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असम के डिब्रू-सैखोवा के पास भूगर्भीय तेल उत्खनन विवाद पर सुप्रीम कोर्ट नई याचिका सुनने को तैयारअसम
2 सित॰ 2026, 7:40 pm (29 दिन पहले)· 1

असम के डिब्रू-सैखोवा के पास भूगर्भीय तेल उत्खनन विवाद पर सुप्रीम कोर्ट नई याचिका सुनने को तैयार

सुप्रीम कोर्ट ने ऑयल इंडिया लिमिटेड को असम के डिब्रू-सैखोवा राष्ट्रीय उद्यान के नीचे तेल उत्खनन के प्रस्ताव को खारिज करने के खिलाफ नई याचिका दायर करने की अनुमति दी है।

सार्वजनिक क्षेत्र की प्रमुख तेल कंपनी ऑयल इंडिया लिमिटेड को सुप्रीम कोर्ट से अपनी पुरानी अंतरिम याचिका वापस लेने और असम स्थित डिब्रू-सैखोवा राष्ट्रीय उद्यान के पास हाइड्रोकार्बन उत्खनन परियोजना को केंद्र सरकार की मंजूरी न मिलने के खिलाफ एक नई याचिका दायर करने की अनुमति मिल गई है। सरकारी ऊर्जा कंपनी एक्सटेंडेड रीच ड्रिलिंग तकनीक के माध्यम से वन्यजीव अभयारण्य की सीमाओं को नुकसान पहुंचाए बिना जमीन के हजारों मीटर नीचे मौजूद प्राकृतिक तेल भंडारों तक पहुंचना चाहती है। हालांकि, पर्यावरण नियामकों द्वारा अनुमति देने से इनकार किए जाने के बाद कंपनी ने शीर्ष अदालत में कानूनी समीक्षा की गुहार लगाई है।

सुप्रीम कोर्ट सुनवाई और रजिस्ट्री संबंधी निर्देश

यह महत्वपूर्ण मामला मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायाधीश जोयमाल्या बागची और न्यायाधीश वी मोहना की पीठ के सामने सुनवाई के लिए प्रस्तुत किया गया। ऑयल इंडिया लिमिटेड की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता राकेश द्विवेदी ने अदालत से कंपनी की अर्जी पर त्वरित सुनवाई करने की मांग की। प्रक्रियात्मक पहलुओं को स्पष्ट करते हुए मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा कि पर्यावरण से जुड़े पुराने मुख्य मामले में अंतरिम याचिकाओं को सूचीबद्ध न करने का पूर्व न्यायिक आदेश जारी था, ताकि उस समूचे मामले को अंतिम रूप से समाप्त किया जा सके। मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि यदि कंपनी के पास कोई नया कारण या नया विवाद उत्पन्न हुआ है, तो वह एक स्वतंत्र याचिका दाखिल कर सकती है, जिसे अदालत सुनवाई के लिए स्वीकार करेगी।

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राष्ट्रीय ऊर्जा आवश्यकता और ड्रिलिंग तकनीक की बनावट

अदालत के समक्ष दलीलें रखते हुए वरिष्ठ अधिवक्ता राकेश द्विवेदी ने इस परियोजना के आर्थिक और रणनीतिक महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने पीठ को बताया कि यह प्रस्तावित उत्खनन कार्य भारत की कुल कच्चे तेल की आवश्यकता का लगभग 3 प्रतिशत हिस्सा पूरा करने की क्षमता रखता है। कंपनी के वकील ने स्पष्ट किया कि एक्सटेंडेड रीच ड्रिलिंग (ERD) की कार्यप्रणाली पारंपरिक खुली या भूमिगत खदानों से पूरी तरह अलग होती है। उन्होंने अदालत को सूचित किया कि सभी ड्रिलिंग रिग, सतह के उपकरण और मुख्य बुनियादी ढांचा राष्ट्रीय उद्यान की भौगोलिक सीमा से बाहर स्थापित किए जाएंगे। ड्रिलिंग पाइपलाइन बाहरी जमीन पर 4,000 मीटर गहराई तक लंबवत जाती है और फिर क्षैतिज रूप से मुड़कर राष्ट्रीय उद्यान के 3,500 से 4,000 मीटर नीचे स्थित तेल भंडारों तक पहुंचती है।

