पूर्वोत्तर भारत के पहाड़ी राज्यों में मानसून की विनाशकारी बारिश ने जनजीवन को बुरी तरह अस्त-व्यस्त कर दिया है। अरुणाचल प्रदेश और सिक्किम में लगातार हो रही अतिवृष्टि के कारण नदियां उफान पर हैं और कई इलाकों में बड़े पैमाने पर भूस्खलन व अचानक बाढ़ की घटनाएं सामने आई हैं। अरुणाचल प्रदेश के दिबांग घाटी जिले में शुक्रवार की शाम आई अचानक बाढ़ की चपेट में आकर भारतीय सेना के दो अस्थायी कैंप बह गए, जिसके बाद से पांच सैन्यकर्मी लापता हैं। दूसरी ओर, राज्य के ही अपर सुबनसिरी जिले में एक निर्माणाधीन पहाड़ी सड़क पर हुए भीषण भूस्खलन में चार मजदूरों की दर्दनाक मौत हो गई है। पड़ोसी राज्य सिक्किम में भी स्थिति बेहद गंभीर बनी हुई है, जहां पश्चिमी सिक्किम के ग्यालशिंग जिले में भूस्खलन के खतरे को देखते हुए प्रशासन ने 28 परिवारों के करीब 60 लोगों को तत्काल सुरक्षित स्थानों पर भेजने के कड़े निर्देश जारी किए हैं। पूरे क्षेत्र में राहत व बचाव कार्य जारी हैं, लेकिन लगातार गिरते मलबे और खराब मौसम के कारण अभियान में भारी बाधाएं आ रही हैं।
दिबांग घाटी में उफनाया नाला, सेना के कैंप बहने से 5 जवान लापता
अरुणाचल प्रदेश के दिबांग घाटी जिले में शुक्रवार की शाम अचानक मौसम का मिजाज बदला और मूसलाधार बारिश के चलते पहाड़ी नदियों व नालों का जलस्तर तेजी से बढ़ गया। जलस्तर में आई इस अचानक वृद्धि के कारण वहां स्थापित सेना के दो अस्थायी कैंप बाढ़ के तेज बहाव की चपेट में आ गए। इस भीषण हादसे के दौरान कैंप में मौजूद सात सैन्यकर्मी पानी के प्रचंड वेग में बह गए। घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय प्रशासन और सुरक्षा बलों ने संयुक्त रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया।
आपदा राहत टीमों ने त्वरित कार्रवाई करते हुए दो सैन्यकर्मियों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया, लेकिन पांच जवानों का अब तक कोई सुराग नहीं मिल पाया है। राज्य आपातकालीन संचालन केंद्र ने स्थिति की पुष्टि करते हुए बताया कि शुक्रवार शाम को आई इस अचानक बाढ़ के बाद से लापता जवानों की तलाश के लिए दिबांग घाटी के दुर्गम इलाकों में गहन तलाशी अभियान चलाया जा रहा है। नदी के बहाव क्षेत्र में सेना के गोताखोर और बचाव दल लगातार निगरानी कर रहे हैं। हालांकि, रुक-रुक कर हो रही बारिश और नदियों के मटमैले उफान के कारण बचाव कार्य में काफी कठिनाइयां पेश आ रही हैं। प्रशासन ने आसपास के निचले इलाकों में अलर्ट जारी कर दिया है ताकि किसी भी अन्य अप्रिय घटना से बचा जा सके।
अपर सुबनसिरी में सड़क निर्माण स्थल पर भूस्खलन, 4 लोगों की मौत
अरुणाचल प्रदेश का अपर सुबनसिरी जिला भी इस प्राकृतिक आपदा से अछूता नहीं रहा। जिले के केओजारिंग-बयाचिंग मार्ग पर सड़क निर्माण का कार्य चल रहा था, तभी पहाड़ी का एक बड़ा हिस्सा भरभरा कर नीचे आ गिरा। मलबे के साथ विशाल चट्टानें और मिट्टी का बड़ा ढेर अचानक खिसकने से वहां काम कर रहे मजदूर उसकी चपेट में आ गए और संभलने का मौका तक नहीं मिला।
इस हादसे में चार लोगों की मौके पर ही मौत हो गई। मृतकों की आधिकारिक पहचान ताडू बाकी, ताजी राय, मार्कोश बसुमतारी और बाबुल अली के रूप में की गई है। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, भूस्खलन इतनी तेजी से हुआ कि मजदूर अपनी जान बचाने के लिए भाग भी नहीं सके और कई फीट गहरे मलबे के नीचे दब गए। घटना के तुरंत बाद स्थानीय ग्रामीणों और राहत कर्मियों ने मलबा हटाकर शवों को बाहर निकाला। पहाड़ी क्षेत्रों में वर्षा के दौरान सड़क चौड़ीकरण और निर्माण कार्य अत्यधिक जोखिम भरा हो जाता है। अचानक ढलान खिसकने और सड़क धंसने से राहत टीमों को भी घटनास्थल तक पहुंचने में घंटों मशक्कत करनी पड़ती है।
सिक्किम के ग्यालशिंग जिले में भूस्खलन का संकट, गांव खाली कराने के निर्देश
अरुणाचल प्रदेश के साथ-साथ सिक्किम में भी कुदरत का कहर देखने को मिल रहा है। सिक्किम के पश्चिमी भाग में स्थित ग्यालशिंग जिले के अंतर्गत युक्साम सब-डिवीजन की 11-रिंबी तिंब्रोंग ग्राम पंचायत इकाई (जीपीयू) क्षेत्र में पहाड़ी का एक बड़ा हिस्सा खिसक गया है। लगातार जमीन धंसने के कारण कई आवासीय मकानों की नींव हिल गई है, जिससे दर्जनों परिवारों के बेघर होने का खतरा पैदा हो गया है।
