर्यावरण एक्टिविस्ट भानु तातक पर एफसीआरए उल्लंघन के आरोप में सीबीआई ने दर्ज किया केस

केंद्रीय जांच ब्यूरो ने अरुणाचल प्रदेश की वकील और एक्टिविस्ट भानु तातक के खिलाफ विदेशी योगदान नियमन अधिनियम के कथित उल्लंघन को लेकर मामला दर्ज किया है।

केंद्रीय जांच एजेंसी ने अरुणाचल प्रदेश की एक जानी-मानी वकील और पर्यावरण कार्यकर्ता भानु तातक के खिलाफ एफसीआरए नियमों के कथित उल्लंघन का मामला दर्ज किया है। जांच एजेंसी के पास दर्ज एफआईआर में यह आरोप लगाया गया है कि उन्होंने विदेशी संस्थाओं और विदेशी नागरिकों से मिलने वाले पैसे सीधे अपने निजी बचत बैंक खाते में मंगवाए, जिसके लिए कानून के तहत जरूरी पंजीकरण या पूर्व अनुमति नहीं ली गई थी।

विदेशीFunding और मनी ट्रेल के आरोप

जांच एजेंसी के दस्तावेजों के अनुसार, यह विदेशी राशि फिलीपींस स्थित एशिया इंडिजिनस पीपल्स नेटवर्क ऑन एक्सट्रैक्टिव इंडस्ट्रीज एंड एनर्जी, इंडिजिनस पीपल्स राइट्स इंटरनेशनल, आयरलैंड स्थित फ्रंट लाइन और यूनाइटेड किंगडम स्थित ह्यूमन राइट्स रिसोर्स सेंटर जैसी संस्थाओं से भेजी गई थी। प्रारंभिक जांच में यह भी दावा किया गया है कि इस पैसे का इस्तेमाल अरुणाचल प्रदेश में बड़े पैमाने पर प्रस्तावित जलविद्युत परियोजनाओं के खिलाफ विरोध प्रदर्शनों को आयोजित करने और उन्हें जारी रखने के लिए किया गया था।

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किन धाराओं के तहत हुई कार्रवाई

इस एफआईआर में भानु तातक के अलावा कुछ अज्ञात लोगों को भी आरोपी बनाया गया है। उन पर विदेशी योगदान (विनियमन) अधिनियम, 2010 की धाराओं 11(1), 17, 19 और 35 के तहत कानूनी कार्रवाई शुरू की गई है। वित्तीय मामलों की जांच में यह बात भी सामने आई कि उन्होंने वित्तीय वर्ष 2017-18 से लेकर 2025-26 के दौरान अपने आयकर रिटर्न दाखिल नहीं किए थे और इन विदेशी संगठनों से प्राप्त धनराशि का खुलासा भी नहीं किया था।

जलविद्युत परियोजनाओं का विरोध

भानु तातक वर्तमान में सियांग इंडिजिनस फार्मर्स फोरम की कानूनी सलाहकार हैं और इसके साथ ही वह दिबांग रेजिस्टेंस नामक नागरिक समाज संगठन की समन्वयक की जिम्मेदारी भी संभालती हैं। ये दोनों ही संगठन राज्य में बनने वाली कई प्रस्तावित पनबिजली परियोजनाओं के मुखर विरोधी रहे हैं। सियांग इंडिजिनस फार्मर्स फोरम सियांग नदी पर बनने वाली 12,500 मेगावाट क्षमता वाली सियांग अपर मल्टीपर्पज प्रोजेक्ट का विरोध कर रहा है, जबकि दिबांग रेजिस्टेंस संगठन ने 2,880 मेगावाट की दिबांग मल्टीपर्पज हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट के खिलाफ अपना अभियान चलाया हुआ है। इन दोनों ही ऊर्जा परियोजनाओं को लेकर स्थानीय आदिवासी समुदायों और पर्यावरणविदों की तरफ से लगातार चिंताएं जताई जाती रही हैं, जिनका मुख्य तर्क इन योजनाओं के संभावित सांस्कृतिक, पर्यावरणीय और सुरक्षा संबंधी बुरे प्रभावों से जुड़ा है।