पर्यावरण कानूनों की व्याख्या और 2023 का अदालती फैसला

कंपनी की यह अंतरिम याचिका ऐतिहासिक टी.एन. गोदावर्मन तिरुमुलपाद बनाम भारत संघ मामले में दाखिल की गई थी, जिसने भारत में वन संरक्षण और पर्यावरण न्यायशास्त्र की दिशा तय की है। ऑयल इंडिया लिमिटेड का तर्क है कि प्रशासनिक अधिकारियों ने सुप्रीम कोर्ट के 26 अप्रैल 2023 के फैसले को गलत तरीके से लागू किया है। उस फैसले के तहत राष्ट्रीय उद्यानों, वन्यजीव अभयारण्यों और उनके 1 किलोमीटर के दायरे में खनन गतिविधियों पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया गया था। हालांकि, सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम ने दलील दी कि राष्ट्रीय उद्यान के बाहर से की जाने वाली क्षैतिज भूगर्भीय ड्रिलिंग किसी भी प्रकार से सतह खनन के दायरे में नहीं आती है, क्योंकि इससे संरक्षित क्षेत्र की ऊपरी सतह पर कोई भौतिक हलचल नहीं होती।

तिनसुकिया में वन भूमि आवंटन का विवाद और आगे का रास्ता

कानूनी विवाद का मुख्य केंद्र असम के तिनसुकिया जिले में प्रस्तावित परियोजना के लिए वन भूमि का डायवर्जन है। फॉरेस्ट एडवाइजरी कमेटी की नकारात्मक सिफारिशों के बाद पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने 0.069 हेक्टेयर वन भूमि के डायवर्जन की स्वीकृति देने से इनकार कर दिया था। ऑयल इंडिया लिमिटेड ने अदालत में कहा कि एक्सटेंडेड रीच ड्रिलिंग के माध्यम से हाइड्रोकार्बन निकालना एक अलग कानूनी व नियामक ढांचे के अधीन आता है और इस पर सामान्य खनन नियम लागू नहीं होते। शीर्ष अदालत की सहमति मिलने के बाद कंपनी के वकील ने अपनी पुरानी याचिका वापस ले ली और जल्द ही एक नई याचिका दाखिल कर मामले को दिन की कार्यवाही की शुरुआत या अंत में तुरंत सुने जाने का अनुरोध किया।

सवाल-जवाब

सुप्रीम कोर्ट ने ऑयल इंडिया लिमिटेड को क्या अनुमति दी है?
सुप्रीम कोर्ट ने ऑयल इंडिया को अपनी पुरानी अंतरिम याचिका वापस लेने और केंद्र सरकार के इनकार के खिलाफ नई याचिका दायर करने की अनुमति दी है।
यह परियोजना किस राष्ट्रीय उद्यान से संबंधित है?
यह परियोजना असम के तिनसुकिया जिले में स्थित डिब्रू-सैखोवा राष्ट्रीय उद्यान से संबंधित है।
एक्सटेंडेड रीच ड्रिलिंग (ERD) क्या है?
इस तकनीक में ड्रिलिंग उपकरण संरक्षित क्षेत्र के बाहर लगाए जाते हैं और पाइपलाइन जमीन के 4,000 मीटर नीचे जाकर क्षैतिज रूप से तेल भंडार तक पहुंचती है।
इस परियोजना से देश को कितना तेल मिल सकता है?
अदालत में प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार, यह परियोजना भारत की कुल तेल आवश्यकता का लगभग 3 प्रतिशत पूरा कर सकती है।
पर्यावरण मंत्रालय ने इस प्रस्ताव को क्यों खारिज किया था?
मंत्रालय ने राष्ट्रीय उद्यानों और उनके 1 किलोमीटर के दायरे में खनन पर सुप्रीम कोर्ट के 2023 के प्रतिबंध का हवाला देते हुए 0.069 हेक्टेयर वन भूमि का डायवर्जन खारिज कर दिया था।
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