असम सरकार ने राज्य की महिलाओं को त्योहारी सीजन के मद्देनजर एक बड़ी वित्तीय राहत देने की घोषणा की है। मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने स्पष्ट किया है कि प्रमुख कल्याणकारी कार्यक्रम ओरुनोदोई के तहत निबंधित लाभार्थियों को अक्टूबर महीने में सामान्य से अधिक राशि ट्रांसफर की जाएगी। इस विशेष निर्णय के तहत अक्टूबर माह की सहायता राशि 1,500 रुपए निर्धारित की गई है। मुख्यमंत्री ने इसे दुर्गा पूजा के पावन अवसर पर राज्य की नारी शक्ति को समर्पित एक विशेष उपहार बताते हुए कहा कि यह पहल परिवारों की त्योहारी तैयारी और उनकी खुशियों में भागीदारी सुनिश्चित करने के उद्देश्य से की गई है।
मंत्रिमंडल की बैठक में लगी मुहर
इस कल्याणकारी प्रस्ताव को गुवाहाटी स्थित लोक सेवा भवन में आयोजित असम कैबिनेट की अहम बैठक में औपचारिक मंजूरी दी गई। मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में गुरुवार को हुई इस बैठक में सामाजिक सुरक्षा योजनाओं की समीक्षा के बाद यह कदम उठाया गया। सामान्य दिनों में ओरुनोदोई योजना के अंतर्गत प्रत्येक पात्र महिला के खाते में हर महीने 1,250 रुपए की आर्थिक मदद भेजी जाती है। सरकार ने त्योहारी सीजन की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए केवल अक्टूबर माह के लिए इस राशि में 250 रुपए की बढ़ोतरी करने का फैसला किया है। इस बढ़ोतरी के लागू होने से समूचे असम में लगभग 40 लाख महिलाओं को सीधे उनके बैंक खातों में बढ़ा हुआ पैसा प्राप्त होगा।
चाय बागान श्रमिकों को बोनस और कर्मियों के लिए छुट्टी
कैबिनेट बैठक में राज्य के कर्मचारियों और श्रमिक वर्ग के हित में भी कई महत्वपूर्ण कदम उठाए गए। सरकार ने असम टी कॉर्पोरेशन लिमिटेड यानी एटीसीएल के अंतर्गत कार्यरत पात्र कर्मचारियों और चाय बागानों में काम करने वाले श्रमिकों के लिए 20 प्रतिशत पूजा बोनस देने की घोषणा की है। त्योहार के मौके पर घोषित इस बोनस से चाय उद्योग से जुड़े हजारों कामगारों को बड़ी आर्थिक मदद मिलेगी। इसके अतिरिक्त, सरकारी कर्मचारियों की सहूलियत के लिए 17 अक्टूबर को अतिरिक्त अवकाश मंजूर किया गया है। चूंकि 18 अक्टूबर को रविवार पड़ रहा है, इसलिए कर्मचारियों को दुर्गा पूजा उत्सव धूमधाम से मनाने के लिए लगातार अवकाश का लाभ मिल सकेगा।
ओरुनोदोई योजना की पात्रता शर्तें और नियम
असम सरकार द्वारा चलाई जा रही इस कल्याणकारी योजना का उद्देश्य कमजोर आय वर्ग के परिवारों की महिलाओं को वित्तीय संबल और सुरक्षा प्रदान करना है। योजना में शामिल होने के लिए कुछ बुनियादी नियम निर्धारित किए गए हैं
- मूल निवास की अनिवार्यता: आवेदक परिवार का असम का स्थायी निवासी होना आवश्यक है और वर्तमान में भी परिवार का राज्य के भीतर ही निवास करना अनिवार्य है।
- महिला मुखिया को प्राथमिकता: परिवार की 18 वर्ष या उससे अधिक आयु की वयस्क महिला को सामान्य तौर पर प्राथमिक लाभार्थी के तौर पर पंजीकृत किया जाता है। परिवार में यदि कोई दिव्यांग सदस्य मौजूद है, तो बिना किसी लैंगिक भेदभाव के उन्हें भी मुख्य लाभार्थी के रूप में नामित किया जा सकता है।
- वार्षिक आय की सीमा: योजना के तहत केवल वही परिवार पात्र माने जाते हैं, जिनकी कुल पारिवारिक सालाना आय 2 लाख रुपये से कम हो। यह आय सीमा चयन प्रक्रिया का मुख्य आधार है।
- सरकारी सेवा वाले परिवार अपात्र: यदि परिवार का कोई भी सदस्य सरकारी सेवा अथवा सरकारी नौकरी में कार्यरत है, तो उस परिवार को सामान्य तौर पर इस योजना के दायरे से बाहर रखा जाता है।
पंजीकरण के लिए आवश्यक दस्तावेज
योजना का लाभ पारदर्शी तरीके से सीधे बैंक खाते में पहुंचाने के लिए सरकार ने जरूरी प्रपत्र निर्धारित किए हैं। लाभार्थियों के पास आधार कार्ड होना अनिवार्य है, साथ ही बैंक खाता भी आधार से लिंक और पूर्णतः केवाईसी मानकों के अनुरूप होना चाहिए। इसके अलावा आयु, निवास और पहचान स्थापित करने के लिए मतदाता पहचान पत्र अथवा स्थानीय निवास प्रमाण पत्र की आवश्यकता होती है। आवेदन प्रक्रिया को पूरा करने के लिए आवेदक की पासपोर्ट साइज तस्वीर और सक्रिय मोबाइल नंबर का विवरण भी अनिवार्य रूप से दर्ज कराया जाता है।






