सवाल-जवाब

भानु तातक के खिलाफ किस एजेंसी ने मामला दर्ज किया है?
केंद्रीय जांच ब्यूरो ने उनके खिलाफ विदेशी योगदान नियमन अधिनियम के उल्लंघन का मामला दर्ज किया है।
भानु तातक पर मुख्य आरोप क्या है?
उन पर बिना पंजीकरण या पूर्व अनुमति के विदेशी संस्थाओं से 17.6 लाख रुपये अपने निजी बैंक खाते में लेने का आरोप है।
किन विदेशी संगठनों से पैसे मिलने का दावा किया गया है?
फिलीपींस, आयरलैंड और यूनाइटेड किंगडम के कुछ मानवाधिकार और पर्यावरण संगठनों से पैसे मिलने की बात कही गई है।
भानु तातक किन स्थानीय संगठनों से जुड़ी हैं?
वह सियांग इंडिजिनस फार्मर्स फोरम की कानूनी सलाहकार और दिबांग रेजिस्टेंस की समन्वयक हैं।
यह फंड किस उद्देश्य के लिए इस्तेमाल होने का आरोप है?
जांच एजेंसी का आरोप है कि इस पैसे का उपयोग अरुणाचल प्रदेश में जलविद्युत परियोजनाओं के खिलाफ विरोध प्रदर्शनों को चलाने के लिए किया गया था।
किन जलविद्युत परियोजनाओं का विरोध किया जा रहा है?
सियांग अपर मल्टीपर्पज प्रोजेक्ट और दिबांग मल्टीपर्पज हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट का विरोध किया जा रहा है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 5

Neha Verma@neha-verma·42 दिन पहले

भानु तातक पर एफसीआरए उल्लंघन और आयकर रिटर्न दाखिल न करने के आरोप पर्यावरण और विकास के बीच चल रहे संघर्ष में वित्तीय पारदर्शिता के महत्व को रेखांकित करते हैं। सियांग और दिबांग परियोजनाओं के विरोध के बीच विदेशी फंड्स की जांच से यह तय होगा कि नागरिक समाज संगठनों की फंडिंग और वैधानिक अनुपालन का दायरा किस दिशा में आगे बढ़ेगा।

Li Wei@li-wei·42 दिन पहले

यह मामला भारत में सीमा पार से मिलने वाली फंडिंग और घरेलू पर्यावरण आंदोलनों के बीच के संवेदनशील समीकरण को उजागर करता है। अरुणाचल प्रदेश जैसे रणनीतिक रूप से संवेदनशील सीमावर्ती राज्य में विदेशी संस्थाओं से सीधे निजी खातों में धन आना और कर विवरण छुपाना राष्ट्रीय सुरक्षा और वित्तीय पारदर्शिता के कड़े नियामक दायरे को स्पष्ट करता है। भविष्य में इस कार्रवाई से पूर्वोत्तर के विकास प्रोजेक्ट्स और नागरिक समूहों के विदेशी वित्तीय लेन-देन की जांच और तेज हो सकती है।

Arjun Mehta@arjun-mehta·42 दिन पहले

यह मामला भारत में विकास परियोजनाओं और पर्यावरण संरक्षण के बीच चल रहे भू-राजनीतिक व नीतिगत संघर्ष का एक और उदाहरण है। अरुणाचल प्रदेश की जलविद्युत परियोजनाएं रणनीतिक दृष्टि से बेहद संवेदनशील हैं, और विदेशी वित्त पोषण की यह जांच इस बात को रेखांकित करती है कि कैसे राज्य सीमावर्ती क्षेत्रों में नागरिक समाज के आंदोलनों पर केंद्रीय एजेंसियां कड़ी नजर रख रही हैं। आगे चलकर यह मामला एक्टिविज़्म के वित्त पोषण और गैर-सरकारी संगठनों के विनियामक अनुपालन पर नीतिगत बहस को और तेज कर सकता है।

Rohan Verma@rohan-verma·42 दिन पहले

यह मामला पर्यावरण कार्यकर्ताओं और बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के बीच चल रहे टकराव में वित्तीय अनुपालन के महत्व को रेखांकित करता है। एफसीआरए नियमों के तहत निजी खातों में विदेशी फंड लेना और आयकर रिटर्न न दाखिल करना जांच का मुख्य बिंदु बन गया है। उत्तर प्रदेश और अन्य राज्यों में भी विकास बनाम पर्यावरण के ऐसे मामलों में विदेशी फंडिंग की पारदर्शिता पर अब केंद्रीय एजेंसियों की नजरें बेहद सख्त हो चुकी हैं, जिससे आने वाले दिनों में नागरिक संगठनों की कार्यप्रणाली पर कड़ा असर पड़ सकता है।

Ravikash Gupta@ravikash·42 दिन पहले

यह प्रकरण केवल एक एक्टिविस्ट के खिलाफ कानूनी कार्रवाई नहीं, बल्कि देश के रणनीतिक क्षेत्रों में काम करने वाले नागरिक संगठनों के वित्तीय अनुपालन पर गंभीर सवाल खड़े करता है। निजी खातों में सीधे विदेशी मुद्रा का प्रवाह और लंबे समय तक आयकर रिटर्न दाखिल न करना कॉरपोरेट गवर्नेंस और वित्तीय पारदर्शिता के बुनियादी नियमों का उल्लंघन है। देश के सीमावर्ती और ऊर्जा-संवेदनशील इलाकों में ढांचागत विकास परियोजनाओं के विरोध में आने वाले विदेशी फंड्स की यह मॉनिटरिंग भविष्य में एनजीओ फंडिंग के नियमों को और अधिक कड़ा बना सकती है, जिससे इस सेक्टर की पूरी कार्यप्रणाली प्रभावित होगी।

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