हालात की गंभीरता को देखते हुए युक्साम के सब-डिविजनल मजिस्ट्रेट कार्यालय ने आपातकालीन आदेश जारी किए हैं। स्थानीय प्रशासनिक अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि वे प्रभावित और संवेदनशील क्षेत्रों में स्थित घरों की पहचान करें और बिना कोई समय गंवाए वहां रहने वाले लोगों को सुरक्षित आश्रय स्थलों पर स्थानांतरित करें। प्रशासन ने प्रभावित नागरिकों के लिए भोजन, पीने का पानी और प्राथमिक स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने का भरोसा दिया है, जबकि राजस्व और आपदा प्रबंधन अधिकारी लगातार स्थिति का आकलन कर रहे हैं।
रिंबी और सिंगलिटाम में 15 दिनों से दहशत का माहौल, रात में सो नहीं पा रहे लोग
ग्यालशिंग जिले के रिंबी और सिंगलिटाम गांवों में बीते दो हफ्तों से स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। रिंबी गांव में लगभग 28 परिवारों के करीब 60 लोग इस आपदा के सीधे खतरे में हैं। स्थानीय निवासियों का कहना है कि पिछले 15 दिनों से पहाड़ी की मिट्टी धीरे-धीरे खिसक रही है, जिससे हर पल किसी बड़े हादसे की आशंका बनी रहती है। डर के इस माहौल में कई परिवारों ने अपने घरों को छोड़ दिया है और रात में जागकर पहरा देने को मजबूर हैं।
सिंगलिटाम गांव की स्थिति भी बेहद नाजुक है। यह गांव रिंबी से अधिक ऊंचाई पर स्थित है और ढलान पर बसा होने के कारण यहां भूस्खलन का जोखिम ज्यादा है। स्थानीय लोगों के अनुसार, सिंगलिटाम में कम से कम दो से तीन मकान पहले ही जमीन धंसने की वजह से आंशिक या पूर्ण रूप से क्षतिग्रस्त हो चुके हैं। यदि बारिश का सिलसिला इसी तरह जारी रहा, तो पूरा पहाड़ी ढांचा खिसक कर निचले इलाकों पर गिर सकता है। ग्रामीणों ने प्रशासन से स्थायी पुनर्वास और सुरक्षात्मक दीवारें बनाने की मांग की है।
प्रशासनिक टीमों का निरीक्षण और निगरानी योजना
आपदा के प्रभाव को नियंत्रित करने के लिए स्थानीय प्रशासन ने विस्तृत निरीक्षण योजना तैयार की है। युक्साम के सब-डिविजनल मजिस्ट्रेट (एसडीएम) और ब्लॉक डेवलपमेंट ऑफिसर (बीडीओ) की अगुआई में शनिवार को प्रभावित इलाकों का प्रारंभिक सर्वेक्षण किया गया। इस दौरे का मुख्य उद्देश्य उन मकानों की पहचान करना था जो पूरी तरह से रहने अयोग्य हो चुके हैं या जिन पर तत्काल गिरने का खतरा मंडरा रहा है।
इसके पश्चात रविवार को जिला कलेक्टर के नेतृत्व में सिंचाई, लोक निर्माण और आपदा प्रबंधन विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों की एक संयुक्त टीम मौके का विस्तृत जायजा लेगी। प्रशासनिक अधिकारियों का प्राथमिक ध्यान लोगों की जान बचाना और संवेदनशील बस्तियों से आबादी को सुरक्षित ठिकानों पर पहुंचाना है। अधिकारियों ने स्थानीय पंचायत प्रतिनिधियों के साथ समन्वय स्थापित किया है ताकि राहत सामग्री के वितरण में कोई रुकावट न आए।
पूर्वोत्तर में मानसून की चुनौतियां और सुरक्षा अपील
हर साल मानसून के दौरान सिक्किम और अरुणाचल प्रदेश जैसे पूर्वी हिमालयी राज्यों में लगातार बारिश के कारण भूस्खलन, अचानक आई बाढ़, सड़क संपर्क टूटने और पुल बह जाने की समस्याएं आम हो जाती हैं। दूरदराज के इलाकों में मोबाइल नेटवर्क बाधित होने और सड़कों पर मलबा जमा होने से राहत कार्यों की गति धीमी पड़ जाती है। दिबांग घाटी में लापता सैन्यकर्मियों की तलाश और सिक्किम के गांवों में जारी निकासी अभियान से स्पष्ट है कि इस बार मानसून का प्रभाव अत्यंत घातक साबित हो रहा है।
मौसम विशेषज्ञों और आपदा प्रबंधन प्राधिकरण ने चेतावनी दी है कि आने वाले दिनों में पहाड़ी ढलानों पर पानी का रिसाव बढ़ने से भूस्खलन की घटनाओं में और वृद्धि हो सकती है। प्रशासन ने आम नागरिकों और पर्यटकों से अपील की है कि वे अत्यंत आवश्यक न होने पर संवेदनशील पहाड़ी रास्तों पर यात्रा करने से बचें, उफनती नदियों के पास न जाएं और केवल आधिकारिक बुलेटिन पर ही विश्वास करें।





















